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Budaun News: कड़ाके की ठंड से कांपा जिला, न्यूनतम पारा चार डिग्री लुढ़का
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ठंड की वजह से सड़कों पर पसरा सन्नाटा। संवाद
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बदायूं। इस बार सर्दी ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बीते कई दिन से लगातार जारी शीतलहर और सर्द हवा के चलते न्यूनतम तापमान गिरकर चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इतनी कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सुबह और देर शाम गलन इतनी बढ़ गई है कि लोग बिना बेहद जरूरी काम के घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं।
जिले में बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 15 डिग्री और न्यूनतम तापमान चार डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो अब तक इस सीजन का सबसे कम तापमान है। ऐसे में सुबह से ही कोहरे व ठंडी हवा के कारण लोग परेशान हैं। कोहरे की वजह से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। ठंड की वजह से बाजारों में रौनक घट गई है।
आमतौर पर सुबह से खुलने वाली दुकानें अब देर से खुल रहीं हैं और शाम होते ही बाजार सिमटने लगते हैं। ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव, हीटर, गर्म कपड़ों का सहारा लेते नजर आए। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक शीतलहर जारी रहने की चेतावनी दी है। तापमान में और गिरावट संभव है। डाॅक्टरों ने लोगों से अपील की है कि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें और ठंड से बचाव के सभी उपाय करें।
दिनभर अलाव से चिपके रहे लोग
नगर पालिका और प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को राहत मिल रही है। दिनभर लोग अलाव से चिपके नजर आए। वहीं, दुकानदारों ने भी अपने दुकानों के आसपास अलग से अलाव जलकर हाथ सेंकते नजर आए।
देहात में ठंड का असर और हुआ गहरा
ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड का असर शहर की तुलना में कहीं ज्यादा महसूस किया जा रहा है। खुले खेत, कच्चे मकान और सीमित संसाधनों के कारण ग्रामीणों को ठंड से बचाव में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के समय खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर काफी देर से निकल रहे हैं। कई गांवों में लोग अलाव के आसपास जमा होकर हाथ सेंकते नजर आ रहे हैं। ठंडी हवाओं के कारण पशुपालकों को भी परेशानी हो रही है। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए लोग उन्हें बाड़ों में बांधकर ऊपर से बोरे डाल कर ठंड से बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
फसलों पर ठंड और पाले का खतरा
कड़ाके की ठंड और संभावित पाले से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर आलू, सरसों, मटर, टमाटर और अन्य सब्जी की फसलें ठंड में खराब होने लगती है। पाला पड़ने की स्थिति में पत्तियां झुलस सकती हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञ संजय कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे रात के समय हल्की सिंचाई करें, जिससे तापमान संतुलित रहे और पाले का असर कम हो। साथ ही खेतों के किनारे धुआं करने या पराली जलाकर हल्की गर्मी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
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आमतौर पर सुबह से खुलने वाली दुकानें अब देर से खुल रहीं हैं और शाम होते ही बाजार सिमटने लगते हैं। ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव, हीटर, गर्म कपड़ों का सहारा लेते नजर आए। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक शीतलहर जारी रहने की चेतावनी दी है। तापमान में और गिरावट संभव है। डाॅक्टरों ने लोगों से अपील की है कि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें और ठंड से बचाव के सभी उपाय करें।
दिनभर अलाव से चिपके रहे लोग
नगर पालिका और प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को राहत मिल रही है। दिनभर लोग अलाव से चिपके नजर आए। वहीं, दुकानदारों ने भी अपने दुकानों के आसपास अलग से अलाव जलकर हाथ सेंकते नजर आए।
देहात में ठंड का असर और हुआ गहरा
ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड का असर शहर की तुलना में कहीं ज्यादा महसूस किया जा रहा है। खुले खेत, कच्चे मकान और सीमित संसाधनों के कारण ग्रामीणों को ठंड से बचाव में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के समय खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर काफी देर से निकल रहे हैं। कई गांवों में लोग अलाव के आसपास जमा होकर हाथ सेंकते नजर आ रहे हैं। ठंडी हवाओं के कारण पशुपालकों को भी परेशानी हो रही है। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए लोग उन्हें बाड़ों में बांधकर ऊपर से बोरे डाल कर ठंड से बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
फसलों पर ठंड और पाले का खतरा
कड़ाके की ठंड और संभावित पाले से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर आलू, सरसों, मटर, टमाटर और अन्य सब्जी की फसलें ठंड में खराब होने लगती है। पाला पड़ने की स्थिति में पत्तियां झुलस सकती हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञ संजय कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे रात के समय हल्की सिंचाई करें, जिससे तापमान संतुलित रहे और पाले का असर कम हो। साथ ही खेतों के किनारे धुआं करने या पराली जलाकर हल्की गर्मी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।

ठंड की वजह से सड़कों पर पसरा सन्नाटा। संवाद