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Bhadohi News: 1000 करोड़ का बढ़ेगा कालीन कारोबार, नुकसान की भरपाई की उम्मीद
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भदोही नगर के एक उत्पादन इकाई में कालीनों की धुलाई करते मजदूर। स्रोत- संवाद
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भदोही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसका फायदा भदोही के कालीन कारोबार को मिलेगा। इस फैसले से पुरानी टैरिफ के कारण हुए नुकसान की भरपाई तो होगी ही साथ ही आठ से 10 प्रतिशत तक निर्यात बढ़ने की भी उम्मीद है। सीईपीसी का मानना है कि टैरिफ घटने से एक हजार करोड़ का कालीन कारोबार बढ़ सकता है। टैरिफ घटाने की घोषणा का लाभ पूर्वांचल के 800 छोटे-बड़े कालीन उत्पादकों के साथ-साथ आठ लाख कालीन बुनकरों और मजदूरों को मिलेगा। साल 2025-26 में देश का कालीन कारोबार 17 हजार करोड़ का रहा। साल 2024 तक कालीन पर तीन से आठ फीसदी तक अमेरिकी टैरिफ रहता था। अप्रैल 2025 में अमरीका ने भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ थोप कर भारतीय उद्यमियों को सकते में डाल दिया था। अभी इस पर चिंतन और पुराने अमरीकी ऑडर्स की पूर्ति के लिए खरीदारों से बातचीत का दौर चल ही रहा था कि अगस्त में ट्रंप ने 25 प्रतिशत और टैरिफ थोप कर टैरिफ 50 प्रतिशत कर दिया था। 50 प्रतिशत टैरिफ के बीच भारतीय कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) और ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) ने आशंका जताई थी कि नए टैरिफ प्रावधानों से भारतीय कालीन निर्यात 35 फीसदी तक प्रभावित हो सकता है, हालांकि अब टैरिफ घटने से कारोबार बेहतर होने की उम्मीद है। भारत का कुल कालीन निर्यात 17 हजार करोड़ में से 60 प्रतिशत खरीदार अमरीका है। यदि ये टैरिफ कम न हुए तो पूर्वांचल के 800 कालीन उत्पादक और निर्यातक तथा उनसे जुड़े आठ लाख बुनकर और मजदूर प्रभावित होंगे।
कालीन निर्यातकों ने कहा
ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ से चालू वित्त वर्ष में 35 प्रतिशत तक निर्यात गिरने की संभावना बनी थी। टैरिफ कम होने से इंडस्ट्री पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। - पीयूष बरनवाल, निर्यातक (फोटो-16)
टैरिफ घटने की खबर के बाद लाखों मजदूरों ने राहत की सांस ली है। यह खबर सुनकर कालीन उद्यमियों और छोटे कांट्रैक्टरों ने भी राहत महसूस की है। इसका लाभ आने वाले दिनों में दिखेगा। उमेश गुप्ता, निर्यातक (फोटो-17)
समूचे इंडस्ट्री के लिए यह अच्छी खबर है। इसके लिए प्रधानमंत्री, वाणिज्य और केंद्रीय कपड़ा मंत्री के प्रयासों की सराहना करनी होगी। जो सक्रिय रूप से प्रयास करते रहे। - संजय गुप्ता, निर्यातक (फोटो-18)
अमरीकी टैरिफ से दूसरे उद्योगों के मुकाबले सबसे अधिक कालीन उद्योग प्रभावित हुआ था। नौ महीने अनिश्चतता के बादलों के बीच आई यह खबर इंडस्ट्री को नई दिशा देगा। - यादवेंद्र कुमार राय, निर्यातक (फोटो-19)
सीईपीसी के पदाधिकारी बोले
हम अपने श्रमिकों के लिए चिंतित थे। पिछले 9 महीनों से हमारे 25 लाख श्रमिकों के रोजगार दांव पर लगे थे। प्रधानमंत्री के प्रयासों से जो सकारात्मक परिणाम आया है, उससे कालीन उद्योग में श्रमिकों और मजदूरों को लाभ मिलेगा। ऐसी आशा है। - कैप्टन मुकेश कुमार गोंबर, अध्यक्ष सीईपीसी (फोटो-20)
हम चालू वित्त वर्ष के अंत की ओर बढ़ रहे थे। टैरिफ कम होने से अब हम मौजूदा वित्तीय वर्ष को सकारात्मक सोच के साथ समाप्त करने की ओर बढ़ गए हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में हम और भी मजबूती के साथ विश्व बाजार में भारतीय कालीनों की धाक जमाने के लिए निकल पड़ेंगे। - असलम महबूब, उपाध्यक्ष सीईपीसी (फोटो-21)
