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अपराध के खिलाफ चुप्पी तोड़ें, पुलिस हर कदम पर आपके साथ : पूर्णिमा सिंह
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रैनेसा स्कूल में हुई पुलिस की पाठशाला में शामिल छात्राओं का मार्गदर्शन करती सीओ पूर्णिमा सिंह।
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बुलंदशहर। नगर के रैनेसा स्कूल में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं सीओ ट्रैफिक पूर्णिमा सिंह ने छात्र-छात्राओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए साहस और सतर्कता का मंत्र दिया। कहा कि अपराध को सहना उसे बढ़ावा देने के समान है, इसलिए अपनी आवाज बुलंद करना बेहद जरूरी है। अपराधियों की सही जगह सलाखों के पीछे है।
सीओ ट्रैफिक पूर्णिमा सिंह ने छात्राओं से सीधा संवाद किया। कहा कि अक्सर अपराधी लोगों के डर का फायदा उठाते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि, अगर कोई आपको परेशान करता है या कोई गलत हरकत करता है, तो उसे छिपाएं नहीं। चुप्पी साधने से अपराधी के हौसले बढ़ते हैं। अपराधियों की सही जगह सिर्फ सलाखों के पीछे है।
उन्होंने छात्राओं को सलाह दी कि किसी भी विपरीत परिस्थिति में सबसे पहले अपने परिजनों और शिक्षकों को सूचित करें। यदि वहां से समाधान न मिले या कोई चुप रहने का दबाव बनाए, तो निसंकोच पुलिस की मदद लें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस की मदद लेने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
सीओ ट्रैफिक ने छात्राओं को महिला हेल्पलाइन (1090), आपातकालीन सेवा (112) और साइबर हेल्पलाइन (1930) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपील की कि वे बिना लाइसेंस वाहन न चलाएं। इस अवसर पर स्कूल के प्रधानाचार्य अशोक माथुर समेत स्कूल का अन्य स्टाफ भी मौजूद रहा।
छात्राओं ने पूछे ये सवाल
- सवाल: मैम, अगर सड़क पर चलते समय कोई लड़का पीछा करे या फब्तियां कसे, तो हमें तुरंत क्या करना चाहिए? - उन्नति गौड़,
जवाब: अगर कोई पीछा करता है, तो तुरंत महिला हेल्पलाइन 1090 पर कॉल करें। आपको थाने जाने की भी जरूरत नहीं है, पुलिस खुद एक्शन लेगी। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
- सवाल: आजकल सोशल मीडिया पर अनजान लोग फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं और बाद में फोटो के साथ छेड़छाड़ की धमकी देते हैं। ऐसे में क्या करें? - प्रत्याक्षी, जवाब: डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सुरक्षा है। किसी भी अनजान की रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अगर कोई धमकी दे, तो डरें नहीं। तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- सवाल: कई बार घर वाले या आस-पड़ोस के लोग कहते हैं कि पुलिस के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए, बदनामी होगी। ऐसे दबाव में हम अपनी बात कैसे रखें? - भविका,
जवाब: बदनामी अपराधी की होती है, पीड़ित की नहीं। अपने परिजनों को समझाएं कि पुलिस आपकी मित्र है। अगर घरवाले साथ न दें, तो आप सीधे अपने स्कूल की प्रिंसिपल या महिला पुलिस बीट अधिकारी से बात कर सकती हैं। पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए कवच की तरह काम करती है।
- सवाल: यातायात नियमों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि हेलमेट सिर्फ चालान से बचने के लिए है। क्या छोटे रास्तों पर भी यह जरूरी है? - मिताली, छात्रा जवाब: हादसा दूरी देखकर नहीं आता। हेलमेट आपकी सुरक्षा के लिए है, पुलिस के चालान के लिए नहीं। सिर की चोट जानलेवा होती है। इसलिए चाहे आप 100 मीटर दूर जा रहे हों या 10 किलोमीटर, हेलमेट पहनना अपनी जीवन की गारंटी लेना है।
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सीओ ट्रैफिक पूर्णिमा सिंह ने छात्राओं से सीधा संवाद किया। कहा कि अक्सर अपराधी लोगों के डर का फायदा उठाते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि, अगर कोई आपको परेशान करता है या कोई गलत हरकत करता है, तो उसे छिपाएं नहीं। चुप्पी साधने से अपराधी के हौसले बढ़ते हैं। अपराधियों की सही जगह सिर्फ सलाखों के पीछे है।
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उन्होंने छात्राओं को सलाह दी कि किसी भी विपरीत परिस्थिति में सबसे पहले अपने परिजनों और शिक्षकों को सूचित करें। यदि वहां से समाधान न मिले या कोई चुप रहने का दबाव बनाए, तो निसंकोच पुलिस की मदद लें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस की मदद लेने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
सीओ ट्रैफिक ने छात्राओं को महिला हेल्पलाइन (1090), आपातकालीन सेवा (112) और साइबर हेल्पलाइन (1930) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपील की कि वे बिना लाइसेंस वाहन न चलाएं। इस अवसर पर स्कूल के प्रधानाचार्य अशोक माथुर समेत स्कूल का अन्य स्टाफ भी मौजूद रहा।
छात्राओं ने पूछे ये सवाल
- सवाल: मैम, अगर सड़क पर चलते समय कोई लड़का पीछा करे या फब्तियां कसे, तो हमें तुरंत क्या करना चाहिए? - उन्नति गौड़,
जवाब: अगर कोई पीछा करता है, तो तुरंत महिला हेल्पलाइन 1090 पर कॉल करें। आपको थाने जाने की भी जरूरत नहीं है, पुलिस खुद एक्शन लेगी। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
- सवाल: आजकल सोशल मीडिया पर अनजान लोग फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं और बाद में फोटो के साथ छेड़छाड़ की धमकी देते हैं। ऐसे में क्या करें? - प्रत्याक्षी, जवाब: डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सुरक्षा है। किसी भी अनजान की रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अगर कोई धमकी दे, तो डरें नहीं। तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- सवाल: कई बार घर वाले या आस-पड़ोस के लोग कहते हैं कि पुलिस के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए, बदनामी होगी। ऐसे दबाव में हम अपनी बात कैसे रखें? - भविका,
जवाब: बदनामी अपराधी की होती है, पीड़ित की नहीं। अपने परिजनों को समझाएं कि पुलिस आपकी मित्र है। अगर घरवाले साथ न दें, तो आप सीधे अपने स्कूल की प्रिंसिपल या महिला पुलिस बीट अधिकारी से बात कर सकती हैं। पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए कवच की तरह काम करती है।
- सवाल: यातायात नियमों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि हेलमेट सिर्फ चालान से बचने के लिए है। क्या छोटे रास्तों पर भी यह जरूरी है? - मिताली, छात्रा जवाब: हादसा दूरी देखकर नहीं आता। हेलमेट आपकी सुरक्षा के लिए है, पुलिस के चालान के लिए नहीं। सिर की चोट जानलेवा होती है। इसलिए चाहे आप 100 मीटर दूर जा रहे हों या 10 किलोमीटर, हेलमेट पहनना अपनी जीवन की गारंटी लेना है।

रैनेसा स्कूल में हुई पुलिस की पाठशाला में शामिल छात्राओं का मार्गदर्शन करती सीओ पूर्णिमा सिंह।