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Bijnor News: बदहाली पर आंसू बहा रहा रसूलपुर नंगला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
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बास्टा क्षेत्र के गांव रसूलपुर नंगला में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन के पास झाड़ झूंड
- फोटो : गैगेंस्टर आरोपियों की कुर्की करते पुलिस प्रशासन के अधिकारी
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बास्टा। रसूलपुर नंगला में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अस्पताल परिसर में झाड़ियां खड़ी हुईं हैं और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। 22 साल पहले करोड़ों की लागत से स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ था, लेकिन आज तक किसी डाॅक्टर की तैनाती नहीं हुई है। इससे आसपास के गांव रसूलपुर नंगला, दरबड़, ठेठ, बसंतपुर, सानीपुरा, मानपुर, शादीपुर, सैदपुर, सब्दलपुरपुर मिलक के लोगों को उपचार कराने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कभी-कभी फार्मासिस्ट आ जाता था, लेकिन काफी समय से कोई भी स्वास्थ्य कर्मी अस्पताल नहीं आ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल परिसर में एक बड़ा गड्ढा बनाया गया है। अस्पताल में न कोई चौकीदार और न लाइट की सुविधा है। अस्पताल के मेन गेट तोड़कर गायब हो गया है। स्वास्थ्य केंद्र में नल व पेयजल की कोई भी व्यवस्था नहीं है। कमरों के गेट, ग्रिल, विंडो, लाइट आदि सामान गायब दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि अस्पताल परिसर में साफ सफाई की जाए और जल्द से जल्द डॉक्टर की नियुक्ति की जाए।
गांव निवासी नरेंद्र सिंह का कहना है कि अस्पताल परिसर में झाड़ियां खड़ी हैं। दो साल पहले शिकायत करके मांग की थी, अस्पताल में कोई भी डॉक्टर नहीं आता है। मरीज को इलाज कराने बाहर जाना पड़ता है। क्षेत्र में कई दर्जन गांवों के लोग रहते हैं, अस्पताल में डॉक्टर तैनात किया जाए। लोगों को दवाई लेने चांदपुर जाना पड़ता है।
गांव निवासी पुष्पा देवी का कहना है कि इस अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं आता। महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर चांदपुर जाना पड़ता है। किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है, ना ही जांच होती है, कोई नर्स भी नहीं आती है। महिलाओं को जब कोई परेशानी होती है तो चांदपुर जाना पड़ता है।
गांव निवासी पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि अस्पताल में किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य सेवा नहीं है। अस्पताल की बिल्डिंग टूटी-फूटी है। बिजली का ट्रांसफार्मर भी गायब हो गया है। दीवारें भी टूटी पड़ी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल परिसर में एक बड़ा गड्ढा बनाया गया है। अस्पताल में न कोई चौकीदार और न लाइट की सुविधा है। अस्पताल के मेन गेट तोड़कर गायब हो गया है। स्वास्थ्य केंद्र में नल व पेयजल की कोई भी व्यवस्था नहीं है। कमरों के गेट, ग्रिल, विंडो, लाइट आदि सामान गायब दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि अस्पताल परिसर में साफ सफाई की जाए और जल्द से जल्द डॉक्टर की नियुक्ति की जाए।
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गांव निवासी नरेंद्र सिंह का कहना है कि अस्पताल परिसर में झाड़ियां खड़ी हैं। दो साल पहले शिकायत करके मांग की थी, अस्पताल में कोई भी डॉक्टर नहीं आता है। मरीज को इलाज कराने बाहर जाना पड़ता है। क्षेत्र में कई दर्जन गांवों के लोग रहते हैं, अस्पताल में डॉक्टर तैनात किया जाए। लोगों को दवाई लेने चांदपुर जाना पड़ता है।
गांव निवासी पुष्पा देवी का कहना है कि इस अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं आता। महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर चांदपुर जाना पड़ता है। किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है, ना ही जांच होती है, कोई नर्स भी नहीं आती है। महिलाओं को जब कोई परेशानी होती है तो चांदपुर जाना पड़ता है।
गांव निवासी पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि अस्पताल में किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य सेवा नहीं है। अस्पताल की बिल्डिंग टूटी-फूटी है। बिजली का ट्रांसफार्मर भी गायब हो गया है। दीवारें भी टूटी पड़ी है।