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Bulandshahar News: अज्ञातों का हो गया अंतिम संस्कार, कटे हाथ-पैर मिलने के बाद भी नहीं तलाश पाई पुलिस
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साहिबाबाद। जिले में एक वर्ष में अज्ञात शवों के छह से अधिक मामले सामने आए हैं, लेकिन पुलिस न तो हत्या या मौत का कारण स्पष्ट कर पाई और न ही उनकी पहचान कर सकी। शिनाख्त न होने से पुलिस ने लावारिस में अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कर दिया और उनकी शिनाख्त की कार्रवाई पर भी विराम लगा दिया। दरअसल, टीएचए और ग्रामीण जोन में कई ऐसे अज्ञात शव मिले और अब पुलिस ने भी पहचान के प्रयास लगभग बंद कर दिए हैं। मृतकों की हत्या या मौत का कारण पता चलना भी जरूरी था, वह सभी राज पुलिस की फाइलों में दब गए हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों से अज्ञात शव बरामद हुए हैं। नालों, खाली प्लॉटों और रेलवे पटरियों से मिले इन शवों के मामले में पुलिस के हाथ निराशा ही लगी। जिन इलाकों में शव मिलता है वहां गुमशुदगी दर्ज नहीं होती और अगर मृतक कहीं दूसरे जिले या राज्य का हो तो शिनाख्त ही नहीं हो पाती तब मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को डीएनए प्रोफाइलिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।
जिपनेट से भी नहीं मिलती मदद
केंद्र सरकार ने गुमशुदा और अज्ञात शवों की पहचान के लिए जिपनेट (जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क) पोर्टल बनाया। इस पर जानकारी अपडेट होने का दावा किया जाता है, लेकिन कई राज्य अभी भी इससे जुड़े नहीं हैं। कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं कि जिपनेट पर जानकारी अपलोड होने के बावजूद न तो शिनाख्त हो पाती है और न ही मौत के राज से पर्दा उठ पाता है। शिनाख्त की इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जिस जिपनेट पोर्टल तैयार किया गया, लेकिन अब वह भी सवालों के घेरे में है।
केस-1
मोदीनगर के भोजपुर क्षेत्र स्थित गांव कलछीना के पास जनवरी 2026 में एक युवक का शव मिला था। शव को जानवर नोंच रहे थे। मृतक के सीने पर गोली के निशान थे और चेहरा जानवरों ने खा लिया था। सीने पर क्राउन का टैटू और उम्र करीब 30 वर्ष व अंग्रेजी में लिखा जेएस। पुलिस ने भी हत्या कर शव एक्सप्रेसवे किनारे फेंकने की आशंका जताई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छह गोली लगने की बात पुष्ट हुई, लेकिन आज तक इस हत्या का राज दफन है। यहां तक कि मृतक कौन था, कहां का रहने वाला था और उसकी हत्या क्यों की गई ऐसे तमाम सवाल आज भी बने हुए हैं।
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केस-2
12 जून को मसूरी के नाहल झाल में एक युवक का शव मिला। शुरुआत में उसकी शिनाख्त वैशाली निवासी गिरधर के तौर पर हुई और उसका अंतिम संस्कार भी करा दिया गया। कुछ दिन बाद पता चला कि गिरधर जीवित है और वह अपने घर लौट आए। अब जिस व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार किया गया वह कौन था इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है। पुलिस ने जिपनेट पोर्टल पर भी इसकी जानकारी अपलोड की है। अब तक शव की पहचान नहीं हो पाई है।
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केस-3
लिंकरोड थानाक्षेत्र में वर्ष 2025 में रेलवे ट्रैक पर एक युवक-युवती का क्षत-विछत शव मिला था। युवती के हाथ पर मेहंदी लगी थी और हाथ शव से कुछ दूरी पर पड़ा था। पुलिस ने कटा हाथ देखकर कुछ दूरी तक ट्रैक को खंगाला तब आगे जाकर दोनों के शव मिले। दोनों में से किसी की शिनाख्त नहीं हुई और न ही पहचान हो पाई। पुलिस के प्रयास भी अब थम चुके हैं। शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है।
