UP: एंबुलेंस में इधर ऑक्सीजन खत्म, उधर हादसे में घायल की जिंदगी; गुस्साए परिजनों ने वाहन में की तोड़फोड़
निजी एंबुलेंस की लापरवाही से घायल कुलदीप सिंह की मौत हो गई। एंबुलेंस में ऑक्सीजन और डीजल खत्म होने से इलाज में देरी हुई। रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
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निजी एंबुलेंस चालक की मनमानी और मुसीबत में घिरे परिवार से सौदेबाजी एक युवक की जिंदगी पर भारी पड़ गई। बुधवार देर रात जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर हादसे के घायल को जल्द अच्छे हेल्थ सेंटर पर पहुंचाने के लिए परिजनों ने सामने नजर आई ऑक्सीजन सपोर्ट वाली निजी एंबुलेंस का सहारा लिया। मुरादाबाद जाते समय पहले सिलिंडर की ऑक्सीजन खत्म हुई और कुछ देर बाद डीजल। इस लापरवाही से हुई इलाज में देरी के कारण घायल की सांसें थम गईं।
सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करने वाली इस घटना का शिकार हुए गांव अहमदनगर जिबाई निवासी 40 वर्षीय कुलदीप सिंह। परिजनों ने बताया कि बुधवार की देर रात बाइक से घर आते समय ट्रैक्टर की चपेट में आकर कुलदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे परिजन उन्हें जिला अस्पताल लाए। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन जल्द अच्छा इलाज दिलाने के लिए कुलदीप को निजी एंबुलेंस से मुरादाबाद ले जा रहे थे।
परिजनों का कहना है कि मुरादाबाद के सफर पर थोड़ा आगे बढ़ते ही कुलदीप को सिलिंडर से ऑक्सीजन मिलना बंद हो गई। हालत बिगड़ने से पहले अस्पताल पहुंच जाने की कोशिश में चालक से एंबुलेंस तेज चलाने के लिए कहा तो कुछ दूरी के बाद उसने डीजल खत्म बताकर एंबुलेंस रोक दी। उसकी मांग पर परिजनों ने डीजल के लिए बिना झिझके पैसे दे दिए लेकिन इस बीच इलाज की देरी भारी पड़ गई। घायल कुलदीप अच्छे हेल्थ सेंटर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ गए। थाना प्रभारी कुलदीप राणा ने बताया कि इस मामले में परिजनों की ओर से अभी तक तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलते ही रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
निजी एंबुलेंसों की जांच के आदेश
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिले में निजी एंबुलेंस सेवाओं पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से जनपद में दौड़ रहीं सभी निजी एंबुलेंस की जांच के आदेश दिए हैं।
सिस्टम पर उठे सवाल
घायल को समय पर बेहतर इलाज दिलाने के बजाय निजी एंबुलेंस चालक की लापरवाही भारी पड़ गई। ऑक्सीजन और ईंधन जैसी मूलभूत सुविधाओं का खत्म होना व्यवस्था की बड़ी चूक है। घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और निजी एंबुलेंस संचालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब विभाग सख्ती की बात कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि पहले ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
मरीज को उपचार के लिए लेकर जाते समय ऑक्सीजन और ईंधन खत्म होना गंभीर लापरवाही है। जनपद में संचालित सभी निजी एंबुलेंसों की जांच कराई जाएगी। अवैध संचालन या कमी पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिले में कितनी निजी एंबुलेंस चल रही हैं, इसके लिए एआरटीओ को पत्र भेजकर एंबुलेंसाें की डिटेल मांगी गई है। -डॉ. दीपा सिंह, सीएमओ
