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Chandauli News: आज खत्म होगा पुरुषोत्तम माह, 19 से बजेगी शहनाई
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कंदवा। आगामी 15 जून सोमवती अमावस्या को पुरुषोत्तम मास समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही सहालग की चहल-पहल बढ़ जाएगी। 19 जून से वैवाहिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। इसके अगले 17 दिनों तक मांगलिक कार्यक्रम होंगे।
बहोरा चंदेल निवासी पं. राधेश्याम चौबे ने बताया कि 16 जून से चार जुलाई तक सहालग के मुहूर्त हैं। इसके बाद 25 जुलाई से चतुर्मास शुरू होने की वजह से आगामी चार महीने तक कोई शुभ कार्य नहीं होंगे। पुरुषोत्तम मास 15 जून को सोमवती अमावस्या को समाप्त हो रहा है। पुरुषोत्तम मास में शुभ कार्य वर्जित थे लेकिन इस माह की समाप्ति के बाद शुभ कार्य प्रारंभ होंगे। बताया कि विवाह का पहला मुहूर्त 19 जून को है। जून में 10 और जुलाई में सात मुहूर्त हैं। 25 जुलाई से चतुर्मास शुरू हो रहा है। इसमें चार माह के लिए श्रीहरि योग निद्रा में चले जाते हैं। इस वजह से चार महीने तक शुभ कार्य नहीं होंगे।
चतुर्मास शुरू होने से पहले जुलाई में कुल सात लग्न मुहूर्त पड़ रहे। इस प्रकार पुरुषोत्तम माह की समाप्ति और चतुर्मास के बीच कुल 17 शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं। यह भी बताया कि ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम माह) की अमावस्या रविवार को सुबह 11:14 बजे ही लग रही है लेकिन उदया तिथि के कारण अमावस्या सोमवार को मानी जाएगी। रोहिणी धृति योग, मृगशिरा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग सोमवती अमावस्या को शुभता से परिपूर्ण कर रहे हैं।
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बहोरा चंदेल निवासी पं. राधेश्याम चौबे ने बताया कि 16 जून से चार जुलाई तक सहालग के मुहूर्त हैं। इसके बाद 25 जुलाई से चतुर्मास शुरू होने की वजह से आगामी चार महीने तक कोई शुभ कार्य नहीं होंगे। पुरुषोत्तम मास 15 जून को सोमवती अमावस्या को समाप्त हो रहा है। पुरुषोत्तम मास में शुभ कार्य वर्जित थे लेकिन इस माह की समाप्ति के बाद शुभ कार्य प्रारंभ होंगे। बताया कि विवाह का पहला मुहूर्त 19 जून को है। जून में 10 और जुलाई में सात मुहूर्त हैं। 25 जुलाई से चतुर्मास शुरू हो रहा है। इसमें चार माह के लिए श्रीहरि योग निद्रा में चले जाते हैं। इस वजह से चार महीने तक शुभ कार्य नहीं होंगे।
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चतुर्मास शुरू होने से पहले जुलाई में कुल सात लग्न मुहूर्त पड़ रहे। इस प्रकार पुरुषोत्तम माह की समाप्ति और चतुर्मास के बीच कुल 17 शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं। यह भी बताया कि ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम माह) की अमावस्या रविवार को सुबह 11:14 बजे ही लग रही है लेकिन उदया तिथि के कारण अमावस्या सोमवार को मानी जाएगी। रोहिणी धृति योग, मृगशिरा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग सोमवती अमावस्या को शुभता से परिपूर्ण कर रहे हैं।