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High Court : बच्चा ही सच्चा गवाह, जघन्य हत्या के दोषियों की उम्रकैद बरकरार

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 Mar 2026 03:10 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर में संपत्ति विवाद में चाची का सिर कलम कर पेड़ से लटकाने के दोषी भतीजे व उसके दो बेटों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। ट्रायल कोर्ट ने फैसले में मृतका के सात वर्षीय पोते की गवाही को महत्वपूर्ण माना था, जिस पर हाईकोर्ट ने भी मुहर लगाई और कहा कि बच्चा ही सच्चा गवाह।

Child is the true witness, life imprisonment of the culprits of heinous murder upheld
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर में संपत्ति विवाद में चाची का सिर कलम कर पेड़ से लटकाने के दोषी भतीजे व उसके दो बेटों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। ट्रायल कोर्ट ने फैसले में मृतका के सात वर्षीय पोते की गवाही को महत्वपूर्ण माना था, जिस पर हाईकोर्ट ने भी मुहर लगाई और कहा कि बच्चा ही सच्चा गवाह।

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यह फैसला न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की अदालत ने सजायाफ्ता लखमी और उसके दो बेटों लंगूरी व योगेश की ओर से ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील खारिज करते हुए सुनाया है। बुलंदशहर के डिबाई थाना क्षेत्र में 30 दिसंबर 2011 को लखमी ने बेटों के साथ मिलकर अपनी चाची चमेली देवी पर उस वक्त हमला किया था, जब वह अपने सात साल के पोते कृष्ण कुमार के साथ खेत से लौट रही थीं। लखमी जमीन के टुकड़े में हिस्सा चाहता था, जिसे उसके चाचा ने अपने दूसरे भतीजे के नाम कर दिया था।
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अभियोजन के मुताबिक, सभी ने चमेली देवी को जमीन पर गिराकर सिर कलम कर जामुन के पेड़ से लटका दिया। इसके बाद मृतका का पेट भी चीर दिया था। हमले के दौरान मासूम पोते को भी गोली लगी थी। घटना के बाद लखमी खून से सना हथियार लेकर शव के पास नाच रहा था, जिसे पुलिस ने मौके से ही गिरफ्तार किया था। ट्रायल कोर्ट ने चश्मदीद गवाह के रूप में पेश पोते की गवाही के आधार पर दोषी करार देते हुए तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे दोषियों ने पोते की गवाही पर सवाल उठाए। कहा कि घटना के वक्त कम उम्र के कारण बच्चा घटना को समझने में सक्षम नहीं था। गवाही के दौरान उसके बयान में कई विसंगतियां थीं। लिहाजा उसकी गवाही मान्य नहीं है।

कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि इस क्रूर घटना के वक्त मौजूद बच्चा ही सच्चा गवाह है। बच्चे अपनी आंखों के सामने होने वाली असामान्य और भयानक घटनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। जीवन भर ऐसी घटनाओं को नहीं भूलते। यदि उसकी गवाही में स्वाभाविकता है और वह बिना किसी दबाव या सिखाए-पढ़ाए गवाही दे रहा है, तो उसकी गवाही को केवल कम उम्र के आधार पर नकारा नहीं जा सकता।

टिप्पणी : एक बात झूठ तो सब झूठ का सिद्धांत लागू नहीं

एक बात झूठ तो सब झूठ का सिद्धांत इस मामले में लागू नहीं होता। यदि गवाह की छोटी-मोटी बातों में विसंगतियां हैं तो भी उसकी मुख्य और सत्य गवाही के आधार पर सजा दी जा सकती है। - हाईकोर्ट

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