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नवरात्र: मां चंद्रघंटा की आराधना के लिए मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
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खुर्जा में श्री नव दुर्गा शक्ति मंदिर में माता के दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार। सं
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बुलंदशहर/औरंगाबाद/अहार/गुलावठी/शिकारपुर/अनूपशहर/डिबाई/स्याना/सलेमपुर/ऊंचागांव/बीबीनगर/नरौरा/खानपुर। चैत्र नवरात्र में देवी मंदिरों में भक्त मां के दरबार में फरियाद लगाने पहुंच रहे हैं। घरों में जहां दुर्गा सप्तशती पाठ से भगवती की आराधना हो रही है। वहीं, दर्शन-पूजन का क्रम भी जारी है। शनिवार को श्रद्धालुओं ने मां भगवती के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा की। इस दौरान जिले भर के मंदिरों में माता रानी के जयकारों के साथ घंटे घड़ियालों की गूंज रही।
नगर के राज राजेश्वर मंदिर, साठा देवी मंदिरी, सीताराम मंदिर, काली मंदिर, नर्वदेश्वर धाम मंदिर, खाटू श्याम मंदिर और शिव शक्ति मंदिर में दर्शन के लिए भीड़ उमड़ी। भक्त सुबह पांच बजे ही लाइन में लग गए थे। सुबह की आरती के बाद माता के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए।
इसी तरह अहार स्थित अवंतिका देवी, नरौरा क्षेत्र के गांव बेलोन स्थित सर्व मंगला भवानी मंदिर के अलावा शिकारपुर, जहांगीराबाद, अनूपशहर, ऊंचागांव, औरंगाबाद, स्याना, गुलावठी, बीबीनगर और डिबाई समेत सभी जगह माता रानी के जयकारों की गूंज रही। पं. कैलाश शर्मा ने बताया कि माता के माथे पर चमकते हुए चंद्रमा के कारण ही उनके तीसरे स्वरूप का नाम चंद्रघंटा पड़ा है। मां चंद्रघंटा शेरनी की सवारी करती हैं। माता का शरीर सोने के समान चमकता है। मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले सदैव तेज को प्राप्त होते हैं। वहीं, दूसरी ओर जगह-जगह संकीर्तन और कीर्तन का दौर जारी रहा।
रविवार को माता के चौथे स्वरूप कुष्मांडा की पूजा की जाती है, जिन्हें अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड उत्पन्न करने वाली अष्टभुजा देवी माना जाता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर, माता को मालपुए का भोग लगाकर, गेंदे के फूल अर्पित कर, ॐ कूष्मांडायै नमः मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और यश की प्राप्ति होती है।
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नगर के राज राजेश्वर मंदिर, साठा देवी मंदिरी, सीताराम मंदिर, काली मंदिर, नर्वदेश्वर धाम मंदिर, खाटू श्याम मंदिर और शिव शक्ति मंदिर में दर्शन के लिए भीड़ उमड़ी। भक्त सुबह पांच बजे ही लाइन में लग गए थे। सुबह की आरती के बाद माता के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए।
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इसी तरह अहार स्थित अवंतिका देवी, नरौरा क्षेत्र के गांव बेलोन स्थित सर्व मंगला भवानी मंदिर के अलावा शिकारपुर, जहांगीराबाद, अनूपशहर, ऊंचागांव, औरंगाबाद, स्याना, गुलावठी, बीबीनगर और डिबाई समेत सभी जगह माता रानी के जयकारों की गूंज रही। पं. कैलाश शर्मा ने बताया कि माता के माथे पर चमकते हुए चंद्रमा के कारण ही उनके तीसरे स्वरूप का नाम चंद्रघंटा पड़ा है। मां चंद्रघंटा शेरनी की सवारी करती हैं। माता का शरीर सोने के समान चमकता है। मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले सदैव तेज को प्राप्त होते हैं। वहीं, दूसरी ओर जगह-जगह संकीर्तन और कीर्तन का दौर जारी रहा।
रविवार को माता के चौथे स्वरूप कुष्मांडा की पूजा की जाती है, जिन्हें अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड उत्पन्न करने वाली अष्टभुजा देवी माना जाता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर, माता को मालपुए का भोग लगाकर, गेंदे के फूल अर्पित कर, ॐ कूष्मांडायै नमः मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और यश की प्राप्ति होती है।
