अहार। जिंदगी के सफर में हमसफर बनकर साथ निभाने का वादा गांव पौटा बादशाहपुर निवासी एक बुजुर्ग दंपति ने मौत के दहलीज पर भी निभाया। शनिवार को जब पत्नी की सांसें थमी, तो पति का दिल भी यह जुदाई बर्दाश्त नहीं कर सका और कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने भी दम तोड़ दिया। रविवार को जब एक ही घर से दो अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। गंगा किनारे अवंतिका देवी श्मशान घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार कर उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
बुलंदशहर के अहार थाना क्षेत्र के गांव पौटा बादशाहपुर निवासी सुरेश चंद लोधी ने बताया कि शनिवार का दिन उनके परिवार के लिए काल बनकर आया। उनके पिता 70 वर्षीय बुजुर्ग सुखपाल सिंह लोधी गांव के राशन डीलर थे। उनके पिता सुखपाल सिंह अपनी पत्नी 65 वर्षीय होशियारी देवी के साथ सुखद जीवन व्यतीत कर रहे थे। मां होशियारी देवी पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं। शनिवार दोपहर करीब तीन बजे बीमारी के चलते उन्होंने अंतिम सांस ली। घर में कोहराम मच गया, परिजन और मोहल्ले के लोग शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने जुटने लगे। पत्नी के निधन की खबर ने सुखपाल सिंह को अंदर तक झकझोर दिया। जिस जीवनसंगिनी के साथ उन्होंने दशकों का सफर तय किया था, उसके बिछड़ने का गम वह सह नहीं पाए। पत्नी की मृत्यु के कुछ ही देर बाद अचानक सुखपाल सिंह की भी तबीयत बिगड़ी और उन्होंने भी प्राण त्याग दिए। रविवार दोपहर को बेहद गमगीन माहौल में दोनों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए अवंतिका देवी गंगा घाट ले जाया गया। गांव के लोगों का कहना था कि सुखपाल सिंह और उनकी पत्नी के बीच अटूट प्रेम था, जो मृत्यु के बाद भी नहीं टूटा। अवंतिका देवी श्मशान घाट पर जब दोनों की चिता को मुखाग्नि दी गई, तो वहां मौजूद हर शख्स की पलकें भीग गईं।