HPCL Murder Case: कंपनी के सुरक्षा सलाहकार पहुंचे बदायूं, प्लांट को दोबारा शुरू कराने की कवायद शुरू
एचपीसीएल प्लांट के दो अफसरों की हत्या के बाद कंपनी के सुरक्षा सलाहकार टीम के साथ मंगलवार को बदायूं पहुंचे। सुरक्षा सलाहकार ने प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। प्लांट में डीएम और एसएसपी के साथ बैठक कर प्लांट को दोबारा शुरू कराने के लिए चर्चा की।
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बदायूं के सैंजनी स्थित एचपीसीएल के दो अफसरों की हत्या के बाद 12 मार्च से बंद कंपनी के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट को शुरू कराने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। मंगलवार को कंपनी के अधिकारियों की टीम प्लांट में पहुंची। कंपनी के अधिकारियों ने डीएम, एसएसपी के साथ बैठक कर प्लांट संचालन को लेकर रणनीति पर चर्चा की।
एचपीसीएल के सुरक्षा सलाहकार पहुंचे प्लांट
सैंजनी स्थित प्लांट की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर एचपीसीएल के सुरक्षा सलाहकार व महाराष्ट्र सरकार के पूर्व डीजीपी केपी रघुवंशी भी अन्य अधिकारियों की टीम के साथ मंगलवार को बदायूं पहुंचे। टीम ने यहां डीएम व एसएसपी के साथ बैठक करने के बाद प्लांट की सुरक्षा-व्यवस्था आदि का जायजा लिया। बताया जा रहा है कि बैठक में प्लांट संचालन को लेकर सुरक्षा आदि का खाका तैयार किया गया है। प्लांट में नए सुरक्षा गार्ड से लेकर संविदा कर्मचारियों की तैनाती के लिए भी बातचीत की गई।
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हर दिन हो रहा 13 लाख रुपये का नुकसान
प्लांट बंद होने से हर दिन करीब 13 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। इसलिए अब इसे शुरू कराने के लिए प्रयास तेज किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भी प्लांट का संचालन शुरू कराने के लिए सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश जारी हो चुके हैं। अब हत्या की घटना की विवेचना तेज होने के साथ ही लगने लगा है कि इस मामले में पुलिस का शिकंजा अभी बढ़ेगा ही। ऐसे में मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह या सैंजनी के किसी व्यक्ति की ओर से अड़चन नहीं आएगी।
प्लांट शुरू करने से पहले मानव संसाधन उपब्ध कराने वाली कंपनी एन-3 ई टेक्नोलॉजी लिमिटेड के प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाते हुए 85 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनमें मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के दो भाई केशव प्रताप और चंद्रशेखर भी शामिल बताए जा रहे हैं। यानी कर्मचारियों की नए सिरे से व्यवस्था की जाएगी।
बताया जा रहा है कि कंपनी में कर्मचारियों की तैनाती के लिए नए वेंडर की भी तलाश हो रही है। कर्मचारियों के रूप में ऐसे लोगों की तलाश है जो साफ सुथरी छवि के हो और स्थानीय स्तर पर उनका किसी राजनीतिक व्यक्ति से ज्यादा जुड़ाव न हो। इसके पीछे प्लांट का सही तरीके से संचालन शुरू के रूप में देखा जा रहा है।
इस तरह हो रहा था प्लांट में आयात
कंपनी से जुड़े जानकार बताते हैं कि सैजनी स्थित एचपीसीएल प्लांट संचालन में प्रतिदिन करीब सौ टन (एक हजार क्विंटल) पराली की जरूरत होती थी। इसका खरीद रेट 340 रुपये प्रति क्विंटल तय था जो करीब 16 एग्रीगेटर के जरिये पूरा किया जा रहा था। पराली स्थानीय स्तर पर बेहद कम मिल पा रही थी लेकिन शाहजहांपुर, पीलीभीत आदि स्थानों से इसे खरीदकर प्लांट को उपलब्ध कराया जाता था। इस लिहाज से करीब एक करोड़ 33 लाख रुपये की पराली प्रतिमाह खरीदी जाती थी।
इस तरह होता था निर्यात
जानकारों ने बताया कि एक क्विंटल पराली में करीब 14 किलो गैस बनती है। इस लिहाज से करीब 14 हजार किलो गैस प्रतिदिन बनाई जा रही थी। महीने के लिहाज से कमाई पर गौर करें तो करीब साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा की गैस प्रतिमाह बेची जा रही थी। पराली से गैस मिलने के बाद करीब 70 फीसदी हिस्सा बायो वेस्ट के रूप में निकलता है जो खाद के रूप में बेचा जा रहा था। यह किसानों को केवल ढाई रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही थी और इस लिहाज से करीब पचास लाख रुपये प्रतिमाह अलग कमाई हो रही थी।