Prayagraj : रिश्ते के चाचा ने ही रची मासूम के अपहरण की साजिश, 30 लाख की फिरौती था मकसद
मांडा थाना क्षेत्र के सराय कला गांव में छह साल के बच्चे के अपहरण का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। बच्चे का अपहरण रिश्ते के चाचा ने ही अपने साथियों के साथ मिलकर किया था। पुलिस ने दो कार, चार मोबाइल फोन समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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सरांयकला गांव से बीते सात मार्च को एलकेजी छात्र प्रतीक के अपहरण के मामले का पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा किया। रिश्ते के चाचा ने अपने साथियों के साथ मिलकर 20 से 30 लाख रुपये की फिरौती के लिए साजिश रची थी। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है।पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कार के साथ चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
सरांयकला निवासी उज्ज्वल शर्मा उर्फ विवेक शर्मा रिश्ते में अपहृत छह वर्षीय प्रतीक शर्मा का चाचा है। उसने गाजीपुर के रौजा निवासी आशुतोष प्रधान उर्फ हिमांशु को नौकरी के लिए पैसे दिए थे। नौकरी और रुपये वापस न मिलने पर दोनों ने अपहरण की योजना बनाई। उज्ज्वल के चचेरे भाई ओमप्रकाश शर्मा के इकलौते बेटे को निशाना बनाते हुए कहा कि परिवार बच्चे से बेहद लगाव रखता है। हाल ही में जमीन खरीदने के कारण उनके पास पर्याप्त पैसा है।
गिरोह बनाकर अपहरण की घटना को दिया अंजाम
आरोपी चाचा और आशुतोष ने गाजीपुर के खैरावारी निवासी प्रशांत राय, बलिया के छब्बी निवासी नीतिश कुमार और मेजा के नीबी भिटान निवासी राजकुमार पांडेय को वारदात में शामिल किया। राजकुमार को गाड़ी चलाने के लिए तीन लाख रुपये देने का लालच दिया था। बीते छह मार्च को राजकुमार गाजीपुर से कार लेकर आया। सात मार्च को सभी आरोपी गांव के आसपास पहुंचे और घटनास्थल की रेकी की।
मामा बनकर मासूम को उठाया
प्रतीक मेजा के सोनार का तारा गांव स्थित गुलाब पत्ती स्कूल में पढ़ता है। घटना के दिन जैसे ही प्रतीक स्कूल वैन से घर से करीब 50 मीटर पहले उतरा कि आशुतोष प्रधान ने खुद को मामा बताते हुए उसे जबरन कार में बैठा लिया। उस समय राजकुमार गाड़ी चला रहा था। इसके बाद आरोपी बच्चे को सरांयकला से सिरसा पीपा पुल के रास्ते चंदौली के सैय्यदराजा मोड़ तक ले गए। जहां पहले से मौजूद प्रशांत राय और नीतिश कुमार कार लेकर खड़े थे। वहां बच्चे को दूसरी गाड़ी में बैठाकर वाराणसी ले गए।
पुलिस के अनुसार आरोपी उज्जवल शर्मा उर्फ विवेक शर्मा रिश्ते में अपहृत प्रतीक शर्मा के पिता का चचेरा भाई है। अभियुक्त आशुतोष प्रधान उर्फ हिमांशु उज्जवल शर्मा का रिश्तेदार (मौसेरा भाई) है। उज्जवल शर्मा उर्फ विवेक शर्मा आशुतोष प्रधान को पैसे दिया था। जब उज्जवल ने आशुतोष प्रधान से अपने पैसे मांगे तो उसने बताया कि मैने जिसको पैसा दिया था वह खत्म हो गया है। अब कहीं और से पैसों का इंतजाम करना पड़ेगा। उज्जवल शर्मा उर्फ विवेक शर्मा ने आशुतोष प्रधान को बताया गया कि मेरे चचरे भाई ओमप्रकाश का इकलौता बेटा है, उसे पूरा परिवार चाहता है। ओमप्रकाश ने अभी अपनी ससुराल में जमीन खरीदी है, उसके पास अभी बहुत पैसा हो सकता है। अगर इसका अपहरण कर फिरौती मांगी जाए तो आराम से 20-30 लाख रुपये मिल सकते हैं।
बच्चे से बोले, बेटा हम मामा हैं
आशुतोष प्रधान उर्फ हिमांशू ने अपने मित्रों प्रशांत राय पुत्र अनिल राय व नितीश कुमार को अपने प्लान में शामिल किया। इसके बाद उज्जवल ने राजकुमार पुत्र ओमप्रकाश पांडेय से बात की और बताया कि तुम्हें पैसों की जरूरत हैं। मैं और मेरे साथी एक बच्चे का अपहरण करने वाले हैं। तुम्हें बस गाड़ी चलानी है। इसके बदले तुम्हें रुपये मिल जाएंगे। इसके बाद और काम भी मिलेगा। उज्जवल के बताने पर दिनांक छह मार्च को राजकुमार गाजीपुर जाकर प्रशांत राय से घटना के लिए प्रयोग की जाने वाली गाड़ी को लेकर आया। सात मार्च को आशुतोष प्रधान उर्फ हिमांशु दिघिया तिराहे पर मिला। आशुतोष प्रधान उर्फ हिमांशु ने घटना के समय अपना मोबाइल फोन रामनगर वाराणसी में छोड़ दिया था। इसके बाद आशुतोष प्रधान उर्फ हिमांशु और राजकुमार, सरांयकला गांव बच्चे के घर के पास पहुंचा।
योजना के अनुसार राजकुमार गाड़ी चला रहा था और हिमांशु मास्क लगा कर गाड़ी में बैठा था। जैसे ही बच्चा अपनी स्कूल वैन से उतरा आशुतोष प्रधान उर्फ हिमांशु ने तुरंत बच्चे को उठाकर गाड़ी में बैठा लिया और कहा बेटा हम मामा हैं और तुम्हारी मम्मी तुम्हें मामा के घर बुलाई हैं। गाड़ी से चलना है। इसके बाद हम लोग पीपा पुल पार करते हुए भदोही होते हुए बनारस के लिए चले। सैय्यद रजा मोड़ चंदौली के पास पुहंच कर योजना के तहत प्रशान्त राय, नितीश कुमार के साथ अपनी अमेज गाड़ी से मोड़ पर ख़ड़ा मिला। आशुतोष प्रधान बच्चे को लेकर प्रशान्त राय की अमेज गाड़ी में बैठ गया और राजकुमार से फिरौती का पैसा मिल जाने के बाद मिलने को कह कर चले गए। राजकुमार ने वापस गाडी को लाकर महेवाघाट के पास जंगल में छिपा दिया गया।