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Bhadohi News: होली पर घर पहुंचने के लिए मारामारी, गेट और शौचालय के गलियारों में खड़े होकर पूरी की यात्रा
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ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर ट्रेन के शौचालय में यात्रा करते लोग। संवाद
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गोपीगंज। रंगों के त्योहार होली पर ट्रेन से घर पहुंचने के लिए मारामारी करनी पड़ रही है। किसी भी ट्रेन में किसी भी क्लास में सीट खाली नहीं है। सबसे ज्यादा भीड़ बिहार जाने वाली ट्रेनों में देखने को मिल रही है। कोच के गेट और शौचालयों के गलियारों में खड़े होकर यात्रियों ने यात्रा पूरी की। रंगों का त्योहार होली घर-परिवार के साथ मनाने के लिए महानगरों में रहने वाले लोग घर लौट रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, अमृतसर, गुजरात आदि महानगरों से बड़ी संख्या में कामगार घर लौट रहे हैं। भीड़ इतनी ज्यादा है कि एक सीट पर पांच लोग यात्रा कर रहे हैं। यात्रियों को सबसे ज्यादा मुश्किल तो तब हो रही है, जब तमाम दुश्वारियों के बीच शिकायत करने वालों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। मंगलवार की दोपहर एक बजकर 10 मिनट पर पवन एक्सप्रेस के पहुंचते ही यात्रियों के चढ़ने और उतरने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। ट्रेन में इतनी भीड़ थी कि कई यात्री ट्रेन पर नहीं चढ़ पाए।
बोले यात्री
मुंबई से घर लौट रहा हूं। होली पर घर पहुंचने की मजबूरी है। तीन दिन से कोशिश कर रहे थे, आज किसी तरह ट्रेन मिली, लेकिन हालत यह है कि शौचालय में खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। - मोतीलाल चौधरी, बिहार।
गुजरात से घर जाने के लिए निकला हूं, एक सप्ताह से स्टेशन जाकर लौट जा रहा था। आधे रास्ते खड़े होकर आया हूं। किसी तरह जगह मिली। स्थिति बहुत खराब है। - महेन्द्र, बिहार।
मुंबई से आ रहा हूं, गाजीपुर जाना है। ट्रेन का सफर इस समय बहुत मुश्किल भरा है। टिकट तो मिल गया, लेकिन सीट नहीं मिल सकी। किसी तरह इधर-उधर करते हुए आया हूं। - नगीना सिंह, गाजीपुर।
बिहार जा रहा हूं। मुंबई से चला था तो सीट मिली ही नहीं, कुछ दूरी बाद नहीं रहा गया तो बैग पर ही बैठ गया। बोगी के अंदर भी नहीं घूस पाया। - जोहार यादव, बिहार।
ट्रेनों में इस समय खूब भीड़ है। इसलिए सतर्कता भी बरती जा रही है। बोगियों की चेकिंग किया जा रहा है। वहीं यात्रियों को सुरक्षित सफर के लिए प्रेरित किया जा रहा है। - आनंद यादव, जीआरपी, चौकी प्रभारी।
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बोले यात्री
मुंबई से घर लौट रहा हूं। होली पर घर पहुंचने की मजबूरी है। तीन दिन से कोशिश कर रहे थे, आज किसी तरह ट्रेन मिली, लेकिन हालत यह है कि शौचालय में खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। - मोतीलाल चौधरी, बिहार।
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गुजरात से घर जाने के लिए निकला हूं, एक सप्ताह से स्टेशन जाकर लौट जा रहा था। आधे रास्ते खड़े होकर आया हूं। किसी तरह जगह मिली। स्थिति बहुत खराब है। - महेन्द्र, बिहार।
मुंबई से आ रहा हूं, गाजीपुर जाना है। ट्रेन का सफर इस समय बहुत मुश्किल भरा है। टिकट तो मिल गया, लेकिन सीट नहीं मिल सकी। किसी तरह इधर-उधर करते हुए आया हूं। - नगीना सिंह, गाजीपुर।
बिहार जा रहा हूं। मुंबई से चला था तो सीट मिली ही नहीं, कुछ दूरी बाद नहीं रहा गया तो बैग पर ही बैठ गया। बोगी के अंदर भी नहीं घूस पाया। - जोहार यादव, बिहार।
ट्रेनों में इस समय खूब भीड़ है। इसलिए सतर्कता भी बरती जा रही है। बोगियों की चेकिंग किया जा रहा है। वहीं यात्रियों को सुरक्षित सफर के लिए प्रेरित किया जा रहा है। - आनंद यादव, जीआरपी, चौकी प्रभारी।
