UP: अमेरिका-ईरान तनाव का असर, सड़क निर्माण की रफ्तार थमी, छह माह पीछे खिसकी 20 परियोजनाएं
अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब बिजनौर के विकास कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है। तारकोल की कीमत बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने से 20 से अधिक सड़क परियोजनाएं छह माह तक पीछे खिसक गई हैं।
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब बिजनौर की सड़क परियोजनाओं पर भी दिखाई देने लगा है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तारकोल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और आपूर्ति में आई बाधा के चलते उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की 20 से अधिक सड़क परियोजनाओं की रफ्तार थम गई है। हालात ऐसे हैं कि कई परियोजनाओं की समय सीमा छह माह तक बढ़ानी पड़ी है।
तारकोल महंगा हुआ, ठप पड़ने लगे निर्माण कार्य
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार सड़क निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल तारकोल पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। इसके साथ ही इसकी उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। निर्माण एजेंसियां मांग के अनुरूप सामग्री नहीं जुटा पा रही हैं, जिससे कई परियोजनाओं का काम धीमा पड़ गया है।
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20 से ज्यादा सड़क परियोजनाएं प्रभावित
जिले में चल रही सड़क निर्माण और चौड़ीकरण परियोजनाओं पर इसका सीधा असर पड़ा है। कई स्थानों पर मशीनें खड़ी हैं और निर्माण गतिविधियां सीमित हो गई हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ानी पड़ी है।
छह हॉट मिक्स प्लांट भी पड़े बंद
सड़क निर्माण से जुड़े सूत्रों के अनुसार जिले में संचालित छह हॉट मिक्स प्लांट भी प्रभावित हुए हैं। तारकोल की उपलब्धता कम होने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिसका असर सड़क निर्माण की गति पर साफ दिखाई दे रहा है।
मेरठ-पौड़ी हाईवे का काम भी हुआ प्रभावित
मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बहसूमा से बिजनौर तक बन रही फोरलेन सड़क परियोजना भी इस संकट से अछूती नहीं रही। तारकोल की कमी के कारण निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
69 प्रतिशत काम पूरा, लेकिन बढ़ गई देरी
राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के उपखंड अधिकारी आशीष शर्मा ने बताया कि परियोजना का लगभग 69 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यदि समय पर सामग्री उपलब्ध होती तो अब तक करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो जाता। सामग्री संकट के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का स्थानीय परियोजनाओं पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि तारकोल पेट्रोलियम आधारित उत्पाद है। कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर इसकी उपलब्धता और लागत पर पड़ता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर अब स्थानीय विकास परियोजनाओं तक पहुंच गया है।