भदोही। अमेरिकी सीनेट ने ‘’लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट-2026’’ विधेयक को भारी बहुमत से पारित होने के बाद जिले के कालीन निर्यातकों में चिंता के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी टैरिफ को लेकर अब देश में लगातार अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के अध्यक्ष उमेश कुमार गुप्ता मुन्ना ने कहा कि यह निर्यातकों को परेशान करने वाला है। उन्होने कहा कि ट्रंप ने जब पहली बार भारत पर अचानक 50 प्रतिशत टैरिफ थोपा था, तब से धीरे धीरे दो वर्ष बीत चुके हैं। ट्रंप ने टैरिफ पर रोलबैक भी किया, लेकिन अब तक भारतीय कालीन उद्योग उससे उबर नहीं सका है। कहा कि अब जबकि अमेरिकी सीनेट ने ट्रंप को 100 प्रतिशत तक टैरिफ थोपने का अधिकार दे दिया है तो यह और भी गंभीर बात है। इससे अनिश्चतता का माहौल बना रहेगा।
जिससे आयातकों को भारत से कालीन खरीदने के लिए कई बार सोचना पड़ेगा। एकमाध्यक्ष ने कहा कि अभी कोई नया टैरिफ नहीं लगा है, लेकिन फिर भी हर समय 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ थोपे जाने का भय बना रहेगा। इससे भारतीय कालीन अमेरिका में मौजूदा कीमत पर बेचे जाएंगे। जिससे साफ है कि दूसरे देशों के मुकाबले हमारे कालीनों की बिक्री में कमी आएगी। भदोही के अधिकतर कालीन निर्यातकों का मानना है कि भारत को किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। संवाद