भूमि पैमाइश की अधिक सटीक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने की दिशा में राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब भूमि पैमाइश के लिए जरीब से नहीं ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम रोवर से होगा। इससे तीन दिन का काम एक घंटे में संभव होगा। इस सैटेलाइट से तीन सेंटीमीटर तक सटीकता के साथ भूमि का सीमांकन हो सकेगा। तहसीलों पर कार्यशालाएं आयोजित कर प्रशिक्षण दिया जा चुका है और पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। उपकरण के संचालन के लिए आईडी पासवर्ड जनरेट करने के लिए मुख्यालय भेज दिया गया है। इसमें रोवर के संचालन, उपयोग और सटीक भूमि सीमांकन की नई तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। त्रुटिरहित पैमाइश के लिए राजस्व परिषद द्वारा प्रत्येक तहसील को एक-एक रोवर और अन्य सहवर्ती उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। संचालन के पहले एक तहसील में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, एक राजस्व निरीक्षक और दो लेखपालों की टीम गठित कर प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी दिनेश ने बताया कि जीएनएसएस रोवर का प्रयोग सैटेलाइट से मिले निर्देशांक के माध्यम से किए जाने के कारण एक विशेष बिंदु से अन्य बिंदुओं के मध्य दूरी और कोण का सटीक आकलन संभव होगा। सीमांकन से पहले प्रचलित विधि जरीब के माध्यम से पैमाइश में यह देखने में आता है कि भूमि के ऊपर-नीचे होने की दशा में एक बिंदु विशेष से अन्य बिंदु के मध्य दूरी के आकलन में त्रुटि हो जाती है। रोवर पूरी तरह सैटेलाइट आधारित होने के कारण इसमें गलती की गुंजाइश न के बराबर है। रोवर तकनीक के इस्तेमाल के दौरान यदि कोई तकनीकी, विधिक (कानूनी) या प्रशासनिक समस्या आती है, तो राज्य सरकार के पास नियमों, शर्तों और प्रक्रियाओं में संशोधन या बदलाव करने का पूरा अधिकार सुरक्षित होगा।