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Budaun News: हत्यारोपी अजय को बिना अनुमति मेडिकल कॉलेज भेजने पर जेल प्रशासन घिरा
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राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं
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बदायूं। एचपीसीएल प्लांट में दो अधिकारियों की हत्या के मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह को जिला जेल से बिना विधिवत अनुमति मेडिकल कॉलेज भेजे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आईं हैं। जिलाधिकारी ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार देर रात जेल प्रशासन ने अचानक अजय प्रताप सिंह को इलाज के नाम पर राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि इतने संवेदनशील और चर्चित मामले के आरोपी को मेडिकल कॉलेज भेजे जाने की जानकारी न तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई और न ही जिला प्रशासन को ही अवगत कराया गया। इस कार्रवाई के सामने आने के बाद बृहस्पतिवार को प्रशासनिक और पुलिस महकमे में अफरातफरी का माहौल बन गया।
मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने आरोपी की जांच की, लेकिन उसे किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं पाई गई। इसके बाद उसे दोपहर करीब 12 बजे पुनः जिला जेल भेज दिया गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आरोपी की सामान्य जांच के बाद उसे स्वस्थ पाकर वापस भेजा गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर और किन परिस्थितियों में जेल प्रशासन ने बिना अनुमति के आरोपी को मेडिकल कॉलेज भेजा। इतना ही नहीं आरोपी के करीबियों से मिलीभगत कर उसे विशेष सुविधा देने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एडीएम प्रशासन और एसपी सिटी करेंगे जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अवनीश राय और पुलिस अधीक्षक अंकित शर्मा ने आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद डीएम ने एसपी सिटी और एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित कर दी है, जो पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच करेगी। साथ ही इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भी भेज दी गई है।
जेल अस्पताल से भी डिस्चार्ज हुआ अजय
सूत्र बताते हैं कि आरोपी अजय जेल अस्पताल से भी डिस्चार्ज हो गया है, लेकिन जेल प्रशासन ने सेटिंग कर उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचा दिया। अब पूरे महकमे में यह बात चर्चा का विषय बन गई है। वहीं जेल प्रशासन की इस हरकत से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इतने बड़े आपराधिक मामले के आरोपी को मेडिकल कॉलेज ले जाते समय पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, जो कि गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। इस बिंदु को भी जांच का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है।
जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज भेजा गया था अभय
जेल प्रशासन के मुताबिक, बंदी अजय प्रताप सिंह लगातार दर्द व स्वास्थ्य खराब होने की शिकायत कर रहा था। बुधवार रात उसे जेल अस्पताल के डाक्टरों को बुलाकर दिखाया गया। डाक्टरों की सलाह पर उसे पहले जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर सीएमएस डॉ. अमित वार्ष्णेय ने उसे हायर सेंटर बदायूं मेडिकल कालेज रेफर कर दिया।
जेल से निकालते समय सुरक्षा नहीं मांगी
एचपीसीएल के दो अफसरों की हत्या के बाद इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री योगी अदित्यानाथ गंभीर हैं। शासन मामले की रोज मानीटरिंग कर रहा है। इसके बाद भी जेल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। हत्यारोपी को जेल के सिपाहियों के साथ ही अस्पताल भेजा। पुलिस से सुरक्षा तक नहीं ली। जिसको लेकर पुलिस अधिकारी भी अचरज में हैं।
अजय के पैर में गोली फंसी
अजय के दाहिने पैर में गोली फंसी है। पैर का धाव अभी भरा नहीं है। डाक्टरों ने उसके पैर में सेप्टिक होने से इंकार किया। कहा, उसके एक पैर में गोली फंसी है, जो आपरेशन के बाद निकाली जाएगी।
वकील बोले- अजय की हालत ठीक नहीं
अजय प्रताप सिंह के अधिवक्ता सोमेंद्र सोलंकी का कहना है गोली लगने से अजय की हालत ठीक नहीं है। उसे बेहतर उपचार की जरूरत है। इसके बाद भी उसको बेहतर उपचार नहीं मिल रहा है। इस मामले में वे शुक्रवार 10 अप्रैल को कोर्ट में आवेदन लगाएंगे।
आरोपी अजय प्रताप सिंह को हड्डी रोग विशेषज्ञों की सलाह पर मेडिकल कॉलेज भेजा गया था, क्योंकि उसके पैर में चोट की शिकायत थी। वहां जांच के बाद उसे बृहस्पतिवार को वापस जेल लाया गया है। - राजेंद्र कुमार, जेल अधीक्षक
हत्या आरोपी अजय प्रताप सिंह को जिला जेल से मेडिकल कॉलेज भेजने के मामले में एसपी सिटी और एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में जांच टीम बनाई है। पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। जेल प्रशासन की भूमिका की जांच कराई जा रही है। - अवनीश राय, डीएम
जिला जेल से बुधवार की रात अजय नाम के बंदी को मेडिकल कॉलेज लाया गया था। उसका इलाज किया गया। बृहस्पतिवार को जेल प्रशासन उसे वापस लेकर चला गया। - डॉ अरुण कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
