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Bulandshahar News: बेअसर नियामक आयोग की आपत्ति, जिले के उपभोक्ताओं को चुकाने पड़ रहे ईंधन अधिभार के 45 करोड़
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गाजियाबाद। विद्युत नियामक आयोग की आपत्ति बेअसर रही। मई माह के बिल में 10 फीसदी ईंधन अधिभार(फ्यूल सरचार्ज) जोड़कर उपभोक्ताओं को भेजा गया है। अब जिले के 11 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 45 करोड़ की राशि अतिरिक्त चुकानी पड़ रही है। हालांकि कुछ उपभोक्ताओं ने आपत्ति दर्ज कराते हुए मुख्य अभियंता के कार्यालय में शिकायत भी दर्ज कराई है। मुख्य अभियंता ने शिकायतीपत्र को मुख्यालय भेजने का आश्वासन दिया है।
जिले के तीनों जोन में घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक विधा के 11 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं से ऊर्जा निगम करीब 450 करोड़ की राशि हर महीने वसूलता है। मई के जो बिल जून के शुरूआत में उपभोक्ताओं को मिले हैं, उनमें 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क जोड़कर भेजा गया है। अब उपभोक्ताओं को 450 करोड़ की बजाय 495 करोड़ की राशि चुकानी पड़ रही है। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि जिस उपभोक्ता का बिल पहले दो हजार आ रहा था, वह अब बढ़कर 2200 हो गया है। उपभोक्ता बदन सिंह ने बताया कि पहले स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं को परेशान किया गया। उसमें फिर प्रीपेड सेवा शुरू की गई। अब सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली की जा रही है। यह किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उनका यह भी कहना है कि नियामक आयोग ने इस संबंध में ऊर्जा निगम को नोटिस जारी कर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी की जा रही है। इस बारे में जोन एक के मुख्य अभियंता पवन अग्रवाल ने बताया कि आने वाली शिकायतों को मुख्यालय भेजा गया है। सरचार्ज मुख्यालय स्तर से तय होता है।
-नंबर अपडेट नहीं, बिल मिलने में आ रही समस्या :
ऊर्जा निगम की ओर से ढाई लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर और साढ़े आठ लाख के करीब साधारण मीटर धारकों के बिल बनाकर भेज दिए गए हैं। हालांकि प्रीपेड व्यवस्था खत्म होने के बाद स्मार्ट मीटर धारकों के यहां इस बार मीटर रीडर नहीं पहुंचा है। उनके बिल कंप्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर भेजे गए हैं। वह अपने बिल चैटबॉट या यूपीपीसीएल की स्मार्ट मीटर एप के जरिये भी डाउनलोड कर सकते हैं, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत उन उपभोक्ताओं को आ रही है, जिनके मोबाइल नंबर अभी तक अपडेट नहीं है। इस बारे में मुख्य अभियंता पवन अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों को अभी तक भी बिल नहीं मिले हैं, उनसे अपील है कि वह अपने मोबाइल नंबर ऊर्जा निगम के स्थानीय कार्यालय में अपडेट करा लें।
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जिले के तीनों जोन में घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक विधा के 11 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं से ऊर्जा निगम करीब 450 करोड़ की राशि हर महीने वसूलता है। मई के जो बिल जून के शुरूआत में उपभोक्ताओं को मिले हैं, उनमें 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क जोड़कर भेजा गया है। अब उपभोक्ताओं को 450 करोड़ की बजाय 495 करोड़ की राशि चुकानी पड़ रही है। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि जिस उपभोक्ता का बिल पहले दो हजार आ रहा था, वह अब बढ़कर 2200 हो गया है। उपभोक्ता बदन सिंह ने बताया कि पहले स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं को परेशान किया गया। उसमें फिर प्रीपेड सेवा शुरू की गई। अब सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली की जा रही है। यह किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उनका यह भी कहना है कि नियामक आयोग ने इस संबंध में ऊर्जा निगम को नोटिस जारी कर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी की जा रही है। इस बारे में जोन एक के मुख्य अभियंता पवन अग्रवाल ने बताया कि आने वाली शिकायतों को मुख्यालय भेजा गया है। सरचार्ज मुख्यालय स्तर से तय होता है।
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-नंबर अपडेट नहीं, बिल मिलने में आ रही समस्या :
ऊर्जा निगम की ओर से ढाई लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर और साढ़े आठ लाख के करीब साधारण मीटर धारकों के बिल बनाकर भेज दिए गए हैं। हालांकि प्रीपेड व्यवस्था खत्म होने के बाद स्मार्ट मीटर धारकों के यहां इस बार मीटर रीडर नहीं पहुंचा है। उनके बिल कंप्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर भेजे गए हैं। वह अपने बिल चैटबॉट या यूपीपीसीएल की स्मार्ट मीटर एप के जरिये भी डाउनलोड कर सकते हैं, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत उन उपभोक्ताओं को आ रही है, जिनके मोबाइल नंबर अभी तक अपडेट नहीं है। इस बारे में मुख्य अभियंता पवन अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों को अभी तक भी बिल नहीं मिले हैं, उनसे अपील है कि वह अपने मोबाइल नंबर ऊर्जा निगम के स्थानीय कार्यालय में अपडेट करा लें।
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