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Bijnor News: पहाड़ों पर हो रही बारिश से सताने लगा बाढ़ का खतरा
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हरेवली। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश से रामगंगा बैराज का तालाब क्षेत्र पानी से लबालब हो गया है लेकिन अभी तक सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बैराज गेटों को नहीं उठाया है। हर साल 15 जून को सभी गेट उठा दिए जाते थे। ऐसा न होने से ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। ग्रामीणों ने जल्द बैराज के गेट उठाने की मांग की है।
क्षेत्र के ग्रामीण चंद्रपाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, महेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, मुनेश कुमार, मनोज कुमार, जयपाल सिंह, डालचंद आदि का कहना है कि सन् 1970 में हरेवली में रामगंगा बैराज का निर्माण हुआ था। इसमें 20 गेट रामगंगा नदी के व पांच गेट पोषक नहर के बनाए गए थे। बैराज में नवंबर माह तक पानी को संचय किया जाता है। 15 जून तक निकासी प्रस्तावित है, लेकिन गेटों को निर्धारित समय पर नहीं उठाया जा रहा। इसके चलते 2010 में बाढ़ से क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। सैकड़ों मवेशी बह गए थे और बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए थे। खेतों में 10 से 15 फीट तक बालू जमा हो गया था। इस बार भी विभाग ने अभी तक सात जुलाई तक भी राम गंगा के गेटों को नहीं उठाया है। पहाड़ों में हो रही लगातार वर्षा के कारण बांध का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि शीघ्र की गेटों को नहीं उठाया गया तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
सिंचाई विभाग मुरादाबाद के अधिशासी अभियंता आरपी सिंह का कहना है कि छह जुलाई तक पोषक नहर में पानी की मांग होने से रामगंगा बैराज के गेटों को नहीं उठाया जा सका था। सात जुलाई को मांग बंद हो गई। अब जल्द ही रामगंगा बैराज के सभी गेटों को उठवा दिया जाएगा।
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क्षेत्र के ग्रामीण चंद्रपाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, महेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, मुनेश कुमार, मनोज कुमार, जयपाल सिंह, डालचंद आदि का कहना है कि सन् 1970 में हरेवली में रामगंगा बैराज का निर्माण हुआ था। इसमें 20 गेट रामगंगा नदी के व पांच गेट पोषक नहर के बनाए गए थे। बैराज में नवंबर माह तक पानी को संचय किया जाता है। 15 जून तक निकासी प्रस्तावित है, लेकिन गेटों को निर्धारित समय पर नहीं उठाया जा रहा। इसके चलते 2010 में बाढ़ से क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। सैकड़ों मवेशी बह गए थे और बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए थे। खेतों में 10 से 15 फीट तक बालू जमा हो गया था। इस बार भी विभाग ने अभी तक सात जुलाई तक भी राम गंगा के गेटों को नहीं उठाया है। पहाड़ों में हो रही लगातार वर्षा के कारण बांध का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि शीघ्र की गेटों को नहीं उठाया गया तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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सिंचाई विभाग मुरादाबाद के अधिशासी अभियंता आरपी सिंह का कहना है कि छह जुलाई तक पोषक नहर में पानी की मांग होने से रामगंगा बैराज के गेटों को नहीं उठाया जा सका था। सात जुलाई को मांग बंद हो गई। अब जल्द ही रामगंगा बैराज के सभी गेटों को उठवा दिया जाएगा।
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