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Chandauli News: भंवरवा के तोहरा संग जाई गीत पर झूमे श्रोता
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चेतना सांस्कृतिक मंच की ओर से नगर के सुभाष पार्क में आयोजित आत्ममंथन निर्गुण भजन संध्या में श्रोताओं ने आत्मचिंतन और भक्ति रस का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान लोग स्वयं को खोजने और आध्यात्मिक भाव में डूबते नजर आए।
वाराणसी से आए गायक मदन राय ने जब भंवरवा के तोहरा संग जाई गीत प्रस्तुत किया तो श्रोता पूरी तरह उसमें खो गए। इसके अलावा अन्य कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक निर्गुण गीतों की प्रस्तुति देकर लोगों को अध्यात्म से जोड़ने का प्रयास किया।
कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक कबीर मठ, मूलगादी वाराणसी के उत्तराधिकारी प्रमोद दास महाराज ने कहा कि निर्गुण भक्ति मनुष्य को बाहरी आडंबरों से मुक्त कर आत्मा के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराती है।
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उन्होंने संत कबीर की शिक्षाओं को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक रमेश जायसवाल ने कहा कि संतों की वाणी समाज को जोड़ने, मानवता का संदेश देने तथा आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गीत-संगीत की कड़ी में स्थानीय कलाकार विजय शर्मा ‘राही’ ने निर्गुण गीतों की प्रस्तुति देकर लोगों को भाव-विभोर किया। वहीं पीयूष मिश्रा, ताहिर वारसी और प्रमोद अग्रहरी ने कबीर और रहीम के दोहों का पाठ कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी।
पीयूष मिश्रा ने लागा चुनरी में दाग सुनाया, जबकि ताहिर वारसी ने उगता सूरज ढल जाएगा गीत प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। वाराणसी से आई अंशिका सिंह ने निर्गुण गीत की आलाप ली, जिससे श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं। इसके बाद मंच संभाला वाराणसी के मदन राय ने। उन्होंने कौना खोतवा में हेरइलू अइहो बालम चिड़ई गीत से शुरुआत की।
वाराणसी से आए गायक मदन राय ने जब भंवरवा के तोहरा संग जाई गीत प्रस्तुत किया तो श्रोता पूरी तरह उसमें खो गए। इसके अलावा अन्य कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक निर्गुण गीतों की प्रस्तुति देकर लोगों को अध्यात्म से जोड़ने का प्रयास किया।
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कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक कबीर मठ, मूलगादी वाराणसी के उत्तराधिकारी प्रमोद दास महाराज ने कहा कि निर्गुण भक्ति मनुष्य को बाहरी आडंबरों से मुक्त कर आत्मा के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराती है।
उन्होंने संत कबीर की शिक्षाओं को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक रमेश जायसवाल ने कहा कि संतों की वाणी समाज को जोड़ने, मानवता का संदेश देने तथा आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गीत-संगीत की कड़ी में स्थानीय कलाकार विजय शर्मा ‘राही’ ने निर्गुण गीतों की प्रस्तुति देकर लोगों को भाव-विभोर किया। वहीं पीयूष मिश्रा, ताहिर वारसी और प्रमोद अग्रहरी ने कबीर और रहीम के दोहों का पाठ कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी।
पीयूष मिश्रा ने लागा चुनरी में दाग सुनाया, जबकि ताहिर वारसी ने उगता सूरज ढल जाएगा गीत प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। वाराणसी से आई अंशिका सिंह ने निर्गुण गीत की आलाप ली, जिससे श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं। इसके बाद मंच संभाला वाराणसी के मदन राय ने। उन्होंने कौना खोतवा में हेरइलू अइहो बालम चिड़ई गीत से शुरुआत की।