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Chandauli News: घाट की पूजा कर बखीर का लगाया भोग

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 02:07 AM IST
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After worshipping the ghat, Bakhir was offered as an offering.
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पीडीडीयू नगर। सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन सोमवार को व्रतियों ने निराजल व्रत रहकर शाम को सरोवर तटों पर पहुंच कर घाट पूजा की और दीपदान किया। बाद में घर पहुंच कर दूध, गुड़ और चावल की बखीर तैयार की। चंद्रदर्शन के बाद छठी मइया की पूजा अर्चना की। इसके बाद जल ग्रहण किया। इसके साथ 36 घंटे के उपवास की शुरूआत की।
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चार दिवसीय छठ की शुरूआत रविवार को हुई थी। पहले दिन लौकी भात के साथ नहाय खाय कर लोगों ने व्रत का संकल्प लिया। दूसरे दिन व्रतियों ने निराजल व्रत किया। घरों में भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए पकवान आदि तैयार किए। शाम के वक्त व्रती सरोवर तटों पर पहुंचे और वहां वेदी तैयार की और घाट की पूजा अर्चना की। व्रती महिलाओं ने दीपदान किया। नगर के दामोदरदास पोखरा, मालगोदाम और मानसनगर स्थित मानसरोवर तालाब सहित अन्य सरोवर तटों पर घाट पूजा करने महिलाएं पहुंची। इस दौरान घाट छठी मइया के गीतों से गुलजार रहे। पूजा के बाद घर वापस पहुंच कर व्रतियों ने नई ईट के चूल्हे तैयार किए और आम की लकड़ी पर दूध, गुड़ और चावल की बखीर तैयार की। सूर्य की पूजा कर इसके बाद बखीर का भोग लगाया। बाद में प्रसाद स्वरूप सभी ने इसे ग्रहण किया। चंद्र दर्शन के बाद जल ग्रहण किया। इसके बाद 36 घंटे के व्रत की शुरूआत की। मंगलवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगें और बुधवार की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। वहीं जिन घरों में छठ पूजा हो रही है। वहां छठी मइया के गीत से माहौल भक्ति मय बना हुआ है।
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