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Bhadohi News: वीजा मुक्त व्यापार से जर्मनी-भारत के बीच बढ़ेगा कालीन का कारोबार
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हिमटेक्स्टिल-2026 में भारतीय पवेलियन का उद्घाटन करते डीप्टी महानिदेशक अखिलेश कुमार। स्रोत- सीईप
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भदोही। भारतीयों को जर्मनी में वीजा की जरूरत न होने वाली खबर से कालीन उद्योग में राहत की उम्मीद जगी है। जर्मनी भारतीय कालीनों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है। वीजा में मिली छूट के बाद निर्यातकों का जर्मनी से व्यापारिक यात्रा में राहत मिलेगी। इससे कालीन उद्योग की बेहतरी के रास्ते खुलेंगे।
भारत और जर्मनी के प्रतिनिधिमंडल के बीच गुजरात में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किया। इसमें भारतीयों के लिए जर्मनी में किसी प्रकार के वीजा की जरूरत न होने वाला समझौता भी शामिल है। अमेरिका के बाद भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा आयातक जर्मनी है। जर्मनी में वर्ष भर में दो ऐसे टेक्सटाइल एक्सपो होते हैं, जो भारतीय कालीन निर्यातकों में खासा लोकप्रिय हैं।
डोमोटेक्स - 2026 और हिमटेक्स्टिल-2026 में भाग लेने के लिए भारत से एक सौ से अधिक कालीन व्यापारी इन दिनों जर्मनी के दौरे पर हैं। जर्मनी से भारत के रिश्ते प्रगाढ़ हैं फिर भी यूरोपीय देशों का दौरा करने के लिए वीजा मिलना आसान नहीं होता।
भारतीय व्यापारियों को जब-जब वहां जाने की आवश्यकता हुई है, वीजा के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। अब जर्मनी जाने के लिए अब भारतीयों को वीजा की आवश्यकता खत्म होने के बाद निर्यातकों को राहत मिलेगी। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने जर्मनी को 1053 करोड़ रुपयों के कालीन निर्यात किए थे। अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ थोपे जाने के बाद अधिकतर भारतीय कालीन निर्यातक जर्मनी समेत अन्य यूरोपीय देशों को अपनी पहुंच बढ़ाना चाहते हैं।
अमेरिकी टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद भारतीय निर्यातक पहले से जर्मनी में व्यापार बढ़ाने के अवसर तलाश कर रहे थे। दोनों देशों के बीच जो सहमति बनी है, वह स्वागतयोग्य है। इसमें जर्मनी के चांसलर और भारतीय प्रधानमंत्री कीसराहना होनी चाहिए।
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डोमोटेक्स - 2026 और हिमटेक्स्टिल-2026 में भाग लेने के लिए भारत से एक सौ से अधिक कालीन व्यापारी इन दिनों जर्मनी के दौरे पर हैं। जर्मनी से भारत के रिश्ते प्रगाढ़ हैं फिर भी यूरोपीय देशों का दौरा करने के लिए वीजा मिलना आसान नहीं होता।
भारतीय व्यापारियों को जब-जब वहां जाने की आवश्यकता हुई है, वीजा के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। अब जर्मनी जाने के लिए अब भारतीयों को वीजा की आवश्यकता खत्म होने के बाद निर्यातकों को राहत मिलेगी। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने जर्मनी को 1053 करोड़ रुपयों के कालीन निर्यात किए थे। अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ थोपे जाने के बाद अधिकतर भारतीय कालीन निर्यातक जर्मनी समेत अन्य यूरोपीय देशों को अपनी पहुंच बढ़ाना चाहते हैं।
अमेरिकी टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद भारतीय निर्यातक पहले से जर्मनी में व्यापार बढ़ाने के अवसर तलाश कर रहे थे। दोनों देशों के बीच जो सहमति बनी है, वह स्वागतयोग्य है। इसमें जर्मनी के चांसलर और भारतीय प्रधानमंत्री कीसराहना होनी चाहिए।