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Bijnor News: 74 छात्राओं के लिए दो शिक्षिकाएं, कैसे होगी पढ़ाई
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गजरौला अचपल। ग्रामीण अंचल की बेटियों को अच्छी शिक्षा के लिए गजरौला अचपल में दो साल पहले राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण किया गया। पिछले साल कॉलेज का शैक्षिक सत्र शुरू हो गया था। चार करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का भवन तो तैयार कर दिया गया, लेकिन स्टाफ की कमी है।
कॉलेज में कक्षा नौ से 11 तक 74 छात्राएं पंजीकृत हैं, जबकि नियमित शिक्षण का जिम्मा केवल दो शिक्षिकाओं पर है। प्रभारी प्रधानाचार्या बीमारी के कारण अवकाश पर हैं।
वर्ष 2024 में कॉलेज भवन का निर्माण पूरा होने के बाद पिछले शैक्षिक सत्र से यहां पढ़ाई शुरू हुई। विद्यालय में फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन विषयवार शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी है। शिक्षिका हीरा चौधरी अंग्रेजी और गृह विज्ञान पढ़ाती हैं, जबकि वर्तिका हिंदी, सामाजिक विज्ञान और कला विषय की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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कक्षा नौ में हिंदी, गणित, इतिहास, भूगोल, अंग्रेजी, गृह विज्ञान, विज्ञान और कला जैसे विषय संचालित हैं, जबकि कक्षा 10 में विज्ञान, अंग्रेजी, गणित, गृह विज्ञान, कला, भूगोल, इतिहास, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई होनी है। ऐसे में गणित, विज्ञान, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र समेत कई विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
स्टाफ की कमी के कारण दोनों शिक्षिकाओं को एक कक्षा का पीरियड समाप्त होते ही दूसरी कक्षा में जाना पड़ता है। इससे छात्राओं की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने भवन निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन पर्याप्त शिक्षिकाओं की तैनाती नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विद्यालय में एक चौकीदार और तीन चपरासी कार्यरत हैं। वहीं स्कूल चलो अभियान के तहत लगातार नई छात्राओं के प्रवेश भी किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में शिक्षण व्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।
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कॉलेज में कक्षा नौ से 11 तक 74 छात्राएं पंजीकृत हैं, जबकि नियमित शिक्षण का जिम्मा केवल दो शिक्षिकाओं पर है। प्रभारी प्रधानाचार्या बीमारी के कारण अवकाश पर हैं।
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वर्ष 2024 में कॉलेज भवन का निर्माण पूरा होने के बाद पिछले शैक्षिक सत्र से यहां पढ़ाई शुरू हुई। विद्यालय में फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन विषयवार शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी है। शिक्षिका हीरा चौधरी अंग्रेजी और गृह विज्ञान पढ़ाती हैं, जबकि वर्तिका हिंदी, सामाजिक विज्ञान और कला विषय की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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कक्षा नौ में हिंदी, गणित, इतिहास, भूगोल, अंग्रेजी, गृह विज्ञान, विज्ञान और कला जैसे विषय संचालित हैं, जबकि कक्षा 10 में विज्ञान, अंग्रेजी, गणित, गृह विज्ञान, कला, भूगोल, इतिहास, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई होनी है। ऐसे में गणित, विज्ञान, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र समेत कई विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
स्टाफ की कमी के कारण दोनों शिक्षिकाओं को एक कक्षा का पीरियड समाप्त होते ही दूसरी कक्षा में जाना पड़ता है। इससे छात्राओं की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने भवन निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन पर्याप्त शिक्षिकाओं की तैनाती नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विद्यालय में एक चौकीदार और तीन चपरासी कार्यरत हैं। वहीं स्कूल चलो अभियान के तहत लगातार नई छात्राओं के प्रवेश भी किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में शिक्षण व्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।