जेल प्रशासन ने पुलिस लाइन के आरआई को पत्र भेजा था, लेकिन अस्पताल ले जाते समय सूचना नहीं दी। डीएम के स्तर से जांच कमेटी बनाई गई है। इस पूरे मामले की जांच हो रही है। - अंकिता शर्मा, एसएसपी
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सूत्रों के मुताबिक, बुधवार देर रात जेल प्रशासन ने अचानक अजय प्रताप सिंह को इलाज के नाम पर राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि इतने संवेदनशील और चर्चित मामले के आरोपी को मेडिकल कॉलेज भेजे जाने की जानकारी न तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई और न ही जिला प्रशासन को ही अवगत कराया गया। इस कार्रवाई के सामने आने के बाद बृहस्पतिवार को प्रशासनिक और पुलिस महकमे में अफरातफरी का माहौल बन गया।
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मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने आरोपी की जांच की, लेकिन उसे किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं पाई गई। इसके बाद उसे दोपहर करीब 12 बजे पुनः जिला जेल भेज दिया गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आरोपी की सामान्य जांच के बाद उसे स्वस्थ पाकर वापस भेजा गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर और किन परिस्थितियों में जेल प्रशासन ने बिना अनुमति के आरोपी को मेडिकल कॉलेज भेजा। इतना ही नहीं आरोपी के करीबियों से मिलीभगत कर उसे विशेष सुविधा देने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एडीएम प्रशासन और एसपी सिटी करेंगे जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अवनीश राय और पुलिस अधीक्षक अंकित शर्मा ने आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद डीएम ने एसपी सिटी और एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित कर दी है, जो पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच करेगी। साथ ही इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भी भेज दी गई है।
जेल अस्पताल से भी डिस्चार्ज हुआ अजय
सूत्र बताते हैं कि आरोपी अजय जेल अस्पताल से भी डिस्चार्ज हो गया है, लेकिन जेल प्रशासन ने सेटिंग कर उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचा दिया। अब पूरे महकमे में यह बात चर्चा का विषय बन गई है। वहीं जेल प्रशासन की इस हरकत से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इतने बड़े आपराधिक मामले के आरोपी को मेडिकल कॉलेज ले जाते समय पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, जो कि गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। इस बिंदु को भी जांच का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है।
जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज भेजा गया था अभय
जेल प्रशासन के मुताबिक, बंदी अजय प्रताप सिंह लगातार दर्द व स्वास्थ्य खराब होने की शिकायत कर रहा था। बुधवार रात उसे जेल अस्पताल के डाक्टरों को बुलाकर दिखाया गया। डाक्टरों की सलाह पर उसे पहले जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर सीएमएस डॉ. अमित वार्ष्णेय ने उसे हायर सेंटर बदायूं मेडिकल कालेज रेफर कर दिया।
जेल से निकालते समय सुरक्षा नहीं मांगी
एचपीसीएल के दो अफसरों की हत्या के बाद इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री योगी अदित्यानाथ गंभीर हैं। शासन मामले की रोज मानीटरिंग कर रहा है। इसके बाद भी जेल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। हत्यारोपी को जेल के सिपाहियों के साथ ही अस्पताल भेजा। पुलिस से सुरक्षा तक नहीं ली। जिसको लेकर पुलिस अधिकारी भी अचरज में हैं।
अजय के पैर में गोली फंसी
अजय के दाहिने पैर में गोली फंसी है। पैर का धाव अभी भरा नहीं है। डाक्टरों ने उसके पैर में सेप्टिक होने से इंकार किया। कहा, उसके एक पैर में गोली फंसी है, जो आपरेशन के बाद निकाली जाएगी।
वकील बोले- अजय की हालत ठीक नहीं
अजय प्रताप सिंह के अधिवक्ता सोमेंद्र सोलंकी का कहना है गोली लगने से अजय की हालत ठीक नहीं है। उसे बेहतर उपचार की जरूरत है। इसके बाद भी उसको बेहतर उपचार नहीं मिल रहा है। इस मामले में वे शुक्रवार 10 अप्रैल को कोर्ट में आवेदन लगाएंगे।
आरोपी अजय प्रताप सिंह को हड्डी रोग विशेषज्ञों की सलाह पर मेडिकल कॉलेज भेजा गया था, क्योंकि उसके पैर में चोट की शिकायत थी। वहां जांच के बाद उसे बृहस्पतिवार को वापस जेल लाया गया है। - राजेंद्र कुमार, जेल अधीक्षक
हत्या आरोपी अजय प्रताप सिंह को जिला जेल से मेडिकल कॉलेज भेजने के मामले में एसपी सिटी और एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में जांच टीम बनाई है। पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। जेल प्रशासन की भूमिका की जांच कराई जा रही है। - अवनीश राय, डीएम
जिला जेल से बुधवार की रात अजय नाम के बंदी को मेडिकल कॉलेज लाया गया था। उसका इलाज किया गया। बृहस्पतिवार को जेल प्रशासन उसे वापस लेकर चला गया। - डॉ अरुण कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
जेल प्रशासन ने पुलिस लाइन के आरआई को पत्र भेजा था, लेकिन अस्पताल ले जाते समय सूचना नहीं दी। डीएम के स्तर से जांच कमेटी बनाई गई है। इस पूरे मामले की जांच हो रही है। - अंकिता शर्मा, एसएसपी

राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं