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Bijnor News: मेडिकल काॅलेज में रूसी इलिजारोव तकनीक से हुआ जटिल फ्रैक्चर का उपचार
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बिजनौर। मेडिकल कॉलेज के हड्डी विभाग की टीम ने नई तकनीकी से फ्रैक्चर से उपचार किया। 64 वर्षीय बजुर्ग महिला के पैर की हड्डी फ्रैक्चर हो गया था। चिकित्सकों की टीम ने बिना ऑपरेशन रूसी इलिजारोव तकनीक से जटिल फ्रैक्चर का उपचार किया।
चांदपुर निवासी 64 वर्षीय सुदेशी के बाएं पैर एवं टखने में गंभीर चोट लग गई थी। जांच के पता चला कि बुजुर्ग के पैर में गंभीर कम्यूनिटेड फ्रैक्चर है। फ्रैक्चर लाइन टखने के जोड़ तक पहुंच गई थी। डायबिटीज होने की वजह से महिला का चीरा लगाकर ऑपरेशन करना आसान नहीं था क्योंकि, शुगर के मरीज का घाव जल्दी नहीं भरता है और संक्रमण का खतरा रहता है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि शुगर की वजह से बुजुर्ग महिला का 13 जून को रूसी इलिजारोव तकनीक द्वारा ऑपरेशन किया गया। इसमें फ्रैक्चर स्थल पर चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। महिला का ऑपरेशन सफल हुआ और उन्होंने अगले दिन से ही सहारे के साथ चलना शुरू कर दिया। उपचार टीम में डॉ. गौरव सिंह, डॉ. शितांशु सिंह, डॉ. अतुल यादव, डॉ. नितिन त्यागी, जिम्मेदारी डॉ. बृजेन, डॉ. राहुल शामिल रहे।
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ऐसा होता है रूसी इलिजारोव तकनीक से उपचार
डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि इलिजारोव तकनीक रूस में विकसित एक विशेष ऑर्थोपेडिक तकनीक है। इस तकनीक से पहले सीएआरएम मशीन में देखकर हड्डी को बिना ऑपरेशन सही से अपनी जगह बैठाया जाता है। इसके बाद बाहर से इलिजारोव तकनीकयुक्त शिंकजा कसते हैं। उन्होंने इस तकनीक का उन्नत प्रशिक्षण कुर्गान, रूस में प्राप्त किया है।
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निजी अस्पतालों में एक लाख रुपये में होता इस तकनीक से इलाज
डॉ. नितिन त्यागी ने बताया कि निजी अस्पतालों में रूसी इलिजारोव तकनीक से फ्रैक्चर के उपचार में करीब एक लाख रुपये तक का खर्च आता है लेकिन मेडिकल कॉलेज में बहुत कम खर्च में मरीज का इस तकनीक से उपचार किया गया।
अब मरीजों को रूसी इलिजारोव तकनीक से उपचार के लिए बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं है। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इसका लाभ मिलने लगा है। .....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
चांदपुर निवासी 64 वर्षीय सुदेशी के बाएं पैर एवं टखने में गंभीर चोट लग गई थी। जांच के पता चला कि बुजुर्ग के पैर में गंभीर कम्यूनिटेड फ्रैक्चर है। फ्रैक्चर लाइन टखने के जोड़ तक पहुंच गई थी। डायबिटीज होने की वजह से महिला का चीरा लगाकर ऑपरेशन करना आसान नहीं था क्योंकि, शुगर के मरीज का घाव जल्दी नहीं भरता है और संक्रमण का खतरा रहता है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि शुगर की वजह से बुजुर्ग महिला का 13 जून को रूसी इलिजारोव तकनीक द्वारा ऑपरेशन किया गया। इसमें फ्रैक्चर स्थल पर चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। महिला का ऑपरेशन सफल हुआ और उन्होंने अगले दिन से ही सहारे के साथ चलना शुरू कर दिया। उपचार टीम में डॉ. गौरव सिंह, डॉ. शितांशु सिंह, डॉ. अतुल यादव, डॉ. नितिन त्यागी, जिम्मेदारी डॉ. बृजेन, डॉ. राहुल शामिल रहे।
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ऐसा होता है रूसी इलिजारोव तकनीक से उपचार
डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि इलिजारोव तकनीक रूस में विकसित एक विशेष ऑर्थोपेडिक तकनीक है। इस तकनीक से पहले सीएआरएम मशीन में देखकर हड्डी को बिना ऑपरेशन सही से अपनी जगह बैठाया जाता है। इसके बाद बाहर से इलिजारोव तकनीकयुक्त शिंकजा कसते हैं। उन्होंने इस तकनीक का उन्नत प्रशिक्षण कुर्गान, रूस में प्राप्त किया है।
निजी अस्पतालों में एक लाख रुपये में होता इस तकनीक से इलाज
डॉ. नितिन त्यागी ने बताया कि निजी अस्पतालों में रूसी इलिजारोव तकनीक से फ्रैक्चर के उपचार में करीब एक लाख रुपये तक का खर्च आता है लेकिन मेडिकल कॉलेज में बहुत कम खर्च में मरीज का इस तकनीक से उपचार किया गया।
अब मरीजों को रूसी इलिजारोव तकनीक से उपचार के लिए बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं है। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इसका लाभ मिलने लगा है। .....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर