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Chandauli News: जंगलों में जगह-जगह बनाए गए वाटर होल
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भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच वन विभाग ने चंद्रप्रभा, नौगढ़ और चकिया क्षेत्र के जंगलों में वन्यजीवों के लिए विशेष व्यवस्था की है। जंगलों में जगह-जगह बनाए गए वाटर होल (जल टैंक) में नियमित रूप से टैंकरों के माध्यम से पानी भरा जा रहा है, ताकि जंगली जानवरों को पानी के लिए गांवों की ओर न जाना पड़े।
वन विभाग के अनुसार चंद्रप्रभा अभयारण्य क्षेत्र में 12 से अधिक वाटर टैंक स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा नौगढ़ और चकिया रेंज में भी जलस्रोतों को सक्रिय रखा गया है। इन टैंकों में हर तीन से चार दिन के अंतराल पर पानी भरवाया जा रहा है। यह व्यवस्था जून माह अथवा मानसून शुरू होने तक जारी रहेगी। खरगोश, जंगली बिल्ली, सियार और अन्य छोटे वन्यजीव इन कृत्रिम जलस्रोतों तक पहुंचकर आसानी से पानी पी रहे हैं।
ट्रैक कैमरों से हो रही गणना
चंद्रप्रभा, चकिया और नौगढ़ के जंगलों में कई स्थानों पर ट्रैक कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से वन्यजीवों की संख्या और उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया जा रहा है। विभाग ने बताया कि गणना की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र जारी की जाएगी।
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जंगल की आग और गर्मी से खतरा
भीषण गर्मी और जंगल में आग लगने की घटनाएं छोटे जीव-जंतुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा होती हैं। हालांकि इस वर्ष अब तक बड़ी आग की घटनाएं सामने नहीं आई हैं, जिससे वन विभाग को राहत मिली है। इसके बावजूद निगरानी और सतर्कता लगातार जारी है।
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कोट-- -- -- -- -- --
गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वाटर होल में नियमित रूप से पानी भरवाया जा रहा है, ताकि वन्यजीव सुरक्षित रहें और गांवों की ओर उनका रुख कम हो।-- -- -- बी. शिवशंकर, प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ), चंदौली
वन विभाग के अनुसार चंद्रप्रभा अभयारण्य क्षेत्र में 12 से अधिक वाटर टैंक स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा नौगढ़ और चकिया रेंज में भी जलस्रोतों को सक्रिय रखा गया है। इन टैंकों में हर तीन से चार दिन के अंतराल पर पानी भरवाया जा रहा है। यह व्यवस्था जून माह अथवा मानसून शुरू होने तक जारी रहेगी। खरगोश, जंगली बिल्ली, सियार और अन्य छोटे वन्यजीव इन कृत्रिम जलस्रोतों तक पहुंचकर आसानी से पानी पी रहे हैं।
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ट्रैक कैमरों से हो रही गणना
चंद्रप्रभा, चकिया और नौगढ़ के जंगलों में कई स्थानों पर ट्रैक कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से वन्यजीवों की संख्या और उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया जा रहा है। विभाग ने बताया कि गणना की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र जारी की जाएगी।
जंगल की आग और गर्मी से खतरा
भीषण गर्मी और जंगल में आग लगने की घटनाएं छोटे जीव-जंतुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा होती हैं। हालांकि इस वर्ष अब तक बड़ी आग की घटनाएं सामने नहीं आई हैं, जिससे वन विभाग को राहत मिली है। इसके बावजूद निगरानी और सतर्कता लगातार जारी है।
कोट
गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वाटर होल में नियमित रूप से पानी भरवाया जा रहा है, ताकि वन्यजीव सुरक्षित रहें और गांवों की ओर उनका रुख कम हो।