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Chitrakoot News: आबकारी अधिनियम मामले में आरोपी को जमानत मिली
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चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला ने आबकारी अधिनियम के एक मामले में आरोपी संदीप सिंह को जमानत दे दी है। उसे 20,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की एक जमानत दाखिल करने पर रिहा किया जाएगा। यह मामला रैपुरा थाना क्षेत्र से संबंधित है।
थाना रैपुरा में वर्ष 2024 में पुलिस ने संदीप के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में आरोपी जेल में है। आरोपी के वकील ने कोर्ट में जमानत अर्जी डाली थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह निर्दोष है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। सहायक अभियोजन अधिकारी ने भी अपराध को जमानती बताया। (संवाद)
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जमीन विवाद में अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का दिया आदेश
चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला ने जमीन विवाद के मामले में पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। उन्होंने यह आदेश परिवादी सुरेश के प्रार्थना पत्र पर दिया। यह मामला रैपुरा थाना क्षेत्र के गौरिया गांव में जमीन पर अवैध कब्जे और पत्थर उखाड़ने से जुड़ा है।
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गौरिया गांव निवासी सुरेश ने अपनी आराजी संख्या 124 और 205 पर हदबंदी के बाद कब्जा मिलने का दावा किया था। उपजिलाधिकारी मानिकपुर के आदेश पर 23 सितंबर 2025 को हदबंदी हुई थी। 28 दिसंबर 2025 को पत्थरगड़ी कर उसे कब्जा दिलाया गया था। आरोप है कि 20 जनवरी 2026 को राजेंद्र, पप्पू, संतोष कुमार और दीपक ने जमीन से पत्थर उखाड़ दिए। जब सुरेश मौके पर पहुंचा तो आरोपियों ने गाली-गलौज और मारपीट का प्रयास किया। घटना की सूचना पुलिस और तहसील कार्यालय को दी थी। पुलिस अधीक्षक, आयुक्त और मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उसने अदालत की शरण ली। सुनवाई में न्यायालय ने पाया कि मामला संज्ञेय प्रकृति का है। इसलिए अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को बयान के लिए होगी।
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थाना रैपुरा में वर्ष 2024 में पुलिस ने संदीप के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में आरोपी जेल में है। आरोपी के वकील ने कोर्ट में जमानत अर्जी डाली थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह निर्दोष है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। सहायक अभियोजन अधिकारी ने भी अपराध को जमानती बताया। (संवाद)
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जमीन विवाद में अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का दिया आदेश
चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला ने जमीन विवाद के मामले में पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। उन्होंने यह आदेश परिवादी सुरेश के प्रार्थना पत्र पर दिया। यह मामला रैपुरा थाना क्षेत्र के गौरिया गांव में जमीन पर अवैध कब्जे और पत्थर उखाड़ने से जुड़ा है।
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गौरिया गांव निवासी सुरेश ने अपनी आराजी संख्या 124 और 205 पर हदबंदी के बाद कब्जा मिलने का दावा किया था। उपजिलाधिकारी मानिकपुर के आदेश पर 23 सितंबर 2025 को हदबंदी हुई थी। 28 दिसंबर 2025 को पत्थरगड़ी कर उसे कब्जा दिलाया गया था। आरोप है कि 20 जनवरी 2026 को राजेंद्र, पप्पू, संतोष कुमार और दीपक ने जमीन से पत्थर उखाड़ दिए। जब सुरेश मौके पर पहुंचा तो आरोपियों ने गाली-गलौज और मारपीट का प्रयास किया। घटना की सूचना पुलिस और तहसील कार्यालय को दी थी। पुलिस अधीक्षक, आयुक्त और मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उसने अदालत की शरण ली। सुनवाई में न्यायालय ने पाया कि मामला संज्ञेय प्रकृति का है। इसलिए अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को बयान के लिए होगी।