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Bulandshahar News: स्टांप चोरी का भंडाफोड़.. 57 मामलों में 1.91 करोड़ का राजस्व फटका
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बुलंदशहर। जनपद में संपतियों के बैनामों में खेल कर राजस्व को चूना लगाने वालों पर प्रशासन का डंडा चला है। जिलाधिकारी और निबंधन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण में स्टांप चोरी के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। फरवरी में हुई जांच की रिपोर्ट के अनुसार, जिले की विभिन्न तहसीलों में कुल 57 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें तथ्यों को छिपाकर या सर्किल रेट का उल्लंघन कर करीब एक करोड़ 91 लाख 83 हजार 95 रुपये की स्टांप चोरी की गई है।
सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने बताया है कि आरोपियों से न केवल बकाया शुल्क वसूला जाएगा, बल्कि भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्टांप चोरी के सबसे अधिक मामले औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र रहे सदर और सिकंदराबाद तहसील में पाए गए हैं। सदर तहसील के दो उपनिबंधक कार्यालयों के अंतर्गत 20 मामले पकड़े गए, जबकि सिकंदराबाद में 13 मामलों में हेराफेरी की पुष्टि हुई है।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई बैनामों में भूमि की प्रकृति को छिपाया गया था। उदाहरण के तौर पर, व्यावसायिक उपयोग वाली जमीन को कृषि योग्य दिखाकर कम स्टांप शुल्क चुकाया गया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर जब पैमाइश की और आसपास के निर्माण को देखा, तो दस्तावेज में दर्ज विवरण और जमीनी हकीकत में अंतर मिला।
तहसीलवार आंकड़े..
तहसील स्टांप चोरी के मामले
सदर 20
सिकंदराबाद 13
खुर्जा 08
डिबाई 06
स्याना 04
अनूपशहर 03
शिकारपुर 03
कुल मामले 57
495 मामलों के निस्तारण से आए 9.25 करोड़
प्रशासन केवल नई चोरी पकड़ने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुराने लंबित मामलों के निस्तारण में भी तेजी दिखाई गई है। सहायक महानिरीक्षक निबंधन संत कुमार रावत ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच विभाग ने कुल 495 पुराने मामलों का निस्तारण किया है। इन मामलों के माध्यम से विभाग ने कुल 9,25,33,857 करोड़ रुपये की वसूली की है। इस न्यायिक प्रक्रिया में प्रशासनिक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निस्तारित किए गए 495 वादों में से 69 का फैसला खुद जिलाधिकारी ने किया, जबकि 206 मामलों का निस्तारण एडीएम वित्त द्वारा किया गया। शेष मामलों का निपटारा सहायक महानिरीक्षक निबंधन स्तर पर हुआ।
क्यों और कैसे होती है स्टांप चोरी?
जानकारों की मानें तो स्टांप चोरी का मुख्य कारण संपत्तियों का मूल्यांकन कम दिखाना है। कई बार खरीदार और विक्रेता मिलीभगत कर आवासीय प्लॉट को कृषि भूमि दर्शा देते हैं। इसके अलावा, सड़क से दूरी और आबादी क्षेत्र जैसे कारकों को कागजों पर बदलकर स्टांप की बचत करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, शासन के निर्देश पर अब रैंडम स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे ऐसी गड़बड़ियां आसानी से पकड़ में आ रही हैं।
इन्होंने कहा..
सहायक महानिरीक्षक निबंधन संत कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा, राजस्व की क्षति किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन 57 मामलों में चोरी पकड़ी गई है, उनके खिलाफ संबंधित अदालतों में वाद दायर किए जा रहे हैं। नोटिस जारी कर जल्द ही वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने बताया है कि आरोपियों से न केवल बकाया शुल्क वसूला जाएगा, बल्कि भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्टांप चोरी के सबसे अधिक मामले औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र रहे सदर और सिकंदराबाद तहसील में पाए गए हैं। सदर तहसील के दो उपनिबंधक कार्यालयों के अंतर्गत 20 मामले पकड़े गए, जबकि सिकंदराबाद में 13 मामलों में हेराफेरी की पुष्टि हुई है।
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निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई बैनामों में भूमि की प्रकृति को छिपाया गया था। उदाहरण के तौर पर, व्यावसायिक उपयोग वाली जमीन को कृषि योग्य दिखाकर कम स्टांप शुल्क चुकाया गया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर जब पैमाइश की और आसपास के निर्माण को देखा, तो दस्तावेज में दर्ज विवरण और जमीनी हकीकत में अंतर मिला।
तहसीलवार आंकड़े..
तहसील स्टांप चोरी के मामले
सदर 20
सिकंदराबाद 13
खुर्जा 08
डिबाई 06
स्याना 04
अनूपशहर 03
शिकारपुर 03
कुल मामले 57
495 मामलों के निस्तारण से आए 9.25 करोड़
प्रशासन केवल नई चोरी पकड़ने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुराने लंबित मामलों के निस्तारण में भी तेजी दिखाई गई है। सहायक महानिरीक्षक निबंधन संत कुमार रावत ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच विभाग ने कुल 495 पुराने मामलों का निस्तारण किया है। इन मामलों के माध्यम से विभाग ने कुल 9,25,33,857 करोड़ रुपये की वसूली की है। इस न्यायिक प्रक्रिया में प्रशासनिक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निस्तारित किए गए 495 वादों में से 69 का फैसला खुद जिलाधिकारी ने किया, जबकि 206 मामलों का निस्तारण एडीएम वित्त द्वारा किया गया। शेष मामलों का निपटारा सहायक महानिरीक्षक निबंधन स्तर पर हुआ।
क्यों और कैसे होती है स्टांप चोरी?
जानकारों की मानें तो स्टांप चोरी का मुख्य कारण संपत्तियों का मूल्यांकन कम दिखाना है। कई बार खरीदार और विक्रेता मिलीभगत कर आवासीय प्लॉट को कृषि भूमि दर्शा देते हैं। इसके अलावा, सड़क से दूरी और आबादी क्षेत्र जैसे कारकों को कागजों पर बदलकर स्टांप की बचत करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, शासन के निर्देश पर अब रैंडम स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे ऐसी गड़बड़ियां आसानी से पकड़ में आ रही हैं।
इन्होंने कहा..
सहायक महानिरीक्षक निबंधन संत कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा, राजस्व की क्षति किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन 57 मामलों में चोरी पकड़ी गई है, उनके खिलाफ संबंधित अदालतों में वाद दायर किए जा रहे हैं। नोटिस जारी कर जल्द ही वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
