{"_id":"6a3abbf85af8645bc9087e6c","slug":"narrated-the-story-of-shri-krishnas-childhood-pastimes-and-govardhan-puja-bulandshahr-news-c-133-1-bul1002-157954-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: श्रीकृष्ण की बाल लीला व गोवर्धन पूजा की सुनाई कथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: श्रीकृष्ण की बाल लीला व गोवर्धन पूजा की सुनाई कथा
विज्ञापन
अहार में कथा सुनाते कथा वाचक। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अहार। रुक्मिणी बल्लभ वेद वेदांग संस्कृत महाविद्यालय परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में मंगलवार को बाल लीला और गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई गई। कथाव्यास स्वामी शिव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कृष्ण बाल लीला के वर्णन में माखन चोरी, ग्वाल-बालों के साथ खेल और गोवर्धन धारण की महिमा को विस्तार से सुनाया।
कहा कि भगवान की बाल लीलाएं भक्तों को सरलता, प्रेम और समर्पण का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने पूतना वध, शकटासुर वध, अघासुर वध सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि मनुष्य गोवर्धन पूजा कर ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा कर पुण्य कमा सकता है। ब्रज की 84 कोस परिक्रमा लगाने से मनुष्य का उद्धार होता है और 84 लाख योनियों से मुक्ति मिलती है।
बताया कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर देवराज इंद्र के अहंकार का नाश किया और भक्तों की रक्षा का संदेश दिया। कथा के दौरान लखीमपुर खीरी से पधारे यजमान मुन्ना लाल दीक्षित, प्रबंधक कमल शर्मा, महाविद्यालय के प्राचार्य तुलसी राम शर्मा व संजय भारद्वाज समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
कहा कि भगवान की बाल लीलाएं भक्तों को सरलता, प्रेम और समर्पण का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने पूतना वध, शकटासुर वध, अघासुर वध सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि मनुष्य गोवर्धन पूजा कर ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा कर पुण्य कमा सकता है। ब्रज की 84 कोस परिक्रमा लगाने से मनुष्य का उद्धार होता है और 84 लाख योनियों से मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बताया कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर देवराज इंद्र के अहंकार का नाश किया और भक्तों की रक्षा का संदेश दिया। कथा के दौरान लखीमपुर खीरी से पधारे यजमान मुन्ना लाल दीक्षित, प्रबंधक कमल शर्मा, महाविद्यालय के प्राचार्य तुलसी राम शर्मा व संजय भारद्वाज समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।