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Chitrakoot News: पार्किंग व्यवस्था न होने से परिक्रमा के लिए रामघाट आने वाले श्रद्धालु बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 18 May 2026 01:10 AM IST
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17 सीकेटीपी-46-रामघाट क्षेत्र में रास्ते पर खड़ी गाड़ियां। संवाद
- फोटो : विकास भवन।
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चित्रकूट। धार्मिक नगरी के रामघाट क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इस कारण श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी होती है। अमावस्या और अन्य प्रमुख पर्वों पर लाखों की संख्या में पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों को अपने वाहन डेढ़ से दो किमी दूर खड़े करने पड़ते हैं। इसके बाद उन्हें पैदल ही वहां तक पहुंचना पड़ता है, जिससे विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को अधिक दिक्कत होती है।
पुरोहितों के अनुसार, अमावस्या और प्रमुख त्योहारों के दौरान रामघाट में पांच से 10 लाख श्रद्धालु आते हैं। इनमें से करीब ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु निजी वाहनों से चित्रकूट पहुंचते हैं। पार्किंग स्थल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को वाहन खड़ा करने में दुश्वारी होती है। श्रद्धालुओं को शंख चौराहे के पास या उससे आगे वाहनों को खड़ा करना पड़ रहा है।
इससे न केवल श्रद्धालुओं को असुविधा होती है, बल्कि शहर में जाम की स्थिति भी बन जाती है। ई-रिक्शा भी घाटों तक नहीं जा पा रहे हैं, जिससे पैदल चलने की दूरी और बढ़ जाती है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को हो रही है।
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बुजुर्ग माता-पिता के साथ पैदल पहुंचे श्रद्धालु
कानपुर से आए शिवम ने बताया कि अमावस्या स्नान के लिए परिवार के साथ चित्रकूट पहुंचे थे। उनकी गाड़ी शंख चौराहे के पास ही रुकवा दी गई। साथ में 60 वर्षीय मां और 68 वर्षीय पिता हैं, जिन्हें चलने में दिक्कत होती है। इसके बावजूद उन्हें पैदल ही रामघाट तक जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा भी घाट तक नहीं जा रहे थे, जिससे परेशानी और बढ़ गई।
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बस यात्रियों को भी उठानी पड़ी दिक्कत
फतेहपुर के सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि वह मित्रों के साथ बस से अमावस्या स्नान के लिए आए थे। बस को काफी पहले ही रोक दिया गया, जिसके बाद सभी को पैदल घाट तक पहुंचना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि घाट के पास पार्किंग की व्यवस्था होती तो श्रद्धालुओं को राहत मिलती।
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बोले जिम्मेदार
पार्किंग स्थल के लिए उपयुक्त जगह तलाश की जा रही है। स्थान मिलते ही उसका एस्टीमेट तैयार कराया जाएगा। इससे भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
- आरके रावत, उपनिदेशक पर्यटन
पुरोहितों के अनुसार, अमावस्या और प्रमुख त्योहारों के दौरान रामघाट में पांच से 10 लाख श्रद्धालु आते हैं। इनमें से करीब ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु निजी वाहनों से चित्रकूट पहुंचते हैं। पार्किंग स्थल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को वाहन खड़ा करने में दुश्वारी होती है। श्रद्धालुओं को शंख चौराहे के पास या उससे आगे वाहनों को खड़ा करना पड़ रहा है।
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इससे न केवल श्रद्धालुओं को असुविधा होती है, बल्कि शहर में जाम की स्थिति भी बन जाती है। ई-रिक्शा भी घाटों तक नहीं जा पा रहे हैं, जिससे पैदल चलने की दूरी और बढ़ जाती है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को हो रही है।
बुजुर्ग माता-पिता के साथ पैदल पहुंचे श्रद्धालु
कानपुर से आए शिवम ने बताया कि अमावस्या स्नान के लिए परिवार के साथ चित्रकूट पहुंचे थे। उनकी गाड़ी शंख चौराहे के पास ही रुकवा दी गई। साथ में 60 वर्षीय मां और 68 वर्षीय पिता हैं, जिन्हें चलने में दिक्कत होती है। इसके बावजूद उन्हें पैदल ही रामघाट तक जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा भी घाट तक नहीं जा रहे थे, जिससे परेशानी और बढ़ गई।
बस यात्रियों को भी उठानी पड़ी दिक्कत
फतेहपुर के सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि वह मित्रों के साथ बस से अमावस्या स्नान के लिए आए थे। बस को काफी पहले ही रोक दिया गया, जिसके बाद सभी को पैदल घाट तक पहुंचना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि घाट के पास पार्किंग की व्यवस्था होती तो श्रद्धालुओं को राहत मिलती।
बोले जिम्मेदार
पार्किंग स्थल के लिए उपयुक्त जगह तलाश की जा रही है। स्थान मिलते ही उसका एस्टीमेट तैयार कराया जाएगा। इससे भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
- आरके रावत, उपनिदेशक पर्यटन

17 सीकेटीपी-46-रामघाट क्षेत्र में रास्ते पर खड़ी गाड़ियां। संवाद- फोटो : विकास भवन।

17 सीकेटीपी-46-रामघाट क्षेत्र में रास्ते पर खड़ी गाड़ियां। संवाद- फोटो : विकास भवन।

17 सीकेटीपी-46-रामघाट क्षेत्र में रास्ते पर खड़ी गाड़ियां। संवाद- फोटो : विकास भवन।