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पीडीडीयू जंक्शन : सुंदर तो है पर सुरक्षित नहीं

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:09 AM IST
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Puducherry Junction: Beautiful but not safe
पीडीडीयू रेलवे स्टेशन। संवाद - फोटो : Samvad
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रखरखाव और सुंदरीकरण पर खर्च करते हैं हर साल करोड़ों रुपये, पर आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं
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कृष्ण मुरारी मिश्र
पीडीडीयू नगर। हावड़ा दिल्ली रूट पर अति व्यस्त पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के सुंदरीकरण और रखरखाव पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। आग लगने की स्थिति में अग्नि शमन उपकरण के नाम पर फायर बॉल और फायर इंस्टीग्यूशर का सहारा लिया जाता है। दमकल वाहन को आग बुझाने के लिए पानी की व्यवस्था करने वाला वाटर हायरड्रेंट एक भी नहीं है।
यही नहीं स्टेशन के अलावा डीआरएम ऑफिस में भी आग पर नियंत्रण की व्यवस्था नहीं है। तीन महीने पहले अग्निशमन विभाग ने रेलवे स्टेशन और कार्यालयों का निरीक्षण करने के बाद इंतजाम की नाकाफी के लिए अधिकारियों को नोटिस दिया था। लेकिन आज तक अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से रोजाना 110 जोड़ी से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। रोजाना 25 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इसी तरह डीआरएम ऑफिस में 1000 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी हैं। इसके अलावा कैरेज एंड वैगन केयर सेंटर, रेलवे यार्ड में भी इंतजाम नहीं है। अग्निशमन विभाग पीडीडीयू जंक्शन और डीआरएम ऑफिस को व्यावसायिक भवन मानता है। गर्मी की शुरुआत हो चुकी है। यह स्थिति तब है जब हर वर्ष पीडीडीयू जंक्शन पर आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं।
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कोट
रेलवे स्टेशन और डीआरएम ऑफिस में आग से बचाव के पर्याप्त उपाय किए गए हैं। यही नहीं लगातार फायर बिग्रेड के साथ मिलकर आग बुझाने का प्रशिक्षण भी रेलकर्मियों को दिलाया जाता है।
विश्वनाथ,मंडल जनसंपर्क अधिकारी
इनसेट
क्या-क्या होनी चाहिए व्यवस्था
अग्निशमन विभाग के अनुसार यहां फायर अलार्म, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर, पर्याप्त मात्रा में अग्नि शमन यंत्र, हौज पाइप, पानी सप्लाई के लिए लगने वाले फ्लेंच की व्यवस्था होनी चाहिए। पर्याप्त फायर बॉल चाहिए।
केस-1

30 नवंबर 2025: पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर स्थित फूड प्लाजा में रात 10 बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। विभागीय कर्मचारी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया। इस घटना में हजारों रुपये मूल्य का सामान नष्ट हो गया था।



केस- 02

25 अप्रैल 2025: मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर पर सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए बने शेड में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। लपटें इतनी तेजी से फैलीं और आरपीएफ कमांडेंट कार्यालय तथा अकाउंट सेक्शन तक पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने एक घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। कंप्यूटर, एसी और फर्नीचर जल गया।



केस-3

04 दिसंबर 2025 : रेलवे के डीजल शेड के समीप रखे इंजन के कचरे में दोपहर आग लग गई। उठ रही लपटों के धुएं को उठता देख आसपास के रेलकर्मियों में अफरा तफरी मच गई। फायर ब्रिगेड के जवान घंटों प्रयास के बाद आग पर काबू पाये।

इनसेट-
कोयला लदी मालगाड़ी में आग लगने पर हाईड्रेंट बनता है सहारा
कोयला लदी मालगाड़ी में अक्सर गर्मी के दिनों में आग लग जाती है। रेलवे स्टेशन पर आग लगने पर ट्रेनों में पानी भरने के लिए प्लेटफॉर्म पर लगाए गए वाटर हाइड्रेंट से आग बुझाई जाती है।


कोट-
रेलवे स्टेशन पर पर्याप्त अग्नि शमन यंत्र की उपलब्धता के लिए रेलवे से लगातार पत्राचार किया जाता है। यही नहीं लगातार रेलकर्मियों को अग्नि शमन के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
अमित राय, प्रभारी अग्नि शमन अधिकारी
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