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Bijnor News: 200 से ज्यादा गांवों से निकलेगा शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश के विकास की धुरी बनने वाले शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए एलाइनमेंट से संबंधित तीसरी सूची जारी कर दी गई है।
इस सूची में गांवों की गाटा संख्या (खसरा संख्या) के साथ विस्तृत जानकारी शामिल है, जिसे अब भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकारी (एसएलओ) को भेजा गया है। अब तक की सभी सूची को मिलाकर ऐसे गांवों की संख्या 200 से ज्यादा होने की उम्मीद है, जहां से एक्सप्रेसवे होकर निकलेगा।
एनएचएआई की रुड़की, नजीबाबाद और मुरादाबाद डिवीजनों के अंतर्गत आने वाले गांवों की सूची गाटा संख्या के साथ एसएलओ विभाग को भेजी गई है। इन सूचियों के जारी होने बाद प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को यह स्पष्ट हो गया है कि एक्सप्रेसवे उनके क्षेत्रों से कैसे गुजरेगा और उनकी कितनी भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
नई जारी की गई सूची की सबसे खास बात यह है कि इसमें प्रत्येक प्रभावित भूमि के लिए गाटा संख्या (खसरा संख्या) का उल्लेख है। यह जानकारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाएगी। गाटा संख्या के बिना, भूमि के स्वामित्व और क्षेत्रफल का सटीक निर्धारण करना मुश्किल होता है। अब, संबंधित अधिकारियों के पास प्रत्येक भूखंड के बारे में विस्तृत डेटा उपलब्ध होगा, जिससे मुआवजे के निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया सुगम हो सकेगी।
बिजनौर जिले के लिए महत्वपूर्ण है एक्सप्रेसवे : शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। बिजनौर जिला इस एक्सप्रेसवे के मार्ग में स्थित होने के कारण सीधे तौर पर लाभान्वित होगा।क
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इस सूची में गांवों की गाटा संख्या (खसरा संख्या) के साथ विस्तृत जानकारी शामिल है, जिसे अब भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकारी (एसएलओ) को भेजा गया है। अब तक की सभी सूची को मिलाकर ऐसे गांवों की संख्या 200 से ज्यादा होने की उम्मीद है, जहां से एक्सप्रेसवे होकर निकलेगा।
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एनएचएआई की रुड़की, नजीबाबाद और मुरादाबाद डिवीजनों के अंतर्गत आने वाले गांवों की सूची गाटा संख्या के साथ एसएलओ विभाग को भेजी गई है। इन सूचियों के जारी होने बाद प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को यह स्पष्ट हो गया है कि एक्सप्रेसवे उनके क्षेत्रों से कैसे गुजरेगा और उनकी कितनी भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
नई जारी की गई सूची की सबसे खास बात यह है कि इसमें प्रत्येक प्रभावित भूमि के लिए गाटा संख्या (खसरा संख्या) का उल्लेख है। यह जानकारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाएगी। गाटा संख्या के बिना, भूमि के स्वामित्व और क्षेत्रफल का सटीक निर्धारण करना मुश्किल होता है। अब, संबंधित अधिकारियों के पास प्रत्येक भूखंड के बारे में विस्तृत डेटा उपलब्ध होगा, जिससे मुआवजे के निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया सुगम हो सकेगी।
बिजनौर जिले के लिए महत्वपूर्ण है एक्सप्रेसवे : शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। बिजनौर जिला इस एक्सप्रेसवे के मार्ग में स्थित होने के कारण सीधे तौर पर लाभान्वित होगा।क