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UP: 500 रुपये देकर युवाओं को पढ़ा रहा था आतंक का पाठ, यहां लगवाए थे भट्टी और जट्ट के फोटो; अनपढ़ उमर की कहानी
राहुल सक्सेना, अमर उजाला, बुलंदशहर
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 20 Jun 2026 02:12 PM IST
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सार
बुलंदशहर में अनपढ़ उमर युवाओं को आतंक का पाठ पढ़ा रहा था। इसके लिए उमर 500 रुपये दे रहा था। उमर ने ही फैजान से यमुनापुरम, अकबरपुर और देवली में शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के फोटो लगवाए थे।
पुलिस की गिरफ्त में संदिग्ध
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बुलंदशहर के गांव अकबरपुर से गिरफ्तार किया गया संदिग्ध आतंकी उमर अनपढ़ है। वह 500 रुपये देकर युवाओं को आतंक का पढ़ा रहा था। गांव के कुछ युवाओं ने बताया कि वह ये रुपये पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के पोस्टर लगाने के लिए देता था। फैजान को भी उसने ऐसे ही जाल में फंसाया था। धीरे-धीरे वह अन्य युवाओं को भी अपने नेटवर्क से जोड़ रहा था।
गांव अकबरपुर के लोगों ने बताया कि उमर के पिता जुल्फिकार मूल रूप से मऊखेड़ा गांव के निवासी हैं। करीब 15 वर्ष पहले वे इस गांव में आकर रहने लगे थे। कुछ समय तक वह किराये के मकान में रहे, अब उन्होंने अकबरपुर में अपना मकान बनाया है। 18 साल का उमर जुल्फिकार की 10 संतानों में से नौवें नंबर का है। वह कभी स्कूल नहीं गया। दीनी तालीम के लिए कुछ दिन मदरसा भेजा गया लेकिन उसने वह पढ़ाई भी अधूरी छोड़ दी।
गांव अकबरपुर के लोगों ने बताया कि उमर के पिता जुल्फिकार मूल रूप से मऊखेड़ा गांव के निवासी हैं। करीब 15 वर्ष पहले वे इस गांव में आकर रहने लगे थे। कुछ समय तक वह किराये के मकान में रहे, अब उन्होंने अकबरपुर में अपना मकान बनाया है। 18 साल का उमर जुल्फिकार की 10 संतानों में से नौवें नंबर का है। वह कभी स्कूल नहीं गया। दीनी तालीम के लिए कुछ दिन मदरसा भेजा गया लेकिन उसने वह पढ़ाई भी अधूरी छोड़ दी।
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आरोपी उमर के पिता जुल्फिकार ने बताया कि 16 जून की सुबह करीब 9 बजे बेटे को एटीएस ने सोते से गिरफ्तार किया था। उस समय बताया था कि पूछताछ के बाद छोड़ देंगे। उससे पूछताछ में गांव के ही फैजान का नाम सामने आया, जिससे वह शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के पोस्टर लगवाता था। एटीएस ने फैजान को 17 जून को उत्तराखंड के मसूरी से गिरफ्तार किया था। वहां वह घूमने गया था।
तब्लीगी जमात से जुड़े हैं उमर के पिता
आरोपी उमर के पिता जुल्फिकार ने बताया कि वह तब्लीगी जमात से जुड़े हैं। वह पांच भाई हैं। उन्होंने हाल ही में डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन बेची है। उस जमीन के रुपयों का पांच जगह बंटवारा हुआ। उनके हिस्से में 30 लाख आए, जिससे उन्होंने मकान का लिंटर डलवाया है और एक प्लॉट भी खरीदा है। उन्होंने कहा कि वह सरकार के साथ हैं, बेटे ने जो अपराध किया है, सरकार उसको जो सजा देगी उन्हें मंजूर है।
आरोपी उमर के पिता जुल्फिकार ने बताया कि वह तब्लीगी जमात से जुड़े हैं। वह पांच भाई हैं। उन्होंने हाल ही में डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन बेची है। उस जमीन के रुपयों का पांच जगह बंटवारा हुआ। उनके हिस्से में 30 लाख आए, जिससे उन्होंने मकान का लिंटर डलवाया है और एक प्लॉट भी खरीदा है। उन्होंने कहा कि वह सरकार के साथ हैं, बेटे ने जो अपराध किया है, सरकार उसको जो सजा देगी उन्हें मंजूर है।
उमर का नहीं है बैंक खाता, फिर कौन पहुंचा रहा था रुपये
