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Budaun News: मददगार रहे बोलेरो चालक और ऑपरेटर भेजे गए जेल
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बदायूं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बायोगैस प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या में मुख्य आरोपी के मददगारों पर शिकंजा कस गया है। फिलहाल, विवेचक इंस्पेक्टर वीरेंद्र तोमर को प्लांट की गाड़ी के चालक व गैस किट ऑपरेटर की घटना में संलिप्तता मिली है। इस पर दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।
एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन, इलेक्ट्रानिक्स सर्विलांस व ठोस साक्ष्यों के आधार पर प्रकाश में आया है कि मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के साथ घटना की आपराधिक साजिश रचने व मददगार के रूप में धर्मेंद्र यादव एवं मुनेंद्र विक्रम सिंह की भूमिका रही है। अब तक उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धर्मेंद्र यादव एवं मुनेंद्र विक्रम सिंह का नाम अभियुक्त के रूप में प्रकाश में आया है। प्रकाश में आए अभियुक्त धर्मेंद्र यादव एवं मुनेंद्र विक्रम सिंह को मूसाझाग पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ की तो दोनों ने घटना में संलिप्त रहना स्वीकार किया।
ऐसे की थी हत्यारोपी की मदद
दोनों अभियुक्तों ने पुलिस को बताया कि वह दोनों प्लांट में काम करते हैं। धर्मेंद्र यादव कंपनी की बोलेरो चलाता है। मुनेंद्र विक्रम सिंह गैस किट ऑपरेटर है। इनकी मुख्य अभियुक्त अजय प्रताप सिंह से पुरानी दोस्ती है। तीनों ने योजना बनाकर दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया है। बताया कि अजय का फैक्टरी में आवागमन प्रतिबंधित होने पर चालक धर्मेंद्र यादव ने घटना के दिन अपनी बोलेरो अजय को फैक्टरी में आने-जाने के लिए स्वेच्छा से दी। मुनेंद्र ने घटना के दिन फैक्टरी के मुख्य प्रवेश द्वार पर नियुक्त गार्ड को गाड़ी में फैक्टरी स्टाफ होने का हवाला देकर गेट खुलवाया, इससे अजय फैक्टरी में जाकर घटना करने में सफल हो गया।
घटना के समय मुनेंद्र ने प्लांट के गेट पर रहकर निगरानी की। अजय जब बोलेरो लेकर गेट पर आया तो दोबारा गार्ड से गेट खुलवाने में उसकी मदद की। तीनों के बीच घटना करने के बारे में पहले ही सहमति बन गई थी। घटना से ठीक इनके बीच मोबाइल पर आपस में बात हुई थी। दोस्ती एवं वर्चस्व बनाए रखने की खातिर दोनों घटना में साथ रहे।
मूसाझाग थाना प्रभारी ही करेंगे विवेचना
एसएसपी ने बताया कि दोहरे हत्याकांड के बाद वहां तैनात होने वाले इंस्पेक्टर वीरेंद्र तोमर ही इस प्रकरण की विवेचना करेंगे। हालांकि उनकी मदद व पर्यवेक्षण के लिए सीओ क्राइम रजनीश उपाध्याय को जिम्मेदारी दी गई है। दोनों से ही निष्पक्षता से विवेचना कर सच्चाई सामने लाने को कहा गया है।
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एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन, इलेक्ट्रानिक्स सर्विलांस व ठोस साक्ष्यों के आधार पर प्रकाश में आया है कि मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के साथ घटना की आपराधिक साजिश रचने व मददगार के रूप में धर्मेंद्र यादव एवं मुनेंद्र विक्रम सिंह की भूमिका रही है। अब तक उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धर्मेंद्र यादव एवं मुनेंद्र विक्रम सिंह का नाम अभियुक्त के रूप में प्रकाश में आया है। प्रकाश में आए अभियुक्त धर्मेंद्र यादव एवं मुनेंद्र विक्रम सिंह को मूसाझाग पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ की तो दोनों ने घटना में संलिप्त रहना स्वीकार किया।
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ऐसे की थी हत्यारोपी की मदद
दोनों अभियुक्तों ने पुलिस को बताया कि वह दोनों प्लांट में काम करते हैं। धर्मेंद्र यादव कंपनी की बोलेरो चलाता है। मुनेंद्र विक्रम सिंह गैस किट ऑपरेटर है। इनकी मुख्य अभियुक्त अजय प्रताप सिंह से पुरानी दोस्ती है। तीनों ने योजना बनाकर दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया है। बताया कि अजय का फैक्टरी में आवागमन प्रतिबंधित होने पर चालक धर्मेंद्र यादव ने घटना के दिन अपनी बोलेरो अजय को फैक्टरी में आने-जाने के लिए स्वेच्छा से दी। मुनेंद्र ने घटना के दिन फैक्टरी के मुख्य प्रवेश द्वार पर नियुक्त गार्ड को गाड़ी में फैक्टरी स्टाफ होने का हवाला देकर गेट खुलवाया, इससे अजय फैक्टरी में जाकर घटना करने में सफल हो गया।
घटना के समय मुनेंद्र ने प्लांट के गेट पर रहकर निगरानी की। अजय जब बोलेरो लेकर गेट पर आया तो दोबारा गार्ड से गेट खुलवाने में उसकी मदद की। तीनों के बीच घटना करने के बारे में पहले ही सहमति बन गई थी। घटना से ठीक इनके बीच मोबाइल पर आपस में बात हुई थी। दोस्ती एवं वर्चस्व बनाए रखने की खातिर दोनों घटना में साथ रहे।
मूसाझाग थाना प्रभारी ही करेंगे विवेचना
एसएसपी ने बताया कि दोहरे हत्याकांड के बाद वहां तैनात होने वाले इंस्पेक्टर वीरेंद्र तोमर ही इस प्रकरण की विवेचना करेंगे। हालांकि उनकी मदद व पर्यवेक्षण के लिए सीओ क्राइम रजनीश उपाध्याय को जिम्मेदारी दी गई है। दोनों से ही निष्पक्षता से विवेचना कर सच्चाई सामने लाने को कहा गया है।