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पहले द्रोणाचार्य कटवाते थे अंगूठा, अब छात्रों के नंबर काटे जा रहे हैं : छोटेलाल
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रॉबर्ट्सगंज के सपा सांसद छोटेलाल खरवार।
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राॅबटर्सगंज के सपा सांसद छोटेलाल खरवार ने पेपर लीक और आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। फेसबुक पोस्ट में उन्होंने महाभारत के एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य के प्रसंग का जिक्र करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। सांसद ने पोस्ट में लिखा है कि पहले द्रोणाचार्य अंगूठा कटवाते थे, अब अंगूठा नहीं काटते... सीधे छात्रों का नंबर काटते हैं।
सांसद की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। कटऑफ के नाम पर अवसर सीमित किए जा रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सांसद की मांग है कि 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा से कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अति गरीब परिवारों की पहचान के लिए पारदर्शी आर्थिक एवं सामाजिक सर्वे कराया जाए। सर्वे में सबसे अधिक पिछड़े और गरीब पाए जाने वाले परिवारों को मौजूदा आरक्षण से अलग 10 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण देने की व्यवस्था की जाए। सांसद ने पोस्ट में केंद्र सरकार पर संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों पर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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सांसद की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। कटऑफ के नाम पर अवसर सीमित किए जा रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सांसद की मांग है कि 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा से कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अति गरीब परिवारों की पहचान के लिए पारदर्शी आर्थिक एवं सामाजिक सर्वे कराया जाए। सर्वे में सबसे अधिक पिछड़े और गरीब पाए जाने वाले परिवारों को मौजूदा आरक्षण से अलग 10 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण देने की व्यवस्था की जाए। सांसद ने पोस्ट में केंद्र सरकार पर संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों पर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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