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Budaun News: सूतक में बंद हुए मंदिरों के पट, रात्रि में अभिषेक के बाद खुले
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बिरूआबाड़ी मंदिर में सूतक में मंदिर के पट पर डाला गया ताला। संवाद
- फोटो : credit
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बदायूं। होली से एक दिन पहले चंद्रग्रहण पड़ने पर सूतक लगने के कारण जनपद में मंगलवार को सुबह मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान घरों में पूजन करने के साथ ही भजन कीर्तन भी किए गए। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में अभिषेक किया गया इसके बाद कपाट खोले गए।
चंद्रग्रहण पड़ने के कारण मंगलवार को सुबह 6:20 बजे से सूतक शुरू हो गया था। बिरूआबाड़ी मंदिर के मुख्य पुजारी अभिमन्यु पांडेय ने बताया कि सूतक लगने से पहले ही भगवान को स्नान कराने के बाद भोग अर्पित कर दिया गया। सूतक लगने के बाद मंदिरों के परदे गिरा दिए गए और मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए गए। कुछ जगहों पर महिलाओं ने चंद्रग्रहण के अवसर भजन-कीर्तन भी किया। शाम 6:46 बजे सूतक खत्म होने के बाद मंदिरों में सफाई और धुलाई की गई। इसके बाद भगवान को पंचामृत से अभिषेक कराकर नए वस्त्र धारण कराए गए। इसके बाद भगवान की आरती की गई और उन्हें भोग अर्पित किया गया।
कुंवरगांव। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सूतक काल का पालन करते हुए घरों में पूजा-अर्चना की। प्रमुख मंदिरों के कपाट ग्रहण अवधि में बंद रहे, जिसके चलते भक्त बाहर से ही नमन करते नजर आए। हालांकि धार्मिक मर्यादाओं के बीच होली के रंगों का उत्साह कम नहीं पड़ा। गुलाल, पिचकारी, रंग और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की अच्छी-खासी भीड़ रही।
इस्लामनगर। ग्रहण की वजह से लोगों ने सूतक लगने से पहले सुबह छह बजे ही पूजा कर ली। ग्रहण की वजह से महिलाएं सुबह जल्दी उठकर पूजा की तैयारी में जुट गईं। तैयारी पूरी होने के बाद अपने देवी-देवता की पूजा कर ली। कारण, सूतक शुरू होने के बाद शाम तक कोई पूजा नहीं हो सकती थी। संवाद
लोगों ने देखा साल का पहला चंद्रग्रहण
बदायूं। साल का पहला चंद्रग्रहण चंद्रमा के उदय होने के साथ दिखाई देने लगा। शाम 6 बजकर 47 मिनट पर चंद्रग्रहण का समापन हुआ। लोगों ने भी चश्मा लगाकर चंद्रग्रहण देखा। चंद्रग्रहण के बाद लोगों ने अपने घरों की सफाई की और घर में गंगाजल का छिड़काव किया। इसके बाद ही घरों में खाना बनाया गया। संवाद
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चंद्रग्रहण पड़ने के कारण मंगलवार को सुबह 6:20 बजे से सूतक शुरू हो गया था। बिरूआबाड़ी मंदिर के मुख्य पुजारी अभिमन्यु पांडेय ने बताया कि सूतक लगने से पहले ही भगवान को स्नान कराने के बाद भोग अर्पित कर दिया गया। सूतक लगने के बाद मंदिरों के परदे गिरा दिए गए और मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए गए। कुछ जगहों पर महिलाओं ने चंद्रग्रहण के अवसर भजन-कीर्तन भी किया। शाम 6:46 बजे सूतक खत्म होने के बाद मंदिरों में सफाई और धुलाई की गई। इसके बाद भगवान को पंचामृत से अभिषेक कराकर नए वस्त्र धारण कराए गए। इसके बाद भगवान की आरती की गई और उन्हें भोग अर्पित किया गया।
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कुंवरगांव। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सूतक काल का पालन करते हुए घरों में पूजा-अर्चना की। प्रमुख मंदिरों के कपाट ग्रहण अवधि में बंद रहे, जिसके चलते भक्त बाहर से ही नमन करते नजर आए। हालांकि धार्मिक मर्यादाओं के बीच होली के रंगों का उत्साह कम नहीं पड़ा। गुलाल, पिचकारी, रंग और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की अच्छी-खासी भीड़ रही।
इस्लामनगर। ग्रहण की वजह से लोगों ने सूतक लगने से पहले सुबह छह बजे ही पूजा कर ली। ग्रहण की वजह से महिलाएं सुबह जल्दी उठकर पूजा की तैयारी में जुट गईं। तैयारी पूरी होने के बाद अपने देवी-देवता की पूजा कर ली। कारण, सूतक शुरू होने के बाद शाम तक कोई पूजा नहीं हो सकती थी। संवाद
लोगों ने देखा साल का पहला चंद्रग्रहण
बदायूं। साल का पहला चंद्रग्रहण चंद्रमा के उदय होने के साथ दिखाई देने लगा। शाम 6 बजकर 47 मिनट पर चंद्रग्रहण का समापन हुआ। लोगों ने भी चश्मा लगाकर चंद्रग्रहण देखा। चंद्रग्रहण के बाद लोगों ने अपने घरों की सफाई की और घर में गंगाजल का छिड़काव किया। इसके बाद ही घरों में खाना बनाया गया। संवाद

बिरूआबाड़ी मंदिर में सूतक में मंदिर के पट पर डाला गया ताला। संवाद- फोटो : credit

बिरूआबाड़ी मंदिर में सूतक में मंदिर के पट पर डाला गया ताला। संवाद- फोटो : credit
