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Bhadohi News: भीख के रुपयों से भरते हैं कुष्ट रोगियों के घाव
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कुष्ठ बस्ती में बदहाल दशा में गुजर रही जिंदगी। संवाद
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विकास मिश्रा ज्ञानपुर। सरकार की तमाम कवायदों के बाद भी जनपद में कुष्ठ रोगियों की स्थिति दयनीय होती जा रही है। हर महीने दिव्यांग रोगियों को भरण पोषण के लिए 3000 हजार रुपये मिलते हैं। शेष को जीविकोपार्जन और मरहम पट्टी के लिए भीख मांगनी पड़ती है। वे भीख के रुपयों से घाव की पट्टी करवाते हैं। साल 2021 से 31 दिसंबर 2025 तक 383 कुष्ठ रोगी जनपद में मिले। इसमें से 199 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में दिव्यांग कुष्ठ रोगियों की संख्या 166 है। अमर उजाला की टीम सोमवार को भदोही ब्लाॅक के पिपरिस स्थित नई कुष्ठ बस्ती पहुंची। यहां कुष्ठ परिवार के 40 रोगी हैं। सुविधाएं नगण्य हैं। आवास की टूटी पटिया, खराब हैंड़पंप, शो-पीस बनी सोलर लाइट बस्ती और परिसर में फैली गंदगी विकास की कहानी कह रहे हैं। गंदगी से उठते दुर्गंध के बीच सेकंड भर भी यहां कोई ठहर नहीं सकता है। बस्ती में परिवार के 40 सदस्यों में से पांच लोग बिजली मंडल, कुष्ण प्रसाद, अर्जून, राजाराम, गफ्फार अली बीमारी से पीड़ित हैं। इसमें तीन दिव्यांग हैं, जिन्हें हर महीने तीन हजार रुपये पेंशन मिलती है। मरीजों की पीड़ा असहनीय है। स्वास्थ्य विभाग की टीम साल में दो बार 30 जनवरी और दो अक्तूबर को बस्ती में कैंप लगाकर दवा देती है। स्वास्थ्यकर्मी छांकने तक नहीं आते हैं। मरीज भीख के पैसे से पट्टी खरीदकर घाव पर लगाते हैं।
बदहाल व्यवस्थाएं, अधिकारी अनजान
कुष्ठ बस्ती में साल 1999 वे इंदिरा आवास का निर्माण हुआ था। 26 साल पहले बने आवास की मरम्मत नहीं हुई है। परिसर में चार हैंडपंप लगे हैं। इसमें दो खराब हैं। इन दो में से एक से दूषित पानी (बालू युक्त पानी) निकलता है। एक ही हैंडपंप से लोगों की प्यास बुझती है। सामुदायिक भवन में ताला लगा है। यह भवन अधिकारी के आगमन, शादी समारोह में खुलता है। सूर्यास्त होने के बाद बस्ती में अंधेरा हो जाता है।
बीमारी के कारण छोड़ दिया गांव
बिजली मंडल (60) निवासी बिहार 50 साल पहले और कृष्ण प्रसाद (50) निवासी झारखंड 40 साल पहले अपना मूल गांव छोड़ दिए हैं। अब ये मूलत: भदोही जिले के निवासी हैं। बातचीत के दौरान बताया कि पहले कभी कभार गांव जाते थे। हाथ छूपाकर रखते थे, गांव में लोग हे दृष्टि से देखते थे। इसके बाद गांव जाना छोड़ दिए। यहां भी काम की चाह थी, लेकिन कहीं मिला नहीं, अब भीख मांग कर गुजारा कर रहे हैं। पिंटू पासवान, रविदास ने बताया कि हम लोग 20 साल से यहां है। बताया कि बीमारी के कारण पिता की मौत हो चुकी है।
5 साल के आंकड़ों पर एक नजर
साल नए रोगी कितने हुए स्वस्थ
2021-22 76 76
2022-23 96 83
2023-24 70 88
2024-25 88 70
2025-26 56 55
रोगियों की पीड़ा
