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Budaun News: सर्दी में कुत्ते आक्रामक, नहीं बना एबीसी सेंटर
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शहर में सड़कों पर तहलते कुत्तों। संवाद
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बदायूं। कड़ाके की ठंड ने न सिर्फ इंसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि कुत्ते भी आक्रामक हो गए हैं। वे गलियों, सड़कों और मोहल्लों में झुंड बनाकर घूम रहे हैं, जिससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ गया है। हालात यह हैं कि अभी एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर तक नहीं बनाया गया है। इसकी वजह से इनकी नसबंदी तक नहीं हो सकी है।
जिले के किसी भी निकाय में एवीसी सेंटर नहीं बनने से समस्या और गंभीर होती जा रही है। जिले में कुल सात नगर पालिका परिषद और 14 नगर पंचायतें हैं, लेकिन किसी भी निकाय में अब तक एबीसी सेंटर की स्थापना नहीं की गई है। इन निकायों में आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और अस्थायी आश्रय के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था न होने पर उनकी संख्या नियंत्रित नहीं हो पा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय कुत्तों के झुंड सड़कों और गलियों में सक्रिय हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई मोहल्लों में कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर लग रहे इंजेक्शन
जिला अस्पताल समेत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रोजाना 200 से 300 लोग कुत्ते के काटने के बाद इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। पिछले दो महीनों में करीब 15 हजार लोगों को एंटी रैबीज का टीका लगाया जा चुका है, जिससे दवाओं की खपत बढ़ गई और मरीजों की भीड़ दोनों बढ़ गई है।
शहर में नहीं मिली एबीसी सेंटर के लिए जगह
नगर पालिका परिषद के अनुसार, शहर में एबीसी सेंटर बनाने के लिए जगह नहीं मिल सकी है। इसको लेकर उप जिलाधिकारी सदर से पत्राचार किया गया है। पालिका के अधिकारियों का कहना है कि एबीसी सेंटर बनाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन बजट और भूमि उपलब्ध न होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
किसी भी निकाय में नहीं बना है एबीसी सेंटर
जिले में सात नगर पालिका और 14 नगर पंचायत हैं। इन निकायों में कुत्तों के लिए कुत्तों का टीकाकरण, नसबंदी और उनके लिए शेल्टर होम की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन आज तक किसी भी निकाय में यह नहीं बनाए गए हैं। इससे यह कुत्तों सड़कों पर झुंड में घूमते नजर आते हैं।
जिला मुख्यालय पर जमीन की तलाश की जा रही है, ताकि एबीसी सेंटर बनाया जा सकें। जमीन मिलने के बाद में डीपीआर तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अरुण कुमार, एडीएम प्रशासन, बदायूं
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जिले के किसी भी निकाय में एवीसी सेंटर नहीं बनने से समस्या और गंभीर होती जा रही है। जिले में कुल सात नगर पालिका परिषद और 14 नगर पंचायतें हैं, लेकिन किसी भी निकाय में अब तक एबीसी सेंटर की स्थापना नहीं की गई है। इन निकायों में आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और अस्थायी आश्रय के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था न होने पर उनकी संख्या नियंत्रित नहीं हो पा रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय कुत्तों के झुंड सड़कों और गलियों में सक्रिय हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई मोहल्लों में कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर लग रहे इंजेक्शन
जिला अस्पताल समेत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रोजाना 200 से 300 लोग कुत्ते के काटने के बाद इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। पिछले दो महीनों में करीब 15 हजार लोगों को एंटी रैबीज का टीका लगाया जा चुका है, जिससे दवाओं की खपत बढ़ गई और मरीजों की भीड़ दोनों बढ़ गई है।
शहर में नहीं मिली एबीसी सेंटर के लिए जगह
नगर पालिका परिषद के अनुसार, शहर में एबीसी सेंटर बनाने के लिए जगह नहीं मिल सकी है। इसको लेकर उप जिलाधिकारी सदर से पत्राचार किया गया है। पालिका के अधिकारियों का कहना है कि एबीसी सेंटर बनाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन बजट और भूमि उपलब्ध न होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
किसी भी निकाय में नहीं बना है एबीसी सेंटर
जिले में सात नगर पालिका और 14 नगर पंचायत हैं। इन निकायों में कुत्तों के लिए कुत्तों का टीकाकरण, नसबंदी और उनके लिए शेल्टर होम की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन आज तक किसी भी निकाय में यह नहीं बनाए गए हैं। इससे यह कुत्तों सड़कों पर झुंड में घूमते नजर आते हैं।
जिला मुख्यालय पर जमीन की तलाश की जा रही है, ताकि एबीसी सेंटर बनाया जा सकें। जमीन मिलने के बाद में डीपीआर तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अरुण कुमार, एडीएम प्रशासन, बदायूं