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अज्ञात शवों की शिनाख्त के प्रयास लगातार जारी हैं। जिपनेट की पोर्टल की मदद से अधिकतर शिनाख्त करने में मदद मिलती है। जिले में जहां-जहां अज्ञात शव मिले हैं सभी की पहचान के लिए पुलिस काम कर रही है। जिन शवों की शिनाख्त नहीं हुई है, संबंधित थाना प्रभारियों को शिनाख्त कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।-- - धवल जायसवाल, डीसीपी सिटी व प्रभारी टीएचए
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जिपनेट से भी नहीं मिलती मदद
केंद्र सरकार ने गुमशुदा और अज्ञात शवों की पहचान के लिए जिपनेट (जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क) पोर्टल बनाया। इस पर जानकारी अपडेट होने का दावा किया जाता है, लेकिन कई राज्य अभी भी इससे जुड़े नहीं हैं। कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं कि जिपनेट पर जानकारी अपलोड होने के बावजूद न तो शिनाख्त हो पाती है और न ही मौत के राज से पर्दा उठ पाता है। शिनाख्त की इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जिस जिपनेट पोर्टल तैयार किया गया, लेकिन अब वह भी सवालों के घेरे में है।
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केस-1
मोदीनगर के भोजपुर क्षेत्र स्थित गांव कलछीना के पास जनवरी 2026 में एक युवक का शव मिला था। शव को जानवर नोंच रहे थे। मृतक के सीने पर गोली के निशान थे और चेहरा जानवरों ने खा लिया था। सीने पर क्राउन का टैटू और उम्र करीब 30 वर्ष व अंग्रेजी में लिखा जेएस। पुलिस ने भी हत्या कर शव एक्सप्रेसवे किनारे फेंकने की आशंका जताई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छह गोली लगने की बात पुष्ट हुई, लेकिन आज तक इस हत्या का राज दफन है। यहां तक कि मृतक कौन था, कहां का रहने वाला था और उसकी हत्या क्यों की गई ऐसे तमाम सवाल आज भी बने हुए हैं।
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केस-2
12 जून को मसूरी के नाहल झाल में एक युवक का शव मिला। शुरुआत में उसकी शिनाख्त वैशाली निवासी गिरधर के तौर पर हुई और उसका अंतिम संस्कार भी करा दिया गया। कुछ दिन बाद पता चला कि गिरधर जीवित है और वह अपने घर लौट आए। अब जिस व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार किया गया वह कौन था इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है। पुलिस ने जिपनेट पोर्टल पर भी इसकी जानकारी अपलोड की है। अब तक शव की पहचान नहीं हो पाई है।
केस-3
लिंकरोड थानाक्षेत्र में वर्ष 2025 में रेलवे ट्रैक पर एक युवक-युवती का क्षत-विछत शव मिला था। युवती के हाथ पर मेहंदी लगी थी और हाथ शव से कुछ दूरी पर पड़ा था। पुलिस ने कटा हाथ देखकर कुछ दूरी तक ट्रैक को खंगाला तब आगे जाकर दोनों के शव मिले। दोनों में से किसी की शिनाख्त नहीं हुई और न ही पहचान हो पाई। पुलिस के प्रयास भी अब थम चुके हैं। शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है।
अज्ञात शवों की शिनाख्त के प्रयास लगातार जारी हैं। जिपनेट की पोर्टल की मदद से अधिकतर शिनाख्त करने में मदद मिलती है। जिले में जहां-जहां अज्ञात शव मिले हैं सभी की पहचान के लिए पुलिस काम कर रही है। जिन शवों की शिनाख्त नहीं हुई है, संबंधित थाना प्रभारियों को शिनाख्त कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।