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Bulandshahar News: 80 में से 70 नमूने फेल, बिक रहा यूरिया-डिटर्जेंट वाला दूध
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बुलंदशहर। दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों की दूध की मांग जनपद से पूरी की जाती हैं। वहीं, अब खाद्य सुरक्षा विभाग की ताजा जांच रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। पिछले 11 महीनों में लिए गए नमूनों में से 80 प्रतिशत से अधिक फेल पाए गए हैं, जो जिले की सेहत के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से एक अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच जिले के विभिन्न हिस्सों से दूध के कुल 134 नमूने लिए गए थे। उपायुक्त खाद्य सुरक्षा विनीत कुमार ने बताया कि अब तक इनमें से 80 नमूनों की रिपोर्ट प्रयोगशाला से प्राप्त हो चुकी हैं। जिनमें से 66 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें फैट की मात्रा कम थी और पानी की मिलावट पाई गई। चार नमूने पूरी तरह असुरक्षित मिले, जिनमें घातक रसायनों का मिश्रण था।
अभी भी 54 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी है। जांच में यह बात सामने आई है कि मुनाफे की खातिर मिलावटखोर लोगों की नसों में जहर घोल रहे हैं। असुरक्षित मिले नमूनों में डिटर्जेंट, यूरिया, रिफाइंड तेल, स्टार्च और ग्लूकोज का प्रयोग कर कृत्रिम दूध तैयार किया जा रहा था। वहीं, अधोमानक दूध के मामलों में या तो दूध से क्रीम (फैट) निकाल ली गई थी या उसमें भारी मात्रा में पानी मिलाया गया था। जनपद में कई बड़ी दूध कंपनियां संचालित हैं। यहां से दूध न केवल दिल्ली, बल्कि हिमाचल प्रदेश और देश के कई अन्य राज्यों में भेजा जाता है। ऐसे में जनपद में मिलावटखोरी का यह खेल न केवल स्थानीय लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि जिले के दूध उद्योग की साख पर भी बट्टा लगा रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर.. किडनी और लीवर को सीधा खतरा
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमित कुमार ने मिलावटी दूध के सेवन से होने वाले खतरों पर बताया कि यह मिलावट शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को धीरे-धीरे खत्म कर रही है। यूरिया का सेवन किडनी पर अत्यधिक दबाव डालता है, जिससे लंबे समय में किडनी फेल होने का खतरा रहता है। केमिकल युक्त दूध से लीवर की कार्यक्षमता भी बुरी तरह प्रभावित होती है। रिफाइंड और अन्य टॉक्सिन्स के कारण रक्तचाप बढ़ता है और हृदय संबंधी बीमारियां जन्म लेती हैं। मिलावटी दूध पीने से बच्चों में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। उन्हें डिहाइड्रेशन, उल्टी और दस्त की समस्या बनी रहती है। डिटर्जेंट और स्टार्च पेट की परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे अल्सर और गंभीर संक्रमण हो सकते हैं। बताया कि दूध कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-डी और बी-12 का मुख्य स्रोत है। जब इसमें पानी मिलाया जाता है, तो इसकी कैलोरी और ऊर्जा कम हो जाती है। यदि मिलाया गया पानी दूषित है, तो उपभोक्ता को टाइफाइड, हैजा और गैस्ट्रोएन्टराइटिस जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है।
कोट...
- लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। अधोमानक और असुरक्षित दूध बेचने वालों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जा रही है। - विनीत कुमार, उपायुक्त खाद्य सुरक्षा
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खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से एक अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच जिले के विभिन्न हिस्सों से दूध के कुल 134 नमूने लिए गए थे। उपायुक्त खाद्य सुरक्षा विनीत कुमार ने बताया कि अब तक इनमें से 80 नमूनों की रिपोर्ट प्रयोगशाला से प्राप्त हो चुकी हैं। जिनमें से 66 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें फैट की मात्रा कम थी और पानी की मिलावट पाई गई। चार नमूने पूरी तरह असुरक्षित मिले, जिनमें घातक रसायनों का मिश्रण था।
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अभी भी 54 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी है। जांच में यह बात सामने आई है कि मुनाफे की खातिर मिलावटखोर लोगों की नसों में जहर घोल रहे हैं। असुरक्षित मिले नमूनों में डिटर्जेंट, यूरिया, रिफाइंड तेल, स्टार्च और ग्लूकोज का प्रयोग कर कृत्रिम दूध तैयार किया जा रहा था। वहीं, अधोमानक दूध के मामलों में या तो दूध से क्रीम (फैट) निकाल ली गई थी या उसमें भारी मात्रा में पानी मिलाया गया था। जनपद में कई बड़ी दूध कंपनियां संचालित हैं। यहां से दूध न केवल दिल्ली, बल्कि हिमाचल प्रदेश और देश के कई अन्य राज्यों में भेजा जाता है। ऐसे में जनपद में मिलावटखोरी का यह खेल न केवल स्थानीय लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि जिले के दूध उद्योग की साख पर भी बट्टा लगा रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर.. किडनी और लीवर को सीधा खतरा
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमित कुमार ने मिलावटी दूध के सेवन से होने वाले खतरों पर बताया कि यह मिलावट शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को धीरे-धीरे खत्म कर रही है। यूरिया का सेवन किडनी पर अत्यधिक दबाव डालता है, जिससे लंबे समय में किडनी फेल होने का खतरा रहता है। केमिकल युक्त दूध से लीवर की कार्यक्षमता भी बुरी तरह प्रभावित होती है। रिफाइंड और अन्य टॉक्सिन्स के कारण रक्तचाप बढ़ता है और हृदय संबंधी बीमारियां जन्म लेती हैं। मिलावटी दूध पीने से बच्चों में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। उन्हें डिहाइड्रेशन, उल्टी और दस्त की समस्या बनी रहती है। डिटर्जेंट और स्टार्च पेट की परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे अल्सर और गंभीर संक्रमण हो सकते हैं। बताया कि दूध कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-डी और बी-12 का मुख्य स्रोत है। जब इसमें पानी मिलाया जाता है, तो इसकी कैलोरी और ऊर्जा कम हो जाती है। यदि मिलाया गया पानी दूषित है, तो उपभोक्ता को टाइफाइड, हैजा और गैस्ट्रोएन्टराइटिस जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है।
कोट...
- लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। अधोमानक और असुरक्षित दूध बेचने वालों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जा रही है। - विनीत कुमार, उपायुक्त खाद्य सुरक्षा