मोहम्मद उमर के पिता जुल्फिकार ने बताया कि उमर का कोई बैंक खाता नहीं है। जबकि एटीएस ने खुलासा किया है कि उमर को पाकिस्तानी संगठन से 12 हजार रुपये प्रति माह पहुंचाए जा रहे थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि उमर को फंडिंग की रकम कौन पहुंचा रहा था। उसे रुपये पहुंचाने वाला गैंग उमर जैसे और बहुत से युवाओं को बहलाकर आतंकवादी संगठन से जोड़ने की साजिश तो नहीं रच रहे।
मोहम्मद उमर के पिता जुल्फिकार ने बताया कि उमर का कोई बैंक खाता नहीं है। जबकि एटीएस ने खुलासा किया है कि उमर को पाकिस्तानी संगठन से 12 हजार रुपये प्रति माह पहुंचाए जा रहे थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि उमर को फंडिंग की रकम कौन पहुंचा रहा था। उसे रुपये पहुंचाने वाला गैंग उमर जैसे और बहुत से युवाओं को बहलाकर आतंकवादी संगठन से जोड़ने की साजिश तो नहीं रच रहे।
आतंकी कनेक्शन सामने आने पर किया अनफ्रेंड
मोहम्मद उमर का आतंकी कनेक्शन सामने आने के साथ ही सोशल मीडिया पर उससे जुड़े युवा भी दहशत में हैं। सोशल मीडिया से उससे जुड़े युवाओं ने अपने आपको को उमर की सोशल मीडिया से अनफ्रेंड कर लिया। गांव के एक युवा ने बताया कि गांव के युवा जो सोशल मीडिया पर उमर से जुड़े थे सभी ने अपने आपको को उमर की फ्रेंड लिस्ट से अनफ्रेंड कर लिया है। एक दुकानदार युवक ने बताया कि वह फोन पर घंटों बातें करता था और कई बार आवाज रिकॉर्ड करके मैसेज भी भेजता था। वह सिगरेट का भी शौकीन था और दिनभर में करीब 10 से 15 सिगरेट पीता था, लेकिन आमदनी का स्रोत कुछ नहीं था।
मोहम्मद उमर का आतंकी कनेक्शन सामने आने के साथ ही सोशल मीडिया पर उससे जुड़े युवा भी दहशत में हैं। सोशल मीडिया से उससे जुड़े युवाओं ने अपने आपको को उमर की सोशल मीडिया से अनफ्रेंड कर लिया। गांव के एक युवा ने बताया कि गांव के युवा जो सोशल मीडिया पर उमर से जुड़े थे सभी ने अपने आपको को उमर की फ्रेंड लिस्ट से अनफ्रेंड कर लिया है। एक दुकानदार युवक ने बताया कि वह फोन पर घंटों बातें करता था और कई बार आवाज रिकॉर्ड करके मैसेज भी भेजता था। वह सिगरेट का भी शौकीन था और दिनभर में करीब 10 से 15 सिगरेट पीता था, लेकिन आमदनी का स्रोत कुछ नहीं था।
दंगों में फैजान के परदादा-परदादी की कर दी गई थी हत्या
आरोपी फैजान के पिता सलीमुद्दीन ने बताया कि गाजियाबाद में वर्ष 1992 में दंगा हुआ था। उसमें फैजान के परदादा साहबुद्दीन और परदादी की हत्या कर दी गई थी। सलीमुद्दीन ने बताया कि वह मूलरूप से गाजियाबाद दिल्ली गेट के रहने वाले हैं। यहां सलीमुद्दीन गांव के बाहर ही चाउमीन का ठेला लगाते हैं।
आरोपी फैजान के पिता सलीमुद्दीन ने बताया कि गाजियाबाद में वर्ष 1992 में दंगा हुआ था। उसमें फैजान के परदादा साहबुद्दीन और परदादी की हत्या कर दी गई थी। सलीमुद्दीन ने बताया कि वह मूलरूप से गाजियाबाद दिल्ली गेट के रहने वाले हैं। यहां सलीमुद्दीन गांव के बाहर ही चाउमीन का ठेला लगाते हैं।
पूर्व प्रधान बोले, दोनों ने गांव को कलंकित किया
अकबरपुर गांव के पूर्व प्रधान अफजाल अहमद का कहना है कि उमर और फैजान में से दोनों कोई भी मूलरूप से उनके गांव का नहीं है लेकिन दोनों ने उनके गांव को कलंकित कर दिया। गांव की छवि काफी धूमिल हुई है। इससे पहले गांव में कभी इस तरह की गतिविधि नहीं हुई। उन्होंने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
अकबरपुर गांव के पूर्व प्रधान अफजाल अहमद का कहना है कि उमर और फैजान में से दोनों कोई भी मूलरूप से उनके गांव का नहीं है लेकिन दोनों ने उनके गांव को कलंकित कर दिया। गांव की छवि काफी धूमिल हुई है। इससे पहले गांव में कभी इस तरह की गतिविधि नहीं हुई। उन्होंने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जिले में दोनों का कोई आपराधिक रिकाॅर्ड नहीं मिला है। अपने स्तर से भी आरोपियों के बारे में जांच कराई जा रही है। - दिनेश कुमार सिंह, एसएसपी