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Budaun News: स्थाई लोक अदालत ने फाइनेंस कंपनी व बैंक को 1.15 लाख रुपये देने का दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:00 AM IST
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बदायूं। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष इशितयाक अली, सदस्य राकेश कुमार रस्तोगी व स्वदेश कुमारी ने फाइनेंस कंपनी व बैंक के शाखा प्रबंधक को वादी के लिए 1.15 लाख रुपये आठ प्रतिशत ब्याज सलाना की दर से देने के आदेश दिए। साथ ही 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व दस हजार रुपये अधिवक्ता खर्च भी देने का आदेश दिया है।
मौसमपुर के रहने वाले जवाहर सिंह ने दायर किए गए वाद में बताया कि गाय व भैंस खरीदने के लिए फाइनेंस कंपनी व बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन लिया था। उसने उनका बीमा कराया था। उसने 11 गाय व 39 भैंस खरीदी थी। दो गाय जिनकी कीमत 1.15 लाख रुपये थी। वह मर गईं। बीमा राशि न तो फाइनेंस कंपनी ने दी न ही बैंक ने। इसके बाद उसने स्थाई लोक अदालत में याचिका दायर की।
इसपर स्थाई लोक अदालत ने शाखा प्रबंधक नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बदायूं व बैंक ऑफ बड़ौदा के शाख प्रबंधक को 1.15 लाख रुपये आठ प्रतिशत ब्याज की दर से वादी को देने का आदेश दिया है।
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टैग न लगे होने की लगाई थी बैंक ने आपत्ति
वादी का आरोप है था कि बैंक ने गायों के कान में टैग न लगे होने की बात कहकर बीमा राशि देने से इन्कार किया था। लेकिन उसने कर्मचारियों को बुलाकर फोटो सहित वीडियोग्राफी कराई थी। इसके बाद भी उसको बीमित राशि देने में आनाकानी की जा रही थी। इसके बाद उसने कोर्ट का सहारा लिया। अब उसको न्याय मिल सका है। कोट ने 30 दिनों में रुपये देने को कहा है।
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मौसमपुर के रहने वाले जवाहर सिंह ने दायर किए गए वाद में बताया कि गाय व भैंस खरीदने के लिए फाइनेंस कंपनी व बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन लिया था। उसने उनका बीमा कराया था। उसने 11 गाय व 39 भैंस खरीदी थी। दो गाय जिनकी कीमत 1.15 लाख रुपये थी। वह मर गईं। बीमा राशि न तो फाइनेंस कंपनी ने दी न ही बैंक ने। इसके बाद उसने स्थाई लोक अदालत में याचिका दायर की।
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इसपर स्थाई लोक अदालत ने शाखा प्रबंधक नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बदायूं व बैंक ऑफ बड़ौदा के शाख प्रबंधक को 1.15 लाख रुपये आठ प्रतिशत ब्याज की दर से वादी को देने का आदेश दिया है।
टैग न लगे होने की लगाई थी बैंक ने आपत्ति
वादी का आरोप है था कि बैंक ने गायों के कान में टैग न लगे होने की बात कहकर बीमा राशि देने से इन्कार किया था। लेकिन उसने कर्मचारियों को बुलाकर फोटो सहित वीडियोग्राफी कराई थी। इसके बाद भी उसको बीमित राशि देने में आनाकानी की जा रही थी। इसके बाद उसने कोर्ट का सहारा लिया। अब उसको न्याय मिल सका है। कोट ने 30 दिनों में रुपये देने को कहा है।