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Budaun News: बेरोकटोक फर्राटा भर रहीं स्लीपर बसें, होली पर और तेज हुआ संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:35 AM IST
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बिसौली से स्लीपर बस सवारियां भरती हुई। संवाद
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बदायूं। बेरोकटोक दौड़ रहीं स्लीपर बसें हादसों का कारण बन रहीं हैं। टूरिस्ट परमिट पर यह बसें डग्गामारी करती आ रहीं हैं। दो दिन पहले ही बरात में आई स्लीपर बस रोडवेज बस से टकरा गई, इसमें तीन बरातियों की मौत हो गई थी। इसके बाद भी जिले से सौ से अधिक बसें संचालित हो रहीं हैं। यह बसें अन्य प्रदेशों तक दौड़ लगा रहीं हैं। होली पर इनके संचालन में और तेजी आ गई है।
स्लीपर बस मालिक बेखौफ सवारियां ढो रहे हैं, इससे हर माह सरकार को लाखों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है। बावजूद इसके परिवहन निगम के अधिकारियों की जांच स्कूली बसों और मैजिकों के अलावा ऑटो तक ही सीमित है।
शाम होते ही शहर के नवादा, लालपुल, दातागंज तिराहे से आगरा, जयपुर व राजस्थान के कई जिलों के लिए स्लीपर बसें सवारियां भरकर जाती हैं। अधिकांश बसों के पास तो परमिट भी नहीं है। इन संचालकों का नेटवर्क कई प्रदेशों तक फैला हुआ है।
अधिकारियों के मुताबिक, जिले में 270 प्राइवेट बसों का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण है। इनमें से 170 बसों को फुटकर सवारियों के लिए जिले के सात रूटों पर संचालित होने का परमिट दिया गया है। करीब सौ बसें ऐसी हैं, जिन पर टूरिस्ट परमिट है। करीब 30 बसें ही मानक के अनुरूप नहीं चल रहीं हैं। उनपर विभाग के अधिकारियों की जब नजर पड़ती है तभी कार्रवाई की जाती है।
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इन बसों में कई बार पकड़ी जा चुकी है अफीम
इन बसों से सवारियां तो ढोई ही जाती हैं, साथ ही अवैध धंधे भी हो रहे हैं। एक बार तो इन बसों में अफीम का जखीरा पकड़ा गया था। वहीं डोडा चूरा, गोवंशीय पशुओं का मांस भी कई बार मिल चुका है। बावजूद इसके बसों का संचालन बेरोक टोक जारी है।
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तीन तरह की बसों के हैं परमिट
टूरिस्ट बसों को तीन प्रकार के परमिट- ऑल इंडिया, ऑल यूपी और टूरिस्ट परमिट जारी किए गए हैं। टूरिस्ट बसों के संचालक अधिकांशत: अधिक यात्रियों को बैठाकर ही दौड़ लगाते हैं। इससे हादसों की आशंका अधिक रहती है। टूरिस्ट बसों में सिलिंडर से लेकर खाने-पीने का सामान भी भरा होता है। इसकी वजह से हादसे की आशंका इन बसों में अधिक रहती है।
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जनवरी से अब तक 10 स्लीपर बसें सीज, आठ का चालान
-एआरटीओ ने बताया कि जनवरी से अब तक 10 स्लीपर बसों को सीज कर दिया गया है, जबकि आठ बसों का चालान किया गया है। इनसे तीन लाख रुपये का जुर्माना भी सरकारी खाते में जमा कराया गया है। इन सीज बसों में तीन फर्जी रोडवेज बसें भी शामिल हैं।
कोट
जिले में स्लीपर बसों का पंजीकरण नहीं हैं। यह अन्य जनपदों से संचालित होकर हमारे जिले से होकर गुजर रहीं हैं। कई बार इन बसों पर कार्रवाई की गई है। जिले में 170 बसें सात रूटों पर संचालित हो रहीं हैं, जिनका पंजीकरण कार्यालय से है। करीब सौ बसें ऑल इंडिया, ऑल यूपी व टूरिस्ट परमिट की हैं, जिनका संचालन हो रहा है। टूरिस्ट बसों पर विशेष ध्यान रहता। ओवरलोड होने पर चालान किया जाता है। -हरिओम कुमार, एआरटीओ
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स्लीपर बस मालिक बेखौफ सवारियां ढो रहे हैं, इससे हर माह सरकार को लाखों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है। बावजूद इसके परिवहन निगम के अधिकारियों की जांच स्कूली बसों और मैजिकों के अलावा ऑटो तक ही सीमित है।
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शाम होते ही शहर के नवादा, लालपुल, दातागंज तिराहे से आगरा, जयपुर व राजस्थान के कई जिलों के लिए स्लीपर बसें सवारियां भरकर जाती हैं। अधिकांश बसों के पास तो परमिट भी नहीं है। इन संचालकों का नेटवर्क कई प्रदेशों तक फैला हुआ है।
अधिकारियों के मुताबिक, जिले में 270 प्राइवेट बसों का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण है। इनमें से 170 बसों को फुटकर सवारियों के लिए जिले के सात रूटों पर संचालित होने का परमिट दिया गया है। करीब सौ बसें ऐसी हैं, जिन पर टूरिस्ट परमिट है। करीब 30 बसें ही मानक के अनुरूप नहीं चल रहीं हैं। उनपर विभाग के अधिकारियों की जब नजर पड़ती है तभी कार्रवाई की जाती है।
इन बसों में कई बार पकड़ी जा चुकी है अफीम
इन बसों से सवारियां तो ढोई ही जाती हैं, साथ ही अवैध धंधे भी हो रहे हैं। एक बार तो इन बसों में अफीम का जखीरा पकड़ा गया था। वहीं डोडा चूरा, गोवंशीय पशुओं का मांस भी कई बार मिल चुका है। बावजूद इसके बसों का संचालन बेरोक टोक जारी है।
तीन तरह की बसों के हैं परमिट
टूरिस्ट बसों को तीन प्रकार के परमिट- ऑल इंडिया, ऑल यूपी और टूरिस्ट परमिट जारी किए गए हैं। टूरिस्ट बसों के संचालक अधिकांशत: अधिक यात्रियों को बैठाकर ही दौड़ लगाते हैं। इससे हादसों की आशंका अधिक रहती है। टूरिस्ट बसों में सिलिंडर से लेकर खाने-पीने का सामान भी भरा होता है। इसकी वजह से हादसे की आशंका इन बसों में अधिक रहती है।
जनवरी से अब तक 10 स्लीपर बसें सीज, आठ का चालान
-एआरटीओ ने बताया कि जनवरी से अब तक 10 स्लीपर बसों को सीज कर दिया गया है, जबकि आठ बसों का चालान किया गया है। इनसे तीन लाख रुपये का जुर्माना भी सरकारी खाते में जमा कराया गया है। इन सीज बसों में तीन फर्जी रोडवेज बसें भी शामिल हैं।
कोट
जिले में स्लीपर बसों का पंजीकरण नहीं हैं। यह अन्य जनपदों से संचालित होकर हमारे जिले से होकर गुजर रहीं हैं। कई बार इन बसों पर कार्रवाई की गई है। जिले में 170 बसें सात रूटों पर संचालित हो रहीं हैं, जिनका पंजीकरण कार्यालय से है। करीब सौ बसें ऑल इंडिया, ऑल यूपी व टूरिस्ट परमिट की हैं, जिनका संचालन हो रहा है। टूरिस्ट बसों पर विशेष ध्यान रहता। ओवरलोड होने पर चालान किया जाता है। -हरिओम कुमार, एआरटीओ
