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Bhadohi News: प्राकृतिक रंगों से खेजें होली, दीदियां तैयार कर रहीं हर्बल गुलाल
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पुरेगोसाई में हर्बल गुलाल बनाती महिलाएं। संवाद
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ज्ञानपुर। होली के त्योहार को देखते हुए ज्ञानपुर ब्लॉक के पूरेगोसाईंदास में विंध्यवासिनी समूह की दीदियां इस बार हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। इसमें किसी भी तरह के हानिकारक रसायनों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। समूह की महिलाओं के अनुसार, इस गुलाल को बनाने में पालक, चुकंदर, गेंदे के फूल, आरारोट पाउडर और हल्दी जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिल रहा है। समूह की सदस्यों का कहना है कि यह गुलाल त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाता और इसकी बाजार में काफी मांग भी है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को सरकार आत्मनिर्भर बना रही है। करीब साढ़े सात हजार समूह से जुड़ी 80 हजार से अधिक महिलाएं बैंकों से ऋण लेकर स्वरोजगार कर स्वयं और दूसरों को समृद्ध बना रही हैं। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस पर जहां तिरंगा बनाती हैं तो कुछ समूह की महिलाएं अगरबत्ती, धूपबत्ती, सोड़ा पाउडर, क्लीनर आदि बना रही हैं। अब पूरेगोसाईदास की मां विंध्यवासिनी समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। समूह की दीदियों के इस प्रयास की सराहना भी हो रही है। तैयार किए जा रहे हर्बल गुलाल की खासियत यह है कि इसमें बेस के रूप में आरारोट पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा है और रंग लाने के लिए ताजी सब्जियां और फूलों के अर्क का प्रयोग किया जा रहा है। समूह की अध्यक्ष ममता रानी ने बताया कि दीदियां जो हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं, वह इको फ्रेंडली व पर्यावरण के अनुकूल है। इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है। इसके प्रयोग से त्वचा को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। यह पूरी तरह रसायन मुक्त उत्पाद है। सरकार की मंशा के लिए लोकल फॉर वोकल के तहत इससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। समूह की दीदियां इसे तैयार कर बाजार में बेचकर आमदनी बढ़ाएंगी और आत्मनिर्भर होंगी।
रोजगार के साथ मिली पहचान
मां विंध्यवासिनी स्वयं सहायता समूह की दीदी ममता रानी, रेशमा देवी, मेनका देवी, चिंता देवी, फोटो देवी, प्रेमा देवी, गीता देवी ने कहा कि हमें खुशी है कि हमारे बनाए रंग लोगों को चेहरों पर मुस्कान लाएंगे। हमारा मुख्य उद्देश्य लोगों को केमिकल युक्त रंगों के दुष्प्रभावों से बचाना है। पहले हम केवल घर के कामों तक सीमित थे, लेकिन आज हम खुद रंग बना रहे हैं और बेच रहे हैं। इस सकाम से न केवल रोजगार मिला है, बल्कि हमारी नई पहचान भी बनी है। 30 ग्राम गुलाल को 30 रुपये में दिया जा रहा है।
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रोजगार के साथ मिली पहचान
मां विंध्यवासिनी स्वयं सहायता समूह की दीदी ममता रानी, रेशमा देवी, मेनका देवी, चिंता देवी, फोटो देवी, प्रेमा देवी, गीता देवी ने कहा कि हमें खुशी है कि हमारे बनाए रंग लोगों को चेहरों पर मुस्कान लाएंगे। हमारा मुख्य उद्देश्य लोगों को केमिकल युक्त रंगों के दुष्प्रभावों से बचाना है। पहले हम केवल घर के कामों तक सीमित थे, लेकिन आज हम खुद रंग बना रहे हैं और बेच रहे हैं। इस सकाम से न केवल रोजगार मिला है, बल्कि हमारी नई पहचान भी बनी है। 30 ग्राम गुलाल को 30 रुपये में दिया जा रहा है।
