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Budaun News: मुर्गी पालन के लिए दिए 80 हजार, अब वसूल रहे 4.50 लाख रुपये
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बदायूं। सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखा बिसौली ने किसान को मुर्गी पालन के लिए 80 हजार रुपये का लोन 2010 में मंजूर किया था। अब 15 साल बाद बैंक ने उसको नोटिस भेजकर 4.50 लाख रुपये जमा करने को कहा है। 22 जनवरी को दायर किए वाद में कोर्ट ने बैंक के महाप्रबंधक (जीएम) व प्रबंधक को नोटिस जारी करते हुए दो फरवरी को अपना पक्ष देने को कहा है।
विकास खंड वजीरगंज के गांव बरीपुरा निवासी किसान कन्हई लाल ने दायर वाद में कहा है कि सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखा बिसौली के फील्ड ऑफिसर व क्षेत्र के कुछ लोगों ने उसको मुर्गी पालन की सलाह दी। बताया कि इस पर बैंक लोन देती है। मुर्गी पालन के लिए बीमा के साथ पालने का प्रशिक्षण भी फ्री में दिया जाता है।
उसने मुर्गी पालन का कारोबार करने के लिए आवेदन बैंक में 2010 में जमा किया था। लोन मंजूर होने के बाद बताया कि 80 हजार रुपये का लोन मंजूर हो गया है। उसके हाथ में मात्र 50 हजार रुपये ही आए। 30 हजार रुपये बैंक के कर्मचारी हड़प गए। कहा गया कि मुर्गी के बच्चे खरीद लो फिर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कई बार बैंक के चक्कर लगाए, लेकिन प्रशिक्षण नहीं दिया गया। सही देखरेख के अभाव में एक-एक कर सभी मुर्गी के बच्चे मर गए।
बीमा की राशि लेने के लिए वह बैंक से लेकर अधिकारियों तक के चक्कर लगाता रहा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बैंक के लोगों ने कहा कि जब बीमा की राशि मिल जाए तब फिर से काम शुरू कर देना। उसने बताया कि करीब छह माह पहले बैंक से नोटिस आया, जिसमें 4.50 लाख रुपये की वसूली दिखाकर जमीन कुर्क करने की बात कही गई। तब से वह बैंक के चक्कर लगा रहा था।
मूलधन से चार गुना अधिक राशि की वसूली की जा रही है। पीड़ित ने बताया कि इससे उसको मानसिक क्षति पहुंची है। उसने अदालत से मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए एक लाख व अधिवक्ता खर्च के साथ ही उस पर दिखाई गई 4.50 लाख रुपये की धनराशि शून्य करने की मांग की है। अदालत ने बैंक महाप्रबंधक व शाखा प्रबंधक बिसौली को नोटिस जारी कर दो फरवरी को अपना पक्ष रखने को कहा है।
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विकास खंड वजीरगंज के गांव बरीपुरा निवासी किसान कन्हई लाल ने दायर वाद में कहा है कि सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखा बिसौली के फील्ड ऑफिसर व क्षेत्र के कुछ लोगों ने उसको मुर्गी पालन की सलाह दी। बताया कि इस पर बैंक लोन देती है। मुर्गी पालन के लिए बीमा के साथ पालने का प्रशिक्षण भी फ्री में दिया जाता है।
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उसने मुर्गी पालन का कारोबार करने के लिए आवेदन बैंक में 2010 में जमा किया था। लोन मंजूर होने के बाद बताया कि 80 हजार रुपये का लोन मंजूर हो गया है। उसके हाथ में मात्र 50 हजार रुपये ही आए। 30 हजार रुपये बैंक के कर्मचारी हड़प गए। कहा गया कि मुर्गी के बच्चे खरीद लो फिर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कई बार बैंक के चक्कर लगाए, लेकिन प्रशिक्षण नहीं दिया गया। सही देखरेख के अभाव में एक-एक कर सभी मुर्गी के बच्चे मर गए।
बीमा की राशि लेने के लिए वह बैंक से लेकर अधिकारियों तक के चक्कर लगाता रहा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बैंक के लोगों ने कहा कि जब बीमा की राशि मिल जाए तब फिर से काम शुरू कर देना। उसने बताया कि करीब छह माह पहले बैंक से नोटिस आया, जिसमें 4.50 लाख रुपये की वसूली दिखाकर जमीन कुर्क करने की बात कही गई। तब से वह बैंक के चक्कर लगा रहा था।
मूलधन से चार गुना अधिक राशि की वसूली की जा रही है। पीड़ित ने बताया कि इससे उसको मानसिक क्षति पहुंची है। उसने अदालत से मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए एक लाख व अधिवक्ता खर्च के साथ ही उस पर दिखाई गई 4.50 लाख रुपये की धनराशि शून्य करने की मांग की है। अदालत ने बैंक महाप्रबंधक व शाखा प्रबंधक बिसौली को नोटिस जारी कर दो फरवरी को अपना पक्ष रखने को कहा है।
