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Chandauli News: मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से कम होती है उत्पादन लागत

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2026 01:38 AM IST
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Using fertilizers based on soil testing reduces production costs.
धानापुर के अवहीं में कृषक जागरूकता कार्यक्रम में बोलते डॉ. नरेंद्र सिंह रघुवंशी। स्रोत:-जागरूक 
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चंदौली। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या की ओर से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली के तत्वावधान में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत उर्वरकों के संतुलित उपयोग विषय पर कृषक जागरूकता कार्यक्रम ग्राम अवही, विकास खंड धानापुर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह रघुवंशी ने की। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य को सुरक्षित और बेहतर बनाए रखने के लिए ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन, जैविक पदार्थों का प्रयोग और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को अपनाने से फसल उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व और उसकी वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से उत्पादन लागत कम होती है और भूमि की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही उन्होंने किसानों को मृदा नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि भी विस्तार से समझाई। वहीं वैज्ञानिक डॉ. अभयदीप गौतम ने खरीफ मौसम की प्रमुख फसल धान के उन्नत नर्सरी प्रबंधन, क्षेत्र के लिए उपयुक्त उन्नत एवं प्रमाणित धान प्रजातियों और गुणवत्ता युक्त टैग वाले बीजों के चयन और उपयोग के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को समय से नर्सरी तैयार करने और स्वस्थ पौध तैयार करने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की कृषि संबंधी विभिन्न समस्याओं का समाधान भी किया गया। साथ ही कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और नई कृषि तकनीकों की जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर ग्राम अवही और आसपास के क्षेत्रों से आए 110 पुरुष एवं महिला कृषकों ने सहभागिता की। अंत में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से सभी किसानों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें वैज्ञानिक खेती अपनाकर मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया।
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