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आईआईसीटी : कारपेट इंस्पेक्शन और क्वालिटी कंट्रोल में बनाएं भविष्य
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भदोही। भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) ने एक ऐसा अल्प अवधि का पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह है। कारपेट इंस्पेक्शन और क्वालिटी कंट्रोल नामक यह कोर्स चार महीने का होगा। आठ जून से यह शुरू हो रहा है। इसमें दाखिला लेकर युवा अपना हुनर निखार सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि इंडस्ट्री की ओर से इसकी मांग आने के बाद गंभीरता से विचार कर पाठ्यक्रम तैयार किया गया। बताया कि संस्थान में कालीन एवं वस्त्र प्रौद्योगिकी में चार वर्षीय बीटेक कोर्स चल रहा है, जिसकी पढ़ाई कर सैकड़ों युवा देश-विदेश के अच्छे संस्थानों में कार्यरत हैं। बताया कि कालीन उद्योग में डाइंग (रंगाई), कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग से जुड़े चार और छह महीने के कोर्स पहले से संचालित किए जा रहे हैं। इनका प्रशिक्षण हासिल कर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
नए कोर्स के बारे में उन्होंने बताया कि आज के दौर में भारी संख्या में कालीन निर्यातक, कालीन आयातक और आयातकों के एजेंट भारत में भी और विदेश में कारपेट इंस्पेक्शन व क्वालिटी कंट्रोल के लिए युवाओं की भर्ती कर रहे हैं। इनका काम होता है कि वे कालीनों की गुणवत्ता जांच सकें। वर्तमान में कालीन उद्योग में ऐसे युवाओं की कमी है। कालीन निर्यातकों की ओर से इस ओर ध्यान आकर्षित किए जाने के बाद चार महीने का कोर्स तैयार किया गया है। कोर्स की फीस 20 हजार रुपये रखी गई है। प्रतिदिन दो घंटे की कक्षाएं लेकर युवा अपना कौशल विकास कर सकते हैं। इसमें कालीन बुनाई, धुलाई, स्ट्रेचिंग से लेकर पैकिंग तक की जानकारी दी जाएगी।
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संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि इंडस्ट्री की ओर से इसकी मांग आने के बाद गंभीरता से विचार कर पाठ्यक्रम तैयार किया गया। बताया कि संस्थान में कालीन एवं वस्त्र प्रौद्योगिकी में चार वर्षीय बीटेक कोर्स चल रहा है, जिसकी पढ़ाई कर सैकड़ों युवा देश-विदेश के अच्छे संस्थानों में कार्यरत हैं। बताया कि कालीन उद्योग में डाइंग (रंगाई), कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग से जुड़े चार और छह महीने के कोर्स पहले से संचालित किए जा रहे हैं। इनका प्रशिक्षण हासिल कर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
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नए कोर्स के बारे में उन्होंने बताया कि आज के दौर में भारी संख्या में कालीन निर्यातक, कालीन आयातक और आयातकों के एजेंट भारत में भी और विदेश में कारपेट इंस्पेक्शन व क्वालिटी कंट्रोल के लिए युवाओं की भर्ती कर रहे हैं। इनका काम होता है कि वे कालीनों की गुणवत्ता जांच सकें। वर्तमान में कालीन उद्योग में ऐसे युवाओं की कमी है। कालीन निर्यातकों की ओर से इस ओर ध्यान आकर्षित किए जाने के बाद चार महीने का कोर्स तैयार किया गया है। कोर्स की फीस 20 हजार रुपये रखी गई है। प्रतिदिन दो घंटे की कक्षाएं लेकर युवा अपना कौशल विकास कर सकते हैं। इसमें कालीन बुनाई, धुलाई, स्ट्रेचिंग से लेकर पैकिंग तक की जानकारी दी जाएगी।