दोनों पैर से दिव्यांग हूं। 35 किलो राशन, 3000 हजार रुपये पेंशन मिलती है। गुजारा करने के लिए भीख मांगनी पड़ती है। बस्ती में गंदगी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम कभी कभार आती है। - बिजली मंडल निवासी कुष्ठ बस्ती।
बस्ती में गंदगी है, खुद के पैसे मरहम पट्टी करवाना पड़ता है। कभी स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आती है। योजना का लाभ नहीं मिलता है। जंघई, प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर भीख मांग कर जीवन यापन करते हैं। - कृष्ण प्रसाद, निवासी कुष्ठ बस्ती।
जिले में कुष्ठ रोगियों को समय-समय पर चप्पल, दवा, मलहम दिए जाते हैं। विभागीय टीम निरंतर माॅनिटरिंग करती है। कुष्ठ बस्ती में स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी लगी है। हर 15 दिन में एक बार जाते हैं। - डॉ. एसके चक, सीएमओ, भदोही।
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बदहाल व्यवस्थाएं, अधिकारी अनजान
कुष्ठ बस्ती में साल 1999 वे इंदिरा आवास का निर्माण हुआ था। 26 साल पहले बने आवास की मरम्मत नहीं हुई है। परिसर में चार हैंडपंप लगे हैं। इसमें दो खराब हैं। इन दो में से एक से दूषित पानी (बालू युक्त पानी) निकलता है। एक ही हैंडपंप से लोगों की प्यास बुझती है। सामुदायिक भवन में ताला लगा है। यह भवन अधिकारी के आगमन, शादी समारोह में खुलता है। सूर्यास्त होने के बाद बस्ती में अंधेरा हो जाता है।
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बीमारी के कारण छोड़ दिया गांव
बिजली मंडल (60) निवासी बिहार 50 साल पहले और कृष्ण प्रसाद (50) निवासी झारखंड 40 साल पहले अपना मूल गांव छोड़ दिए हैं। अब ये मूलत: भदोही जिले के निवासी हैं। बातचीत के दौरान बताया कि पहले कभी कभार गांव जाते थे। हाथ छूपाकर रखते थे, गांव में लोग हे दृष्टि से देखते थे। इसके बाद गांव जाना छोड़ दिए। यहां भी काम की चाह थी, लेकिन कहीं मिला नहीं, अब भीख मांग कर गुजारा कर रहे हैं। पिंटू पासवान, रविदास ने बताया कि हम लोग 20 साल से यहां है। बताया कि बीमारी के कारण पिता की मौत हो चुकी है।
5 साल के आंकड़ों पर एक नजर
साल नए रोगी कितने हुए स्वस्थ
2021-22 76 76
2022-23 96 83
2023-24 70 88
2024-25 88 70
2025-26 56 55
रोगियों की पीड़ा
दोनों पैर से दिव्यांग हूं। 35 किलो राशन, 3000 हजार रुपये पेंशन मिलती है। गुजारा करने के लिए भीख मांगनी पड़ती है। बस्ती में गंदगी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम कभी कभार आती है। - बिजली मंडल निवासी कुष्ठ बस्ती।
बस्ती में गंदगी है, खुद के पैसे मरहम पट्टी करवाना पड़ता है। कभी स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आती है। योजना का लाभ नहीं मिलता है। जंघई, प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर भीख मांग कर जीवन यापन करते हैं। - कृष्ण प्रसाद, निवासी कुष्ठ बस्ती।
जिले में कुष्ठ रोगियों को समय-समय पर चप्पल, दवा, मलहम दिए जाते हैं। विभागीय टीम निरंतर माॅनिटरिंग करती है। कुष्ठ बस्ती में स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी लगी है। हर 15 दिन में एक बार जाते हैं। - डॉ. एसके चक, सीएमओ, भदोही।