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Budaun News: एसटीपी निर्माण की रफ्तार धीमी, सोत नदी कर रही प्रदूषण मुक्ति का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:08 AM IST
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शेखूपुर रोड पर बन रहा एसएफटी प्लाट। संवाद
- फोटो : रेउसा में हादसे में घायल लोग।
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बदायूं। सोत नदी को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए की जा रही पहल को बार-बार झटका लग रहा है। शहर के शेखूपुर रोड पर करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन समय से धनराशि न मिलने के कारण निर्माण कार्य धीमी गति से हो रहा है। अब तक केवल लगभग 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है।
शहर के प्रमुख नालों में शामिल लालपुल और एक अन्य बड़ा नाला बिना किसी शोधन के सीधे सोत नदी में गिरते हैं। इससे नदी का पानी न केवल दूषित हो रहा है, बल्कि आसपास के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन हालातों को देखते हुए नवंबर 2023 में एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। दिसंबर 2025 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित था। जल निगम की ओर से कार्य प्रारंभ तो कर दिया गया, लेकिन निर्धारित समयसीमा के मुकाबले प्रगति काफी धीमी है।
अब तक प्लांट का काम 30 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। शहर के रमेश तोमर, मुकेश सिंह का कहना है कि इस परियोजना को लेकर उम्मीदें तो हैं, लेकिन काम की सुस्ती ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। लालपुल निवासी निवासी रॉबिन सिंह और मनोहर गुप्ता का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो आने वाले समय में नदी का प्रदूषण और भी गंभीर रूप ले सकता है।
ये होगा काम
- परियोजना पूरी होने के बाद इन नालों के गंदे पानी को पहले पंपिंग स्टेशन के जरिए एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। योजना के तहत सोत नदी के पास लालपुल क्षेत्र में एक आधुनिक पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा, जहां से पाइपलाइन के माध्यम से पानी को दबाव के साथ प्लांट तक भेजा जाएगा। एसटीपी में अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से पानी को शुद्ध किया जाएगा। शोधन प्रक्रिया के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच बीओडी (जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग) और सीओडी (रासायनिक ऑक्सीजन मांग) के मानकों पर की जाएगी। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद ही शुद्ध पानी को दोबारा नदी में प्रवाहित किया जाएगा।
साढ़े 12 करोड़ रुपये हो चुके हैं जारी
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए शासन की ओर से अब तक कुल 12.50 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में 2.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त दी गई थी, जबकि जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में 10 करोड़ रुपये और जारी किए गए। धनराशि मिलने के बाद कुछ समय के लिए कार्य में तेजी भी देखी गई, लेकिन धनराशि खत्म होने के कारण अब फिर से गति धीमी पड़ गई है। परियोजना पूरी होने के बाद अगले चरण में लालपुल से एसटीपी प्लांट तक सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे शहर के सीवेज प्रबंधन को व्यवस्थित किया जा सकेगा।
जल निगम के जूनियर इंजीनियर मोहम्मद हुसैन का कहना है कि 30 फीसदी निर्माण हो चुका है। जल्द ही इसमें और तेजी लाई जाएगी। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के नालों का गंदा पानी सीधे नदी में जाने से रोका जा सकेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। - मोहम्मद हुसैन, जूनियर इंजीनियर, जल निगम
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अब तक प्लांट का काम 30 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। शहर के रमेश तोमर, मुकेश सिंह का कहना है कि इस परियोजना को लेकर उम्मीदें तो हैं, लेकिन काम की सुस्ती ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। लालपुल निवासी निवासी रॉबिन सिंह और मनोहर गुप्ता का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो आने वाले समय में नदी का प्रदूषण और भी गंभीर रूप ले सकता है।
ये होगा काम
- परियोजना पूरी होने के बाद इन नालों के गंदे पानी को पहले पंपिंग स्टेशन के जरिए एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। योजना के तहत सोत नदी के पास लालपुल क्षेत्र में एक आधुनिक पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा, जहां से पाइपलाइन के माध्यम से पानी को दबाव के साथ प्लांट तक भेजा जाएगा। एसटीपी में अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से पानी को शुद्ध किया जाएगा। शोधन प्रक्रिया के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच बीओडी (जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग) और सीओडी (रासायनिक ऑक्सीजन मांग) के मानकों पर की जाएगी। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद ही शुद्ध पानी को दोबारा नदी में प्रवाहित किया जाएगा।
साढ़े 12 करोड़ रुपये हो चुके हैं जारी
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए शासन की ओर से अब तक कुल 12.50 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में 2.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त दी गई थी, जबकि जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में 10 करोड़ रुपये और जारी किए गए। धनराशि मिलने के बाद कुछ समय के लिए कार्य में तेजी भी देखी गई, लेकिन धनराशि खत्म होने के कारण अब फिर से गति धीमी पड़ गई है। परियोजना पूरी होने के बाद अगले चरण में लालपुल से एसटीपी प्लांट तक सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे शहर के सीवेज प्रबंधन को व्यवस्थित किया जा सकेगा।
जल निगम के जूनियर इंजीनियर मोहम्मद हुसैन का कहना है कि 30 फीसदी निर्माण हो चुका है। जल्द ही इसमें और तेजी लाई जाएगी। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के नालों का गंदा पानी सीधे नदी में जाने से रोका जा सकेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। - मोहम्मद हुसैन, जूनियर इंजीनियर, जल निगम