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Bulandshahar News: सात दिन बाद उपचार के दौरान गई संविदाकर्मी की जान, जमकर हंगामा
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गुलावठी में संविदाकर्मी की मौत के बाद सड़क पर शव रखकर हंगामा प्रदर्शन करते परिजन। स ंवाद
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गुलावठी। नगर के विद्युत उपकेंद्र-2 पर तैनात संविदा लाइनमैन बीते दिनों लाइन सही करते वक्त करंट की चपेट में आकर झुलस गया। सात दिनों तक अस्पताल में मौत से जूझने के बाद शनिवार को लाइनमैन रविंद्र उर्फ रवि (30) ने दम तोड़ दिया।
मौत की खबर से भड़के परिजनों और ग्रामीणों ने बिजली घर के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी। करीब ढाई घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन और विभाग के बीच करीब 15 लाख रुपये की सहायता राशि और मृतक के पुत्र को नौकरी देने पर सहमति बनी। इसके बाद देर रात गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
थाना क्षेत्र के गांव ईसेपुर निवासी रविंद्र कुमार लंबे समय से संविदा पर लाइनमैन के रूप में कार्यरत थे। गत 19 अप्रैल को भमरा क्षेत्र में 25 केवीए के एक ट्यूबवेल ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी आई थी। रवि अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और नियमानुसार विभाग से शटडाउन लिया, लेकिन जैसे ही वह खंभे पर चढ़कर तारों को ठीक करने लगे, अचानक लाइन में हाई-वोल्टेज करंट वापस आ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के साथ रवि झुलस कर जमीन पर आ गिरे। उन्हें तत्काल दिल्ली और फिर नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को उनकी सांसें थम गईं। शाम करीब पांच बजे जब एंबुलेंस से रवि का शव गुलावठी पहुंचा, तो परिजनों का सब्र टूट गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को विद्युत उपकेंद्र के गेट पर रखकर नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना मिलते ही सीओ सिकंदराबाद भास्कर मिश्रा, गुलावठी, बीबीनगर और सिकंदराबाद थाने की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
परिजनों ने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण एक मासूम परिवार उजड़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक ठोस आर्थिक मदद और नौकरी का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, शव नहीं हटेगा। पहले परिजन 50 लाख रुपए की आर्थिक मदद और नौकरी की मांग पर अड़े रहे। सीओ के समझाने के बावजूद वह नहीं माने। इस दौरान जेई के पहुंचने पर महिलाएं आक्रोशित हो गईं, उन्होंने टीम को दौड़ा लिया।
हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। बाद में सीओ भास्कर मिश्रा और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को शांत करने के लिए वार्ता की। करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद विभाग और प्रशासन ने आर्थिक सहायता पर सहमति जताई।
विद्युत विभाग की ओर से दुर्घटना सहायता राशि के रूप में 10 लाख रुपये देने, वहीं, किसान दुर्घटना योजना के तहत मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता दिलाने, एसडीओ सहित समस्त बिजली कर्मचारियों द्वारा 1 लाख रुपये का योगदान देने, क्षेत्र के समाजसेवियों की ओर से 1.5 लाख रुपये की मदद देने और मृतक के पुत्र को 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर विभाग में संविदा की नौकरी दिए जाने का आश्वासन दिया गया।
वहीं, अधिकारियों ने आश्वासन दिया का प्राथमिक जांच जेई या संबंधित जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सीओ भास्कर मिश्रा ने आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द सहायता राशि की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
सुरक्षा उपकरणों पर उठे सवाल : इस हादसे ने एक बार फिर संविदाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर विभाग की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि लाइनमैनों को न तो मानक के अनुरूप सुरक्षा दस्ताने मिलते हैं और न ही सेफ्टी बेल्ट।
तकनीकी टीम की चूक के कारण शटडाउन के बाद करंट आना सीधे तौर पर ‘क्रिमिनल नेग्लीजेन्स’ का मामला है। पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर पर जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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मौत की खबर से भड़के परिजनों और ग्रामीणों ने बिजली घर के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी। करीब ढाई घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन और विभाग के बीच करीब 15 लाख रुपये की सहायता राशि और मृतक के पुत्र को नौकरी देने पर सहमति बनी। इसके बाद देर रात गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
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थाना क्षेत्र के गांव ईसेपुर निवासी रविंद्र कुमार लंबे समय से संविदा पर लाइनमैन के रूप में कार्यरत थे। गत 19 अप्रैल को भमरा क्षेत्र में 25 केवीए के एक ट्यूबवेल ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी आई थी। रवि अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और नियमानुसार विभाग से शटडाउन लिया, लेकिन जैसे ही वह खंभे पर चढ़कर तारों को ठीक करने लगे, अचानक लाइन में हाई-वोल्टेज करंट वापस आ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के साथ रवि झुलस कर जमीन पर आ गिरे। उन्हें तत्काल दिल्ली और फिर नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को उनकी सांसें थम गईं। शाम करीब पांच बजे जब एंबुलेंस से रवि का शव गुलावठी पहुंचा, तो परिजनों का सब्र टूट गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को विद्युत उपकेंद्र के गेट पर रखकर नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना मिलते ही सीओ सिकंदराबाद भास्कर मिश्रा, गुलावठी, बीबीनगर और सिकंदराबाद थाने की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
परिजनों ने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण एक मासूम परिवार उजड़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक ठोस आर्थिक मदद और नौकरी का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, शव नहीं हटेगा। पहले परिजन 50 लाख रुपए की आर्थिक मदद और नौकरी की मांग पर अड़े रहे। सीओ के समझाने के बावजूद वह नहीं माने। इस दौरान जेई के पहुंचने पर महिलाएं आक्रोशित हो गईं, उन्होंने टीम को दौड़ा लिया।
हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। बाद में सीओ भास्कर मिश्रा और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को शांत करने के लिए वार्ता की। करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद विभाग और प्रशासन ने आर्थिक सहायता पर सहमति जताई।
विद्युत विभाग की ओर से दुर्घटना सहायता राशि के रूप में 10 लाख रुपये देने, वहीं, किसान दुर्घटना योजना के तहत मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता दिलाने, एसडीओ सहित समस्त बिजली कर्मचारियों द्वारा 1 लाख रुपये का योगदान देने, क्षेत्र के समाजसेवियों की ओर से 1.5 लाख रुपये की मदद देने और मृतक के पुत्र को 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर विभाग में संविदा की नौकरी दिए जाने का आश्वासन दिया गया।
वहीं, अधिकारियों ने आश्वासन दिया का प्राथमिक जांच जेई या संबंधित जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सीओ भास्कर मिश्रा ने आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द सहायता राशि की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
सुरक्षा उपकरणों पर उठे सवाल : इस हादसे ने एक बार फिर संविदाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर विभाग की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि लाइनमैनों को न तो मानक के अनुरूप सुरक्षा दस्ताने मिलते हैं और न ही सेफ्टी बेल्ट।
तकनीकी टीम की चूक के कारण शटडाउन के बाद करंट आना सीधे तौर पर ‘क्रिमिनल नेग्लीजेन्स’ का मामला है। पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर पर जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
