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Chitrakoot News: 55 लाख का ऑक्सीजन प्लांट शोपीस, सिलिंडरों से दी जा रही ऑक्सीजन
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 31 Mar 2026 12:18 AM IST
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फोटो- 30सीकेटीपी 10 जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सिलिंडर से मरीजों को दी जाती आक्सीजन आपूर्ति।
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चित्रकूट। जिला अस्पताल में पांच साल पहले 55 लाख की लागत से स्थापित ऑक्सीजन प्लांट अब शोपीस बनकर रह गया है। तीन सौ लीटर प्रति मिनट की उत्पादन क्षमता वाला यह संयंत्र अक्सर खराब रहता है, जिस कारण मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है।
कोरोना महामारी के दौरान तत्कालीन लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री ने अपनी विधायक निधि से यह प्लांट लगवाया था। हालांकि, प्लांट और पाइपलाइन में बार-बार खराबी आती है। इससे मरीजों को परेशानी होती है और गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। ऑक्सीजन प्लांट के बंद होने से मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ता है। अस्पताल प्रशासन पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति का दावा करता है, पर अधिकांश मरीजों को सिलिंडर से ही ऑक्सीजन मिलती है।
इमरजेंसी वार्ड के छह बेड में पाइपलाइन केवल दिखावा है। सोमवार को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती पांच मरीजों में से तीन को ऑक्सीजन दी गई, जिसमें से दो को सिलिंडर और एक को पाइपलाइन से मिली। पांच दिन पहले 25 मार्च को भी इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को सिलिंडर से ही ऑक्सीजन दी गई थी। महिला वार्ड में तो अभी तक ऑक्सीजन की पाइपलाइन भी नहीं पहुंचाई गई है।
सिलिंडर आपूर्ति पर उठे सवाल
समाजसेवी रोहित सिंह पटेल ने ऑक्सीजन प्लांट को केवल दिखावा बताया है। मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जाती है। पटेल ने हर माह होने वाली सिलिंडर आपूर्ति और प्लांट पर खर्च की जांच की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि सिलिंडर से ऑक्सीजन की आपूर्ति में कोई खेल हो सकता है।
बोले जिम्मेदार
इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को प्लांट से ही पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। कभी कभार मरीजों की संख्या बढ़ने पर सिलिंडर से आपूर्ति की जाती है।
-डॉ. शैलेंद्र कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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कोरोना महामारी के दौरान तत्कालीन लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री ने अपनी विधायक निधि से यह प्लांट लगवाया था। हालांकि, प्लांट और पाइपलाइन में बार-बार खराबी आती है। इससे मरीजों को परेशानी होती है और गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। ऑक्सीजन प्लांट के बंद होने से मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ता है। अस्पताल प्रशासन पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति का दावा करता है, पर अधिकांश मरीजों को सिलिंडर से ही ऑक्सीजन मिलती है।
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इमरजेंसी वार्ड के छह बेड में पाइपलाइन केवल दिखावा है। सोमवार को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती पांच मरीजों में से तीन को ऑक्सीजन दी गई, जिसमें से दो को सिलिंडर और एक को पाइपलाइन से मिली। पांच दिन पहले 25 मार्च को भी इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को सिलिंडर से ही ऑक्सीजन दी गई थी। महिला वार्ड में तो अभी तक ऑक्सीजन की पाइपलाइन भी नहीं पहुंचाई गई है।
सिलिंडर आपूर्ति पर उठे सवाल
समाजसेवी रोहित सिंह पटेल ने ऑक्सीजन प्लांट को केवल दिखावा बताया है। मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जाती है। पटेल ने हर माह होने वाली सिलिंडर आपूर्ति और प्लांट पर खर्च की जांच की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि सिलिंडर से ऑक्सीजन की आपूर्ति में कोई खेल हो सकता है।
बोले जिम्मेदार
इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को प्लांट से ही पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। कभी कभार मरीजों की संख्या बढ़ने पर सिलिंडर से आपूर्ति की जाती है।
-डॉ. शैलेंद्र कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल।

फोटो- 30सीकेटीपी 10 जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सिलिंडर से मरीजों को दी जाती आक्सीजन आपूर्ति।