सबसे खुशी की बात यह है कि महीनों से चल रहे भारत सरकार के प्रयास सार्थक सिद्ध हुए हैं। इसका हमारे निर्यात पर सकारात्मक प्रभाव होगा। उद्योग में लगे श्रमिकों और बुनकरों की रोजी रोटी पर संकट टल गया है। पिछले नौ महीनों में हुए नुकसान की भरपाई हम शीघ्र कर लेंगे। - कुलदीप राज वाटल, पूर्व अध्यक्ष सीईपीसी (फोटो-22)
अमरीका के टैरिफ के कारण भारी मात्रा में जहां माल डंप थे। वहीं, इकाईयों में मजदूरों की छटनी भी हो रही थी। नए ट्रेड डील से इस पर लगाम लगना तय है। आने-वाले दिनों में हमारे निर्यात पर भी इसका लाभ देखने को मिलेगा। एकमा की ओर से हम इसके लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। - मो. रजा खां, एकमाध्यक्ष (फोटो-23)
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ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ से चालू वित्त वर्ष में 35 प्रतिशत तक निर्यात गिरने की संभावना बनी थी। टैरिफ कम होने से इंडस्ट्री पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। - पीयूष बरनवाल, निर्यातक (फोटो-16)
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टैरिफ घटने की खबर के बाद लाखों मजदूरों ने राहत की सांस ली है। यह खबर सुनकर कालीन उद्यमियों और छोटे कांट्रैक्टरों ने भी राहत महसूस की है। इसका लाभ आने वाले दिनों में दिखेगा। उमेश गुप्ता, निर्यातक (फोटो-17)
समूचे इंडस्ट्री के लिए यह अच्छी खबर है। इसके लिए प्रधानमंत्री, वाणिज्य और केंद्रीय कपड़ा मंत्री के प्रयासों की सराहना करनी होगी। जो सक्रिय रूप से प्रयास करते रहे। - संजय गुप्ता, निर्यातक (फोटो-18)
अमरीकी टैरिफ से दूसरे उद्योगों के मुकाबले सबसे अधिक कालीन उद्योग प्रभावित हुआ था। नौ महीने अनिश्चतता के बादलों के बीच आई यह खबर इंडस्ट्री को नई दिशा देगा। - यादवेंद्र कुमार राय, निर्यातक (फोटो-19)
सीईपीसी के पदाधिकारी बोले
हम अपने श्रमिकों के लिए चिंतित थे। पिछले 9 महीनों से हमारे 25 लाख श्रमिकों के रोजगार दांव पर लगे थे। प्रधानमंत्री के प्रयासों से जो सकारात्मक परिणाम आया है, उससे कालीन उद्योग में श्रमिकों और मजदूरों को लाभ मिलेगा। ऐसी आशा है। - कैप्टन मुकेश कुमार गोंबर, अध्यक्ष सीईपीसी (फोटो-20)
हम चालू वित्त वर्ष के अंत की ओर बढ़ रहे थे। टैरिफ कम होने से अब हम मौजूदा वित्तीय वर्ष को सकारात्मक सोच के साथ समाप्त करने की ओर बढ़ गए हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में हम और भी मजबूती के साथ विश्व बाजार में भारतीय कालीनों की धाक जमाने के लिए निकल पड़ेंगे। - असलम महबूब, उपाध्यक्ष सीईपीसी (फोटो-21)
सबसे खुशी की बात यह है कि महीनों से चल रहे भारत सरकार के प्रयास सार्थक सिद्ध हुए हैं। इसका हमारे निर्यात पर सकारात्मक प्रभाव होगा। उद्योग में लगे श्रमिकों और बुनकरों की रोजी रोटी पर संकट टल गया है। पिछले नौ महीनों में हुए नुकसान की भरपाई हम शीघ्र कर लेंगे। - कुलदीप राज वाटल, पूर्व अध्यक्ष सीईपीसी (फोटो-22)
अमरीका के टैरिफ के कारण भारी मात्रा में जहां माल डंप थे। वहीं, इकाईयों में मजदूरों की छटनी भी हो रही थी। नए ट्रेड डील से इस पर लगाम लगना तय है। आने-वाले दिनों में हमारे निर्यात पर भी इसका लाभ देखने को मिलेगा। एकमा की ओर से हम इसके लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। - मो. रजा खां, एकमाध्यक्ष (फोटो-23)
