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Budaun News: दुष्कर्म के दोषी को सात साल का कठोर कारावास
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बदायूं। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के चलते विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम दिनेश तिवारी की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में दोषी रंजीत पुत्र वेदराम निवासी मझिया सिविल लाइंस को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
सिविल लाइंस थाने में वर्ष 2017 में रंजीत के खिलाफ अपहरण, बहलाकर ले जाने और दुष्कर्म समेत पॉक्सो एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम की अदालत में दाखिल किया था। पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर संचालित ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मामले को चिन्हित किया गया।
इसके बाद मॉनीटरिंग सेल, पैरोकार और अभियोजन विभाग के समन्वय से मामले की लगातार पैरवी की गई। शुक्रवार को अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और प्रभावी अभियोजन के आधार पर रंजीत को दुष्कर्म की धाराओं में दोषी मानते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि जमा कराए गए अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। दोषी की ओर से पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। वहीं, अन्य धाराओं में अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
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गैंगस्टर एक्ट में दोषी को दो साल की सजा
- अदालत ने पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। वाहन चोरी और लूट के मामले में गिरोह से जुड़े आरोपी जमील को अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ऋषि कुमार की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
कादरचौक थाना पुलिस ने जमील, मुकीम और मुजाहिर उर्फ मुजार्रा के खिलाफ गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की थी। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अन्य साथियों के साथ गिरोह बनाकर वाहनों की चोरी और लूट करता था।
मामले में अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों में गवाह शैलेंद्र कुमार सिंह का बयान भी शामिल रहा। गवाह के अनुसार, छह अप्रैल 2010 को उसके दोस्त सौरभ सक्सेना की डिस्कवर बाइक संख्या चोरी हो गई थी। बाइक उझानी लिंक रोड स्थित पंजाबी कॉलोनी के सामने खड़ी थी। घटना के संबंध में थाना उझानी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बाद में 15 मार्च 2011 को बाइक थाना कादरचौक पुलिस ने जमील समेत अन्य आरोपियों से बरामद की थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर जमील को दोषी माना। निर्णय में जेल में बिताई गई अवधि को उसकी सजा में समायोजित किए जाने का आदेश भी दिया गया है।
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सिविल लाइंस थाने में वर्ष 2017 में रंजीत के खिलाफ अपहरण, बहलाकर ले जाने और दुष्कर्म समेत पॉक्सो एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम की अदालत में दाखिल किया था। पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर संचालित ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मामले को चिन्हित किया गया।
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इसके बाद मॉनीटरिंग सेल, पैरोकार और अभियोजन विभाग के समन्वय से मामले की लगातार पैरवी की गई। शुक्रवार को अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और प्रभावी अभियोजन के आधार पर रंजीत को दुष्कर्म की धाराओं में दोषी मानते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि जमा कराए गए अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। दोषी की ओर से पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। वहीं, अन्य धाराओं में अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
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गैंगस्टर एक्ट में दोषी को दो साल की सजा
- अदालत ने पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। वाहन चोरी और लूट के मामले में गिरोह से जुड़े आरोपी जमील को अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ऋषि कुमार की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
कादरचौक थाना पुलिस ने जमील, मुकीम और मुजाहिर उर्फ मुजार्रा के खिलाफ गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की थी। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अन्य साथियों के साथ गिरोह बनाकर वाहनों की चोरी और लूट करता था।
मामले में अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों में गवाह शैलेंद्र कुमार सिंह का बयान भी शामिल रहा। गवाह के अनुसार, छह अप्रैल 2010 को उसके दोस्त सौरभ सक्सेना की डिस्कवर बाइक संख्या चोरी हो गई थी। बाइक उझानी लिंक रोड स्थित पंजाबी कॉलोनी के सामने खड़ी थी। घटना के संबंध में थाना उझानी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बाद में 15 मार्च 2011 को बाइक थाना कादरचौक पुलिस ने जमील समेत अन्य आरोपियों से बरामद की थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर जमील को दोषी माना। निर्णय में जेल में बिताई गई अवधि को उसकी सजा में समायोजित किए जाने का आदेश भी दिया गया है।