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राजदरी में गूंज रही कजरी: लोकसंगीत साधना में जुटे कलाकार, मालिनी अवस्थी बोलीं- यहां की वादियों से है मेरा लगाव

Mon, 27 Jul 2026 10:44 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली।
अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 27 Jul 2026 10:44 AM IST
सार

Chandauli News: चंदौली के राजदरी में चार दिवसीय कजरी कार्यशाला के दौरान प्रकृति की गोद में लोकसंगीत की साधना जारी है। देश-विदेश के 70 से अधिक प्रतिभागी प्रशिक्षण ले रहे हैं। लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि राजदरी की वादियों से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव है और यहां का वातावरण साधना के लिए बेहद प्रेरक है।

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Kajri workshop underway amidst nature over 70 practitioners from India and abroad undergoing training
युवाओं को प्रशिक्षण देतीं मालिनी अवस्थी। - फोटो : संवाद

विस्तार

प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित राजदरी क्षेत्र में पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी की संस्था सोन चिरैया के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय कजरी कार्यशाला का दूसरा दिन रविवार को उत्साह, उमंग और लोकसंगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच संपन्न हुआ। औरवाटांड जलप्रपात के निकट आयोजित कार्यशाला में देश-विदेश से आए करीब 70 से 75 साधक लोकगायन की बारीकियां सीख रहे हैं।

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कार्यशाला में भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों सहित लोकसंगीत के अनेक साधक प्रतिभाग कर रहे हैं। प्राकृतिक वातावरण में संगीत साधना का यह अनूठा आयोजन प्रतिभागियों को नई ऊर्जा और सीख प्रदान कर रहा है। पिछले वर्ष मिली शानदार सफलता के बाद इस बार भी कार्यशाला को लेकर कलाकारों और संगीत प्रेमियों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

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इस अवसर पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने राजदरी की प्राकृतिक छटा की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि राजदरी की हरी-भरी वादियां और यहां का प्राकृतिक वातावरण मुझे हमेशा अपनी ओर आकर्षित करता है। प्रकृति की गोद में गूंजते लोकगीत कलाकारों को एक अलग ही ऊर्जा और आत्मिक आनंद देते हैं।

जलप्रपात की कल-कल ध्वनि और घने जंगलों के बीच गूंजती कजरी की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। प्रतिभागियों और स्थानीय ग्रामीणों ने इस आयोजन को लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में भी कार्यशाला में कजरी गायन के विभिन्न स्वरूपों और पारंपरिक शैलियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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