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Chitrakoot News: अब शुरू न होे सकी 12 साल पहले बनीं 15 मंडियां
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चित्रकूट। जिले में वर्ष 2014-15 में बनी 15 कृषि मंडियां आज तक शुरू नहीं हो सकी हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी ये मंडियां अब खंडहर में बदल रही हैं। बुंदेलखंड पैकेज के तहत इनका निर्माण किसानों को गांव के पास फसल बेचने के लिए हुआ था।
किसान अब भी जिला मुख्यालय या शिवरामपुर मंडी जाने के लिए मजबूर हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त परिवहन और मजदूरी का खर्च उठाना पड़ता है। उनका कीमती समय भी बर्बाद होता है। बुंदेलखंड पैकेज की घोषणा 2009 में हुई थी। इसके तहत उत्तर प्रदेश के सात जिलों में कुल 138 मंडियां बनी थीं। चित्रकूट में घुरेटनपुर, खोही, रामनगर सहित 15 स्थानों पर ये मंडियां बनाई गईं। उपयोग के अभाव में ये भवन जर्जर हो रहे हैं। कुछ स्थानों पर इनका उपयोग पशुओं को बांधने या अस्थायी गोदाम के रूप में हो रहा है।
इटखरी निवासी किसान रामदयाल ने बताया कि गांव में मंडी बनने के बावजूद कोई लाभ नहीं मिल रहा। फसल बेचने के लिए उन्हें करीब 15 किलोमीटर दूर शिवरामपुर मंडी जाना पड़ता है। इससे भाड़ा और मजदूरी दोनों का खर्च बढ़ जाता है। यदि गांव की मंडी चालू हो जाए तो किसानों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।
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किसान अब भी जिला मुख्यालय या शिवरामपुर मंडी जाने के लिए मजबूर हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त परिवहन और मजदूरी का खर्च उठाना पड़ता है। उनका कीमती समय भी बर्बाद होता है। बुंदेलखंड पैकेज की घोषणा 2009 में हुई थी। इसके तहत उत्तर प्रदेश के सात जिलों में कुल 138 मंडियां बनी थीं। चित्रकूट में घुरेटनपुर, खोही, रामनगर सहित 15 स्थानों पर ये मंडियां बनाई गईं। उपयोग के अभाव में ये भवन जर्जर हो रहे हैं। कुछ स्थानों पर इनका उपयोग पशुओं को बांधने या अस्थायी गोदाम के रूप में हो रहा है।
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इटखरी निवासी किसान रामदयाल ने बताया कि गांव में मंडी बनने के बावजूद कोई लाभ नहीं मिल रहा। फसल बेचने के लिए उन्हें करीब 15 किलोमीटर दूर शिवरामपुर मंडी जाना पड़ता है। इससे भाड़ा और मजदूरी दोनों का खर्च बढ़ जाता है। यदि गांव की मंडी चालू हो जाए तो किसानों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।
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